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"आंवला नवमी" या "आरोग्य नवमी"

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आज "आंवला नवमी" या  "आरोग्य नवमी"  है ।  आँवला के वृक्ष की महिमा का प्रतिष्ठापित करने के लिए इसकी पूजा की जाती है और इसीलिए कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को "आंवला नवमी" या  "आरोग्य नवमी" भी कहा जाता है । गाँवों में इस दिन घर के अंदर भोजन नहीं बनता था । आँवला के पेड़ के नीचे सुबह सुबह साफ सफाई होने लगती थी । आँवला नवमी से एक दिन पहले ही उस स्थान की गाय के गोबर से लिपाई पुताई हो जाती थी । आँवला नवमी के दिन खानदान की सभी स्त्रियाँ इकट्ठी होकर मिट्टी के चूल्हे पर एक साथ पूरे खानदान का भोजन बनाती थी । पुरुष ईंधन और बाल्टी बाल्टी से कूएँ से पानी लाकर देते थे और स्त्रियाँ भोजन बनाती थी । कितनी भी एक दूसरे से मनमुटाव हो , गाँव के सभी लोग एक ही पेड़ के नीचे इक्कट्ठे होकर अपना अपना चूल्हा बनाकर भोजन पकाते थे । आपसी मेल जोल , सौहार्द्र , प्रेम इत्यादि की वृद्धि होती थी । सुबह सुबह आँवला के वृक्ष का पूजन होता था । लोग आँवला की लकड़ी का ही दातौन करते थे । आँवला के वृक्ष की छाया के नीचे ही थाली में भोजन किया जाता था । यह मान्यता थी कि थाली में अगर आँवला के प

वैसी दिवाली के तो अब बस किस्से ही सुनाए जाते है!

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वैसी दिवाली के तो अब बस किस्से ही सुनाए जाते है  दीपावली का सुंदर स्वरूप जो 30+ के लोगों ने जीया है उसे गुलज़ार साहब ने सुंदर शब्दों में पिरोया है,शुभकामनाओं सहित *अब चूने में नील मिलाकर पुताई का जमाना नहीं रहा। चवन्नी, अठन्नी का जमाना भी नहीं रहा। फिर भी गुलजार साहब की लिखी यह कविता बेमिसाल है* ..... हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस पाते हैं दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं   *चलो इस बार दीपावली घर पे मनाते हैं ....*  दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं  चवन्नी -अठन्नी पटाखों के लिए बचाते हैं सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं  *चलो इस बार दीपावली घर पे मनाते हैं ....*  बिजली की झालर छत से लटकाते हैं कुछ में मास्टर बल्ब भी लगाते हैं टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं दो-चार बिजली के झटके भी खाते हैं  *चलो इस बार दीपावली घर पे मनाते हैं ....*  दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते

जानिये असल में किस धन की है धनतेरस?

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जानिये किस धन की है धनतेरस ? क्यों बिना विवेक कुछ भी ख़रीद लेने का दिन नहीं है धनतेरस! और यह धन से सम्बंधित नहीं है ************************************* स्वदेशी एवं स्वास्थ्य के सन्दर्भ में धनतेरस का महत्व कुंठित उपभोक्तावाद से प्रेरित बाजारीकरण के कारण धनतेरस को लेकर कुछ भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास एक प्रश्नावली के द्वारा : प्रश्न: धनतेरस में "धन" शब्द का क्या अर्थ है? उत्तर: यह बहुत कम लोग जानते है की वास्तव में धनतेरस में "धन" शब्द स्वास्थ्य के देवता धनवंतरी से लिया गया है कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। प्रश्न: अगर धन नहीं तो फिर धनतेरस का क्या महत्त्व है? उत्तर: देवी लक्ष्मी हालांकि की धन देवी हैं परन्तु उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए आपको स्वस्थ्य और लम्बी आयु भी चाहिए यही कारण है दीपावली दो दिन पहले से ही यानी धनतेरस से ही दीपामालाएं सजने लगती हें। प्रश्न: आज के दिन कुछ नया खरीदने की परंपरा क्यों है? उत्तर: समुद्र मंथन के समय धन्वन्तरि

जो कुत्ता मारे सो कुत्ता, जो कुत्ता पाले सो कुत्ता

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  जो कुत्ता पाले सो कुत्ता जो कुत्ता मारे सो कुत्ता घर में (प्रेशर) कुकर और कुकुर दोनों ही हानिकारक है।    इस पोस्ट का अर्थ यह कदापि नहीं है कि कुत्तो पर अत्याचार हो या उन्हें सडको से हटा दिया जाए।  अपितु जो लोग सडको पर कुत्तो को रोटी आदि प्रतिदिन देते है उनको मेरा प्रणाम है।  सड़क पर घुमते कुत्ते बहुत ज़रूरी है परन्तु घर में साथ रखने के लिए नहीं।   जिनको ऊपर लिखी बात से ठेस पहुंची है उनको और भी ठेस पहुंचगी यह जानकर कि घर में कुत्ता पालने वालो या कुत्ते को स्पर्श करने वालो के द्वारा कोई भी पुण्य कर्म का लाभ कुकुर पालक को नहीं मिलता।   चाहे वह हवन, यज्ञ, दान या किसी भी अन्य प्रकार का सुकर्म हो। यहाँ तक भी सुनने को मिला कि कुत्ते को स्पर्श करने के बाद 27 दिन तक यज्ञादि करने की अनुमति भी नहीं है।  जिस देश में अतिथि को देवता स्वरुप माना गया और चौखट पर "स्वागतम"  लिखवाया जाता था उस देश में द्वार पर  "कुत्ते से सावधान" का बोर्ड अब स्वागत करता है।   मुझे तो अभी तक समझ नहीं आया की किस कुत्ते से सावधान रहने की चेतावनी है।   कितनी वैज्ञानिकता थी हमारे पूर्वजो में जो हमारे यह

