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समस्या ही बिज़नेस मॉडल है!

हमें बचपन से एक बड़ी प्यारी बात समझाई गई है— व्यवस्थाएँ हमारी समस्याएँ हल करने के लिए बनी हैं। कितनी सुंदर बात है! बस एक छोटी सी दिक्कत है… अगर आपकी समस्या ही किसी की रोजी-रोटी हो, तो वह उसे खत्म क्यों करेगा? 2018 में Goldman Sachs के analysts ने pharmaceutical business को लेकर एक सवाल पूछा था— “Is curing patients a sustainable business model?” मतलब— मरीज को हमेशा के लिए ठीक कर देना क्या फायदे का धंधा है? सवाल थोड़ा निर्दयी लगता है। लेकिन हिसाब बहुत सीधा है। एक गोली खाई। बीमारी खत्म। ग्राहक भी खत्म। लेकिन… सुबह एक गोली। रात एक गोली। हर महीने prescription। हर छह महीने test। फिर अगली appointment। वाह! मरीज भी जीवित। बीमारी भी जीवित। और business भी जीवित। पूरी तरह स्वस्थ आदमी से बीमारी के नाम पर कुछ कमाया नहीं जा सकता और मर चुके आदमी को दवा बेची नहीं जा सकती। इसलिए बाजार के हिसाब से सबसे उपयोगी ग्राहक कौन हुआ? जो मरे भी नहीं… और पूरी तरह ठीक भी न हो। अब नाराज़ डॉक्टरों को पहले ही बता दूँ—बात डॉक्टर की नहीं, उस business incentive की है जिसमें इलाज खत्म होने से revenue भी खत्म हो जाता है। अ...