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मोदीजी की थोपी गई सकारात्मक छवि ही देश का काल न बन जाएं!

मोदीजी की थोपी गई सकारात्मक छवि ही देश का न बन जाएं! ......बहुत खतरनाक महामारी है, मोदी बचा रहा है अन्यथा यहाँ भी सड़कों पर लाशों के ढेर लगे होते, कोई उठाने वाला नहीं होता,  पूरी दुनिया में देखा नहीं क्या? दूसरे देशों में लोग जरूरत न हो तो खिड़की भी नहीं खोलते  और यहाँ कितने ‘अनएजुकेटेड’ और जाहिल लोग है, किसी भी बिना ‘स्टैण्डर्ड’ की दूकान से सामान खरीद लेंगे, गाँव के लोग तो बिलकुल उजड्ड हैं, इनके क्या है फालतू बार बार बाहर निकलेंगे (बेचारा जिस आदमी का काम ही बार बार बाहर जाने का है, वह भी इनके लिए फालतू है), हम तो निकलते ही नहीं हैं किसी के घर भी नहीं जाते, उसके यहाँ पानी भी नहीं पीते, कुछ हो गया तो? भारत  के लोग बहुत लापरवाह हैं, सब्जियां लाते ही साबुन से धोकर दो दिन रख दो फिर काम में लो.....बाहर तो निकलो ही मत आदि आदि और न जाने क्या क्या? पिछले पांच महीने से हमारे पडोसी भाईसाहब और उनके जैसे बहुत लोग यही सब ज्ञान बाँट रहे हैं, मैंने पाया कि इनमें ज्यादातर लोग वे हैं जिनके घर में अच्छा वेतन या पेंशन आती है या अन्य बहुत अच्छे आय के स्त्रोत है और ऐसे लोगों को अपना भविष्य...

टीके से मृत्यु का 2 सप्ताह में तीसरा मामला ! टीकाकरण के बाद कानपुर में दो बच्चों की मौत से मचा हड़कंप, सीएमओ ने स्टाॅक सील कर दिए जांच के आदेश

टीके से मृत्यु का 2 सप्ताह में तीसरा मामला  ****************************************** दुनिया में एक माता की गोद में अपने हँसते खेलते बच्चे के शव से बड़ा दुःख शायद ही कोई और हो  जिस बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य की कामना से सरकार द्वारा चलाये जा रहे तथाकथित स्वास्थ्य अभियान पर विश्वास कर अपने बच्चो को इन सरकारी चमचो के हाथो में सौंप कर क्या पता था कि बच्चा न तो स्वस्थ मिला न बीमार मिला वह मृत्यु को ही मिला  जब यह सरकारी गुलाम टीके न लगवाने पर माता-पिता से लिखित में मांगते है की यदि टीके न लगाने के कारन बच्चे को कुछ बीमारी हुई तो ज़िम्मेदार माता-पिता होंगे।  अब इस सरकारी तंत्र से पूछो की अपने बच्चे की भलाई माता पिता बेहतर सोचे सकते है या ये सरकारी नौकर जिन्हे ऊपर से आदेश पर बिना बुद्धि के टारगेट पूरा करने की  जल्दी होती है लेकिन अब जब टीके लगने के बाद बच्चे की मृत्यु हो गई अब किसकी ज़िम्मेदारी है? लेकिन नहीं नियम कानून तो सब इनकी संपत्ति है जैसे भी हो तोड़ मरोड़ कर हमें चुप करवा देंगे  अभी के लिए तो हर एक ऐसे समाचार को अधिक से अधिक आग की तरह फैलाएंगे लेकिन हम चुप नहीं...

घी क्यों और कितना खाएं? - इस विषय पर संक्षिप्त परन्तु तृप्त करने योग्य जानकारी।

घी क्यों और कितना खाएं? इस विषय पर संक्षिप्त परन्तु तृप्त करने योग्य जानकारी। चाय, हृदय रोगी, मोटापा, जोड़ो के दर्द से मुक्ति सुंदर त्वचा के इक्छुक अवश्य पढ़ें बिना घी की रोटी खाने वालों आपको मुर्ख बनाया गया है, जानिए .....सच्चाई क्या है दोस्तों, हर घर से एक आवाज जरुर आती है, “मेरे लिए बिना घी की रोटी लाना”, आपके घर से भी आती होगी, लेकिन घी को मना करना सीधा सेहत को मना करना है। लोगो तला हुआ या चिकनाहट वाले भोजन में अंतर नही पता अतः वह घी से दूरी बना लेते है। पहले के जमाने में लोग सामान्य दिनचर्या में घी का निसंकोच प्रयोग करते थे। इस लेख में घी का अर्थ है देसी गाय का वैदिक विधि से बिलोने से बना शुद्द देशी घी। मलाई से या किसी और शॉर्टकट से बना घी जैसा पदार्थ घी नही है। घी को अच्छा माना जाता था और कोलेस्ट्रोल और हार्ट अटैक जैसी बीमारियाँ कभी सुनने में भी नही आती थी। लेकिन फिर आरंभ हुआ घी का योजनाबद्ध नकारात्मक एवं गलत प्रचार। बड़ी बड़ी विदेशी कंपनियों ने डॉक्टरों के साथ मिलकर अपने बेकार और अनावश्यक उत्पादों का बाजार खड़ा कराने के लिए लोगों में घी के प्रति भ्रम फैलाया और कहा कि "घी से मोटा...

