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क़र्ज़ लेकर सैलरी पाती देश की सरकारें, नहीं करेंगे सम्मान हम !

देश के किसी भी राज्य का हाल उठा लो ऐसा ही है  और देश का तो इस से भी बुरा यही  इस कर्ज़ को हमारी आने वाली पीढ़ियाँ कैसे चुकाएंगी! जब देश में थाईलैंड की तरह शरीर बेचकर पर्यटन बढ़ाना पड़ेगा तब यह नेता नहीं आएंगे तुम्हारी इज़्ज़त बचाने उत्तराखंड राज्य पर है 66 हज़ार करोड़ का कर्ज़ा नेताओ की घोषित इतनी है तो अघोषित कितनी होगी  क़र्ज़ लेकर सैलरी पाती देश की सरकारें, नहीं करेंगे सम्मान हम  

प्राइवेट ट्रेन खुद तय करेंगी अपना किराया, सरकार देगी छूट

 प्राइवेट ट्रेन खुद तय करेंगी अपना किराया, सरकार देगी छूट ************************************************************* निजी कंपनियों को ट्रैन का किराया अपनी मर्ज़ी से तय करने की मिली छूट अब सरकार को क्या दोष दें, इतना तो समझ आ गया है  इस PM की कुर्सी पर कोई पार्टी आ जाये, देश उसी दिशा में जायेगा जहाँ उसे वैश्विक माफिया शक्तियां ले जाएँगी।  इस विषय का इंतज़ार रहेगा की इन ट्रैन में सांसदों को मुफ्त में ढोया जायेगा या नहीं? अब इस कड़वे निर्णय को सही साबित करने के लिए टिपण्णी में बहुत ही सकारात्मक शब्दों का शहद लगाकर हमें चटवाया जायेगा और उस निर्णय के अलसी स्वाद के आने तक हम वाह वाह करेंगे और बाद में आह करेंगे लेकिन बहुमत जो वोटिंग मशीन के दम पर मिला है उसका असली उद्देश्य तो अभी पूरा करना है।   अब हमें सरकार विरोधी, वामपंथी, कांग्रेसी और इस कड़वे निर्णय को सही साबित करने के लिए टिपण्णी में बहुत ही सकारात्मक शब्दों का शहद लगाकर हमें चटवाया जायेगा और उस निर्णय के असली स्वाद के आने तक हम वाह वाह करेंगे और बाद में आह करेंगे हास्यास्पद है कि इन निजी कंपनियों के लिए ट्रैन कि...

टीके से मृत्यु का 2 सप्ताह में तीसरा मामला ! टीकाकरण के बाद कानपुर में दो बच्चों की मौत से मचा हड़कंप, सीएमओ ने स्टाॅक सील कर दिए जांच के आदेश

टीके से मृत्यु का 2 सप्ताह में तीसरा मामला  ****************************************** दुनिया में एक माता की गोद में अपने हँसते खेलते बच्चे के शव से बड़ा दुःख शायद ही कोई और हो  जिस बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य की कामना से सरकार द्वारा चलाये जा रहे तथाकथित स्वास्थ्य अभियान पर विश्वास कर अपने बच्चो को इन सरकारी चमचो के हाथो में सौंप कर क्या पता था कि बच्चा न तो स्वस्थ मिला न बीमार मिला वह मृत्यु को ही मिला  जब यह सरकारी गुलाम टीके न लगवाने पर माता-पिता से लिखित में मांगते है की यदि टीके न लगाने के कारन बच्चे को कुछ बीमारी हुई तो ज़िम्मेदार माता-पिता होंगे।  अब इस सरकारी तंत्र से पूछो की अपने बच्चे की भलाई माता पिता बेहतर सोचे सकते है या ये सरकारी नौकर जिन्हे ऊपर से आदेश पर बिना बुद्धि के टारगेट पूरा करने की  जल्दी होती है लेकिन अब जब टीके लगने के बाद बच्चे की मृत्यु हो गई अब किसकी ज़िम्मेदारी है? लेकिन नहीं नियम कानून तो सब इनकी संपत्ति है जैसे भी हो तोड़ मरोड़ कर हमें चुप करवा देंगे  अभी के लिए तो हर एक ऐसे समाचार को अधिक से अधिक आग की तरह फैलाएंगे लेकिन हम चुप नहीं...