इस नक़ली नव वर्ष पर कम से कम प्रण तो असली कर सकते है
इस नक़ली नव वर्ष पर कम से कम प्रण तो असली कर सकते है कि धैर्य का अभ्यास करेंगे और 10 मिनट में सामान डिलीवरी और 10 सेकंड वाली रील की मानसिकता से बाहर निकलेंगे क्योंकि घीमी गति का जल और वायु दोनों ही पोषण करती है परन्तु तेज़ गति का जल और वायु दोनों ही विनाशकारी है ठीक यही विचार हमारे जीवनशैली पर भी लागु होती है गिग इकोनॉमी और मेरे प्रिय पहाड़ों की बर्बादी में एक महत्वपूर्ण बिन्दु कॉमन है : मूर्खतापूर्ण, बेसिरपैर की, अर्थहीन “जल्दी”. पर्यटकों को जल्दी है कि कभी बारह घंटे का रहा दिल्ली से मनाली का रास्ता पाँच-छह घंटे में तय करना है. तो ? तो काट दो पहाड़. काट दो तीन-तीन चार-चार सौ साल पुराने देवदार ! The Majestic Mighty Himalayan Cedar Deodar ! बाक़ी देश की जनता है , उसे सब दस मिनट में चाहिए. कंपनी ने आदत लगवाई और आलस्य को बढ़ाने वाली आदतें तो वैसे भी यहाँ लोग लगवाने के लिए पहले ही ताक में बैठे रहते हैं. पता नहीं दस मिनट में सामान मंगवा के ऐसा कौन सा तीर मार लिया जाता है? न जाने बाक़ी के तेइस घंटे पचास मिनट लोग करते क्या हैं? भले ही दस मिनट का लक्ष्य पूरा क...