लोकल नही स्वदेशी वो भी उचित औऱ पूर्ण स्वदेशी!

लोकल नही स्वदेशी वो भी उचित औऱ पूर्ण स्वदेशी           कुछ दिन पहले "उचित स्वदेशी" के शीर्षक वाली एक पोस्ट डाली थी, जिसमे सभी देशवासियों से निवेदन किया था कि स्वदेशी सामान का माध्यम भी स्वदेशी हो तो ही उचित है कोरोना के बाद भी यदि हम भारतवासियों की आँखें न खुली तो भारत क़र्ज़ के ऐसे दुष्चक्र में फँस जायेगा जिसको चुकाते चुकाते हमारी आने वाली पीढ़ियां पूर्ण आर्थिक गुलामी में फस जाएगी।      मैंने यह भी लिखा था कि हो सकता है वर्तमान आर्थिक संकट से निपटने के लिए सरकार बड़े बड़े आर्थिक सहायता पैकेज देश को दें परन्तु वह मुख्यतः लोन के माध्यम से ही मिलेगा और यह क़र्ज़ जो किसी नेता को अपनी जेब से नहीं अपितु भारत की प्रजा को ही चुकाने है उसके लिए जापान की तरह स्वावलम्बी बनने का पहला चरण उचित स्वदेशी के माध्यम से ही मिलेगा।      हमारे मोदी जी द्वारा कल दिए राष्ट्र के नाम सन्देश में कुछ नया नहीं लगा जो आशा थी।  वही उन्होंने कहा परन्तु सबसे दुःखद लगा की उन्होंने स्वदेशी शब्द एक बार भी प्रयोग नहीं किया और केवल लोकल शब्द का प्रयोग किय...

आपको ऐसा क्यों लगता है कि मैं मोदी विरोधी हूँ?

यह इस देश के एक युवा के मन की बात है ! अब राहुल गाँधी अभी तक युवा नेता है तो मैं भी स्वयं को युवा कह सकता हूँ! जिसकी जैसी दृष्टि होगी उसको इस लेख में वैसा ही अर्थ और भाव नज़र आएगा इसीलिए यदि आपको ऐसा क्यों लगता है कि मैं मोदी विरोधी या प्रशंसक हूँ? तो उसका दोष या श्रेय मुझे नहीं स्वयं को दें! भले ही मैं व्यक्तिगत रूप से कोरोना षड्यंत्र का समर्थक नहीं परन्तु फिर भी जिस प्रकार से मोदी जी के सशक्त नेतृत्व में इस स्थिति से निपटा गया, उसकी मैं प्रशंसा करता हूँ। यही कारण है कि वो सबकी पसंद थे चाहे देश की प्रजा हो या विश्व के अन्य देश। इसी क्षमता के लिए उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया। गुजराती व्यक्ति अपना प्रचार करना बहुत अच्छे से जानता है यह उनका भी स्वाभाविक गुण है। यदि यह नेतृत्व कांग्रेस का होता तो जो विनाश कुछ वर्षो में होना था वो इन कुछ महीनो में हो जाता परन्तु ध्यान देने योग्य बात यह है की विनाश टला नहीं है होगा अवश्य। अब मेरी इस पोस्ट को मोदी विरोधी समझो या पक्ष में परन्तु सत्य है कि मैं उनका सबसे बड़ा शुभचिंतक हूँ, जैसे कोई कवि व्यंग्य में किसी को भी लपेट कर मर्यादा में अंत...

योगीजी से विनम्र प्रश्न!

