केवल कर्म करना ही हाथ में है! कई बार जीवन में कुछ ऐसा होता है जो उस समय हमें बिल्कुल गलत लगता है। बस छूट गई। कहीं चयन नहीं हुआ। जिस पर भरोसा था, वही छोड़कर चला गया। और हम तुरंत फैसला सुना देते हैं— मेरे साथ गलत हो गया। पर हमें सच में पता है कि गलत क्या हुआ? हम तो केवल उतना देख पा रहे हैं जितना इस समय हमारे सामने है। आगे उस रास्ते पर क्या था, यह हमें कहाँ मालूम? और मज़े की बात यह है कि जिस जीवन पर हम इतना नियंत्रण चाहते हैं, उसमें वास्तव में हमारा नियंत्रण है ही कितना? अपने शरीर को ही देख लीजिए। करोड़ों कोशिकाएँ हर समय अपना काम कर रही हैं। हृदय धड़क रहा है। खून बह रहा है। शरीर के भीतर न जाने कितनी प्रक्रियाएँ चल रही हैं। आप उनमें से कितनी चला रहे हैं? कुछ भी नहीं। थोड़ा बाहर आइए। पृथ्वी घूम रही है। ग्रह अपनी कक्षाओं में चल रहे हैं। सूर्य कब उगेगा, ऋतु कब बदलेगी, वर्षा कब होगी— इनमें से किसी पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं। सूक्ष्मतम कोशिका से लेकर विराट ग्रह-नक्षत्रों तक व्यवस्था हमारे आदेश से नहीं चल रही। फिर भी आदमी को भ्रम यह है कि मेरा पूरा जीवन मेरी योजना के हिसाब से ही चलना चाहिए! यहीं...
2019 के लगभग एक परिचित के टेबल पर काँच के नीचे एक डॉक्यूमेंट देखा तो मैंने पूछा कि यह महत्वूर्ण जानकारी ऐसे क्यो छिपा कर रखी है तो उन्हीने कहा कि इतने वर्षों में आप पहले व्यक्ति हो जिसने इसको समझा है क्या था वह डॉक्यूमेंट आइए जानते है यह वो प्रमाण है जो आप किसी को भी देकर कुतर्को का मुंह बंद कर सकते है हमें बताया गया कि दुनिया की जनसंख्या कम करने की कोई अंतरराष्ट्रीय योजना वगैरह नहीं है। ऐसी बातें करने वाले बस conspiracy theorists हैं। अच्छा जी! फिर 1974 का यह गुप्त दस्तावेज़ NSSM 200 क्या था? पूरा नाम था— National Security Study Memorandum 200 और इसे तैयार करवाने वालों में प्रमुख नाम था Henry Kissinger का। अब आप सोचेंगे अमेरिका की National Security का भारत, Nigeria, Mexico, Brazil जैसे देशों की जनसंख्या से क्या लेना-देना? यही तो मज़ेदार बात है। दस्तावेज़ युद्ध के बारे में नहीं था। मिसाइल के बारे में नहीं था। इसमें चिंता थी कि विकासशील देशों की जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। और यदि इन देशों के लोग अधिक सम्पन्न होने लगे… तो क्या होगा? वे अधिक भोजन खाएँगे। अधिक ...