#वैक्सीन विरोधी पर्चा #VaccineVirodhi Pamphlet

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  #वैक्सीन विरोधी पर्चा   #VaccineVirodhi Pamphlet राजीव भाई के विचारो से प्रेरित इस पर्चे को पूरे देश के अखबारों में डालकर बँटवाने में हमारा सहयोग करें  इस पर्चे की पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें  . इस पीडीएफ में दो पेज है जिन्हे आगे पीछे छपवा कर बाँट सकते है।   एक पर्चा राजीव भाई के फोटो के साथ है और एक बिना फोटो के।  जहाँ आपको लगता है की राजीव भाई की फोटो के बिना अधिक लोग इसे पढ़ेंगे वहां उसी प्रकार बांटे।  प्रयास करें कि अखबारों द्वारा ही बाँटे क्योंकि इस विषय को समझने के लिए जो लोग पढ़ सकते है उन तक यह बात पहुंचना आवशयक है जिस से जो नहीं पढ़ सकते उन तक मौखिक रूप से स्थानीय भाषा में अनुवाद कर इस विचार को पंहुचा सकते है।   महत्वपूर्ण यह नहीं है की कितने लोग इस से सहमत या असहमत होंगे, महत्वपूर्ण यह है की इस विषय से अनभिज्ञ लोगो को इस बारे में जानकारी दी जाएँ  यदि किसी भी कारण से आप इसे नहीं बाँट सकते और हमें छपवाने में क्षमतानुसार आर्थिक सहयोग करना चाहते है तो इसके लिए 9212435203 पर सन्देश या virendersingh16@rediffmail.com पर ईमेल करें  यह किसी संस्था या व्यक्ति का प्रचार

प्राइवेट ट्रेन खुद तय करेंगी अपना किराया, सरकार देगी छूट

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 प्राइवेट ट्रेन खुद तय करेंगी अपना किराया, सरकार देगी छूट ************************************************************* निजी कंपनियों को ट्रैन का किराया अपनी मर्ज़ी से तय करने की मिली छूट अब सरकार को क्या दोष दें, इतना तो समझ आ गया है  इस PM की कुर्सी पर कोई पार्टी आ जाये, देश उसी दिशा में जायेगा जहाँ उसे वैश्विक माफिया शक्तियां ले जाएँगी।  इस विषय का इंतज़ार रहेगा की इन ट्रैन में सांसदों को मुफ्त में ढोया जायेगा या नहीं? अब इस कड़वे निर्णय को सही साबित करने के लिए टिपण्णी में बहुत ही सकारात्मक शब्दों का शहद लगाकर हमें चटवाया जायेगा और उस निर्णय के अलसी स्वाद के आने तक हम वाह वाह करेंगे और बाद में आह करेंगे लेकिन बहुमत जो वोटिंग मशीन के दम पर मिला है उसका असली उद्देश्य तो अभी पूरा करना है।   अब हमें सरकार विरोधी, वामपंथी, कांग्रेसी और इस कड़वे निर्णय को सही साबित करने के लिए टिपण्णी में बहुत ही सकारात्मक शब्दों का शहद लगाकर हमें चटवाया जायेगा और उस निर्णय के असली स्वाद के आने तक हम वाह वाह करेंगे और बाद में आह करेंगे हास्यास्पद है कि इन निजी कंपनियों के लिए ट्रैन किराये की अधिकतम सीमा निश्

त्रिफला खाकर हाथी को बगल में दबा कर 4 कोस ले जाएँ! जानिए 12 वर्ष तक लगातार असली त्रिफला खाने के लाभ!

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वह सब जो आप त्रिफला के विषय मे नही जानते! जानिए 12 वर्ष तक लगातार असली त्रिफला खाने के लाभ! त्रिफला खाकर हाथी को बगल में दबा कर 4 कोस ले जाएँ! गोधूली परिवार द्वारा प्रमाणित सर्वश्रेष्ठ त्रिफला गुरुकुल प्रभात आश्रम का *त्रिफला सुधा* त्रिफला के विषय मे सरल एवं विस्तार पूर्वक जाने की क्यो कहा जाता है कि हरड़ बहेड़ा आंवला घी शक्कर संग खाए हाथी दाबे कांख में और चार कोस ले जाए (1 कोस = 3-4 km) वात पित कफ को संतुलित रखने वाला सर्वोत्तम फल त्रिफला वाग्भट्ट ऋषि के अनुसार इस धरती का सर्वोत्तम फल त्रिफला लेने के नियम- त्रिफला के सेवनसे अपने शरीरका कायाकल्प कर जीवन भर स्वस्थ रहा जा सकता है। आयुर्वेद की महान देन त्रिफला से हमारे देश का आम व्यक्ति परिचित है व सभी ने कभी न कभी कब्ज दूर करने के लिए इसका सेवन भी जरुर किया होगा पर बहुत कम लोग जानते है इस त्रिफला चूर्ण जिसे आयुर्वेद रसायन मानता है। अपने कमजोर शरीर का कायाकल्प किया जा सकता है। बस जरुरत है तो इसके नियमित सेवन करने की, क्योंकि त्रिफला का वर्षों तक नियमित सेवन ही आपके शरीर का कायाकल्प कर सकता है। सेवन विध