योगीजी से विनम्र प्रश्न योगी आदित्यनाथ के लिए मेरे मन मे बहुत सम्मान है। जो उनके जीवन पर लिखी पुस्तक "The monk who became Chief Minister" पढ़ने के बाद और बढ़ गया। मोदी जी का अच्छा विकल्प है यह मानने लगा हूँ। परंतु हाल ही में एक छोटी सी घटना से योगी जी के लिए एक प्रश्न अनायास ही मस्तिष्क में आया। जो किसी भी प्रकार से उनके प्रति किसी दुर्भावना के अंतर्गत नही उपजा अपितु उनकी ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि उन जैसे निर्भीक सन्यासी को ऐसा निर्णय लेना पड़ा।  यह प्रश्न का विषय है कोरोना lockdown के समय उनके दिवंगत पिता जी के अंतिम संस्कार में न जाने के निर्णय के बारे मे। जैसा कि सबको पता है कि वह एक सन्यासी है  तो प्रश्न यह है कि क्या सन्यासी धर्म के अनुसार किसी सन्यासी को अपने त्यागे हुए परिवार के अंतिम संस्कार में जाने का नियम है? सन्यास लेने के पश्चात अपने माता पिता या परिवार से पूर्णतया विरक्त हो जाता है सन्यास नियम के अनुसार वह सब त्याग देता है तो अपने पिता के अंतिम संस्कार में यदि lockdown नही भी होता तो भी योगी जी शायद नही जाते। परंतु वहां न जाकर उसे कोरोना lockdown का पालन करने का विषय...

दुनिया में शेर है भारत, परिक्षण का चूहा नहीं

दुनिया में शेर है भारत, परिक्षण का चूहा नहीं. क्या आपको पता है? टीको को बनाने और बाजार में उतारने के नियम और मानक अन्य एलॉपथी की दवाइयों के मजूरी वाले मानकों से अलग होते है यदि टीको को बाजार में उतारने के मानक अन्य दवाइयों के मानकों की तरह कर दिए जाए तो संभवतः कोई भी टीका बाजार में उतारने योग्य न हो। इसीलिए कंपनियां कई देशो की गरीब लोगो पर यह परिक्षण उनकी भलाई के नाम पर करती है जो उन्हें बहुत सस्ता पड़ता है टीको के पीछे का आर्थिक लाभ कितना बड़ा है इसका अनुमान केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि बच्चो के टीकाकरण के चार्ट में एक नया टीका जोड़ने से एक कंपनी हज़ारो करोड़ का धंधा करती है और कोरोना का टीका बनाकर दुनिया के हर व्यक्ति को लगाने से होने वाली कमाई इतनी अधिक है कि इस दौड़ में जिसने पहले टीका बना लिया उसके लिए यह सोने की खान साबित होगी पाकिस्तान ने चीन को अपने नागरिको पर कोरोना के टीके के परिक्षण की आज्ञा दी है क्योंकि चीन उसके क़र्ज़ माफ़ करेगा या अन्य प्रकार के लाभ उसको मिल सकते है चीन ने ऐसे ही क़र्ज़ माफ़ी के द्वारा श्रीलंका की एक बंदगाह पर कब्ज़ा कर लिया ह...

रामायण में पुष्पक विमान का क्या था मार्ग? - काल्पनिक नहीं है रामायण!

रामायण में रावण द्वारा सीताजी के हरण में पुष्पक विमान का क्या था मार्ग? प्रमाण: काल्पनिक नहीं है रामायण! रावण द्वारा सीता हरण करके श्रीलंका जाते समय पुष्पक विम ान का मार्ग क्या था ? उस मार्ग में कौनसा वैज्ञानिक रहस्य छुपा हुआ है ? उस मार्ग के बारे में लाखों साल पहले कैसे जानकारी थी ? पढ़ो इन प्रश्नों के उत्तर वामपंथी इतिहारकारों के लिए मृत्यु समान हैं | भारतबन्धुओ ! रावण ने माँ सीता का अपहरण पंचवटी (नासिक, महाराष्ट्र) से किया और पुष्पक विमान द्वारा हम्पी (कर्नाटका), लेपक्षी (आँध्रप्रदेश ) होते हुए श्रीलंका पहुंचा | आश्चर्य होता है जब हम आधुनिक तकनीक से देखते हैं की नासिक, हम्पी, लेपक्षी और श्रीलंका बिलकुल एक सीधी लाइन में हैं | अर्थात ये पंचवटी से श्रीलंका जाने का सबसे छोटा रास्ता है | अब आप ये सोचिये लाखो वर्ष पहले Google Map नहीं था जो Shortest Way बता देता | फिर कैसे उस समय ये पता किया गया की सबसे छोटा और सीधा मार्ग कौनसा है ? या अगर भारत विरोधियों के अहम् संतुष्टि के लिए मान भी लें की चलो रामायण केवल एक महाकाव्य है जो वाल्मीकि ने लिखा तो फिर ये बताओ की उस ज़माने मे...

मानवजाति का उपहास करती प्रकृति माँ! / Mankind's mistakes & Nature Enjoys!

