सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

virendra लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कैसे बनाएं शरद पूर्णिमा की विशेष आयुर्वेदिक खीर?

शरद पूर्णिमा 6 अक्तूबर 2025 अश्विन मास के शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है । वर्ष की सभी पूर्णिमा में आश्विन पूर्णिमा विशेष चमत्कारी मानी गई है। शरद पूर्णिमा के दिन नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। इस दिन ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ का दर्शन करना भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। शरद पूर्णिमा की रात में चांद धरती के सबसे करीब होता है। अंतरिक्ष के समस्त ग्रहों से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा चंद्रकिरणों के माध्यम से पृथ्वी पर पड़ती हैं। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा को चांद 16 कलाओं से संपन्न होकर अमृत वर्षा करता है। यह स्वास्थ्य के लिए अक्षय फलदायी होता है। शास्त्रों के अनुसार इस तिथि पर चंद्रमा से निकलने वाली किरणों में सभी प्रकार के रोगों को हरने की क्षमता होती है। इस दिन चंद्रमा का दर्शन करना और उसकी अराधना करना काफी शुभ फल दायक माना जाता है। लक्ष्मी पूजन और रात्रि जागरण से व्रती को धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। आँखों के लिए टॉनिक: त्रिफला, शहद और देसी गाय के शुद्ध घी का 02:02:01 के अनुपात में मिश्रण तैयार करके उसे शरद पूनम की पूरी रात को चांदनी में रखो...

*कश्यपसंहिता में वर्णित 3 हज़ार वर्ष पुराना आयुर्वेदिक टीकाकरण - स्वर्णप्राशन*

*कश्यपसंहिता में वर्णित 3 हज़ार वर्ष पुराना  आयुर्वेदिक टीकाकरण - स्वर्णप्राशन* भारत की इस धरा ने - हमारी साँस्कृतिक परंपरा ने कई महापुरुषो, संतो, शूरवीरो, बौद्धिको, महान तत्ववेत्ताओ को जन्म दिया है। पर इस परंपरा को खडी करने और इतने सारे महान चरित्रो का संगोपन कैसे किया होगा यह हमने कभी सोचा है क्या? हमारे प्राचीन ऋषिओं ने इसके लिये अथाह परिश्रम उठाया है। समाज स्वस्थ - निरोगी बने इसके लिये आज कई सामाजिक, धार्मिक संस्थान और खुद सरकार भी चिंतित और कार्यरत है। अरबो का बजट हमारे आरोग्य की रक्षा के लिये सरकार और अंतराष्ट्रीय संस्थाएँ खर्च करती है। भिन्न-भिन्न प्रकार के केम्प, सहायता, जागृकता बढें इसके लिये विज्ञापन, फरजियात टीकाकरण द्वारा बहुत ही जोरो से प्रयत्न होता रहता है। कभी कभी इसके परिणमो की ओर दृष्टि करें तो प्रयत्न के समक्ष परिणाम बहुत ही अल्प मात्रा में दिखता है । समाज में शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता बढी है, पर मानसिक स्वास्थ्य का क्या? उसके लिये कभी किसी ने विचार किया है क्या?...... मानसिक रोग, निर्माल्य एवं असंस्कारी समाज अगर दीर्घायुष्य पाता है त...

क्या मोमोज़ और उसकी चटनी बढ़ती जनसँख्या को रोकने का कारगर उपाय बन सकता है? - पूछता है देश / Could Momos as food be another great tool for population control?

   मोमोज आपकी जिंदगी बर्बाद कर देगा!! Could Momos as food be another great tool for population control? आजकल गली मोहल्लो नुक्कड़ मार्केट पर सिल्वर के स्ट्रीमर में उबलते हुए मोमोज तीखी लाल मिर्च की चटनी के साथ खाते हुए युवा किशोर आपको भारी संख्या में दिख जाऐंगे। अक्सर शाम के समय मासूम युवा किशोर नहीं जानते वह मोमोज खा कर अपने स्वास्थ्य चरित्र को किस हद तक बर्बाद कर रहे हैं। Momos  मैदा के बने हुए होते हैं मैदा गेहूं का एक उत्पाद है जिसमें से प्रोटीन व फाइबर निकाल लिया जाता है मृत  starch ही शेष रहता है। उसे और अधिक चमकाने के लिए बेंजोयल पराक्साइड मिला दिया जाता है जो एक रासायनिक बिलीचर है। जी हां वही ब्लीचर्स जिससे चेहरे की सफाई की जाती है।यह ब्लीचर शरीर में जाकर किडनी को नुकसान पहुंचाता है।  मैदे के प्रोटीन रहित होने से इसकी प्रकृति एसिडिक हो जाती है यह शरीर में जाकर हड्डियों के कैल्शियम को सोख लेता है तीखी लाल मिर्च की चटनी उत्तेजक होती है, जिससे यौन रोग धातु रोग नपुंसकता जैसी महा भयंकर बीमारियां देश के किशोर व युवा को खोखला कर रही है। साथ में इसमें अजीनोमोटो भ...

