लोकल नही स्वदेशी वो भी उचित औऱ पूर्ण स्वदेशी कुछ दिन पहले "उचित स्वदेशी" के शीर्षक वाली एक पोस्ट डाली थी, जिसमे सभी देशवासियों से निवेदन किया था कि स्वदेशी सामान का माध्यम भी स्वदेशी हो तो ही उचित है कोरोना के बाद भी यदि हम भारतवासियों की आँखें न खुली तो भारत क़र्ज़ के ऐसे दुष्चक्र में फँस जायेगा जिसको चुकाते चुकाते हमारी आने वाली पीढ़ियां पूर्ण आर्थिक गुलामी में फस जाएगी। मैंने यह भी लिखा था कि हो सकता है वर्तमान आर्थिक संकट से निपटने के लिए सरकार बड़े बड़े आर्थिक सहायता पैकेज देश को दें परन्तु वह मुख्यतः लोन के माध्यम से ही मिलेगा और यह क़र्ज़ जो किसी नेता को अपनी जेब से नहीं अपितु भारत की प्रजा को ही चुकाने है उसके लिए जापान की तरह स्वावलम्बी बनने का पहला चरण उचित स्वदेशी के माध्यम से ही मिलेगा। हमारे मोदी जी द्वारा कल दिए राष्ट्र के नाम सन्देश में कुछ नया नहीं लगा जो आशा थी। वही उन्होंने कहा परन्तु सबसे दुःखद लगा की उन्होंने स्वदेशी शब्द एक बार भी प्रयोग नहीं किया और केवल लोकल शब्द का प्रयोग किय...
आने वाली पीढ़ियों को समर्पित