मानवजाति का उपहास करती प्रकृति माँ!  मानव जगत के षडयंत्रो में जीवजगत का आनंद छुपा है  एक बात सुनी थी की यदि पृथ्वी से मधुमक्खी विलुप्त हो जाये तो मानवजाती 50 वर्ष में विलुप्त हो जाएगी  और यदि मनुष्य विलुप्त हो जाये तो पूरी पृथ्वी 50 वर्ष में विषमुक्त हो जाएगी  आज मनुष्यजाति द्वारा किये गए कोरोना के षडयंत्र का आनंद प्रकृति ले रही है  जहाँ मनुष्यो के 3 दिन की अनुपस्थिति में पूरे देश में विभिन्न शहरो की सड़को पर वन्य जीव आनंद से विचरण कर रहे है।  इन निरीह प्राणियों को क्या पता की इन कंक्रीट के जंगल उनके योग्य नहीं है  हे गोमाता की ही स्वरूपा नीलगाय अभी कुछ दिन बाद देखना यह मनुष्य तुमको कानून की और से मिली खुली आज्ञा के बिना किसी दया के गोली मार देगा।   हे पक्षियों! कुछ दिन बाद देखना जब यह सब अपने घर की क़ैद से छूटेंगे तो फिर से मांसाहार करने को इनकी लार टपकेगी  घर का खाना से तंग आये हुए फिर से भूखे सांड की तरह सड़कछाप और बाज़ारू खाने की ओर लपकेगा या ऑनलाइन आर्डर करेगा  फिर से अंतराष्ट्रीय पिज़्ज़ा बर्गर खाकर अपनी ...

मॉडर्न आयुर्वेद ने वास्तविक आयुर्वेद का किया नाश!

मॉडर्न आयुर्वेद ने वास्तविक आयुर्वेद का किया नाश! यह शीर्षक समझने के लिए इस चित्र को देखिए। इस चित्र में लगी मूर्ति हमारे सुश्रुत ऋषि जी की है जो "Royal Australian Society of surgeons" के प्रांगण में लगी है। विडंबना देखिए जिस आयुर्वेद के ऋषि कें ज्ञान कर कारण पूरी दुनिया ने सर्जरी अर्थात शल्य चिकित्सा सीखी आज आधुनिक आयुर्वेद शिक्षा संस्थानों से किसी भी डिग्री धारक (BAMS) को सर्जरी करने का अधिकार नही है। यह तो वही बात हुई कि बच्चों के माता-पिता को अपने ही बच्चो से वंचित कर दिया जाएं। आज कुछ विलक्षण बुद्धि वाले आयुर्वेदिक डॉक्टरों को यदि छोड़ दिया जाए तो आज अधिकतर आयुर्वेद के डिग्री धारक इलाज एलोपैथी का प्रयोग कर तुरंत परिणाम के लालच में कर रहे है। इसका बड़ा कारण है कि इसमें अधिकतर वह लोग है जो MBBS नही कर पाए लेकिन नाम के आगे डॉक्टर, गले मे स्टेथोस्कोप और शरीर पर सफेद कोट लगाने की धुन में BAMS करना पड़ता है। लेकिन मन से MBBS ही है। अधिकांश लोगो को यह संभवतः ज्ञात न हो कि BHMS(होम्योपैथी), BAMS(आर्युवेद) की तरह MBBS भी स्नातक अर्थात bachelor's डिग्री है और इस...

Don't Say "Cheese", Say "Ghee"

Don't Say "Cheese", Say "Ghee" कैसे बनता है गंगातीरी गाय का सूर्य तापित घृत?

बचपन की गोधूलि वेला

बचपन की गोधूलि वेला गोधूलि का अर्थ है संध्या के समय जंगल से चरकर आती हुई गाय के खुरो से उड़ती हुई पवित्र धूल परन्तु जिसने इस गोधूलि वेला के केवल शाब्दिक अर्थ को समझा और प्रत्यक्ष अनुभव से आज तक वंचित वह अभागा ही कहलायेगा। इसका कारण यह है की इस शब्द का केवल इतना सा अर्थ नहीं है, इसके अनेक और गहरे अर्थ है। मेरा व्यक्तिगत मानना है की हिंदी साहित्य को तब तक सही अर्थो में नहीं समझा जा सकता जब तक आपने स्वयं ग्रामीण परिवेश निकटता से नहीं देखा है। 1980 से 1990 के बीच जन्मी पीढ़ी उन कुछ भाग्यशाली अंतिम पीढ़ियों में से है जिन्होंने इसका अनुभव किया है। राजस्थान के नीमराना के किले से 10 किलोमीटर दूर स्थित मेरे पैतृक गाँव में बचपन मैंने चूना बनते भी देखा है, ऊँट से बंधी रस्सी पर बैठकर कुए से पानी भी खींचा है, चूल्हे के लिए जंगल से लकड़ी भी चुनी है, बालू रेत की भर में लुढ़के है, खेत में घर से आयी हुई रोटी भी खायी है, दादा जी के देहांत पर 13 दिन तक बैठ कर गरुड़ पुराण भी सुनी है, जिसे स्थानीय बोली में "गरड़ बांचना" कहते है, परदादी के द्वारा नज़...