मकान नहीं घर बनाओ

  " मकान " बीते हफ़्ते दो मित्रों ने अपना नया मकान देखने के लिए बुलाया। एक को 11 साल लगे.. मकान बनवाने में दूसरे को 9 साल। इस एक दशक के समय में उन मित्रों ने बस एक ही काम किया ..वह यह कि "मकान बनवाया" ...औऱ उससे पहले 20 साल तक जो काम किया वो यह कि "मकान बनवाने" लायक पैसा जुटाया... यानि जीवन के बेशक़ीमती 30 साल सिर्फ़ "अपना मकान बनवा लूं'' इस फितूर में निकाल दिए मेरी मकान, इंटीरियर, एलिवेशन, लक धक साजसज्जा जैसी चीज़ों में बिल्कुल भी रूचि नही है ..बल्कि साफ़ कहूं ..तॊ अरुचि ही है वे मित्र उच्चता के घमंड से विकृत हुए एक एक कमरे, गैलरी, गार्डन, आर्किटेक्ट की बारीकियां, उनके निर्माण में लगी सामग्री, ख़र्च हुआ पैसा ..आदि का विवरण दे रहे थे..... इधर मैं भी सौजन्यतावश "हूं , हां " अच्छा ", वाह , ग़ज़ब " जैसी प्रतिक्रियाएं देकर उनके अभिमान को पुष्ट किए दे रहा था ! जबकि हक़ीक़त यह थी कि मैंने शायद ही किसी चीज़ को गौर से देखा हो !! बचपन से ही मुझे मकान,गाड़ी,कपड़े जैसी बातों में न्यूनतम रूचि रही है । उनकी रनिंग कॉमेंट्री रुकने का नाम नहीं...

व्यक्तिगत सुरक्षा की स्वतंत्रता - हेलमेट, बीमा, प्रदुषण नियंत्रण पर बेबाक विचार

  मोटर_व्हीकिल_एक्ट पर बहुत चर्चा हो चुकी है। परंतु इसके पक्ष-विपक्ष में जितनी चर्चाएं मैं पढ़ पाया, उसमें मुझे या तो अंधा विरोध दिखा या फिर अंधा समर्थन। इसका एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत है पहली बात यह है कि हमें यह समझना चाहिए कि #राज्य को किन विषयों में #दंड देने का अधिकार होता है। यदि कोई व्यक्ति अपने छत पर #मुंडेर नहीं बनवाता और उससे गिर कर उसकी या उसके परिवार के बच्चों की मौत होने की संभावना होती है, तो यह राज्य अथवा सरकार के चिंता का विषय नहीं है। उसे इस बारे में कानून बनाने की आवश्यकता नहीं है। इसी प्रकार कोई व्यक्ति अपने घर में दाल बनाते समय उसमें कुछ गलत चीज मिला ले और उसे खाने से वह बीमार हो जाए, तो यह #मिलावट भी राज्य और सरकार का विषय नहीं है। परंतु यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक पुल बनाता हो और उसकी मुंडेर न बनाए तो यह अपराध है। कोई व्यक्ति अपनी दुकान में मिलावट वाला सामान बेचे तो यह भी अपराध है। कुल मिलाकर कर व्यक्ति की अपनी सुरक्षा व्यक्ति का विषय है, परंतु व्यक्ति से समाज की सुरक्षा राज्य का विषय है। इस मौलिक विषय को समझने के बाद मोटर वेहिकल एक्ट का इसके आधार पर विश्लेषण कर...