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नई सामाजिक बीमारी, रिसोर्ट मे शादियां !

 नई सामाजिक बीमारी   रिसोर्ट मे शादियां !  विवाह सफल हो न हो परंतु उसका समारोह सफल होना आवश्यक है हम बात करेंगे शादी समारोहो में होने वाली भारी-भरकम व्यवस्थाओं और उसमें खर्च होने वाले अथाह धन राशि के दुरुपयोग की! सामाजिक भवन अब उपयोग में नहीं लाए जाते हे शादी समारोह हेतु यह सब बेकार हो चुके हैं कुछ समय पहले तक शहर के अंदर मैरिज हॉल मैं शादियां होने की परंपरा चली परंतु वह दौर भी अब समाप्ति की ओर है! अब शहर से दूर महंगे रिसोर्ट या Destination weddings के रूप में शादीया होने लगी है क्यों होने लगी है?  क्योंकि फिल्मों में ऐसी शादियां होती है। तो फिल्मी शादीयों की चमक दमक की नकल तो करनी पड़ेगी।  विवाह सफल हो न हो परंतु नकल सफल होनी आवश्यक है शादी के 2 दिन पूर्व से ही ये रिसोर्ट बुक करा लिया जाते हैं और शादी वाला परिवार वहां शिफ्ट हो जाता है आगंतुक और मेहमान सीधे वही आते हैं और वहीं से विदा हो जाते हैं। इतनी दूर होने वाले समारोह में जिनके पास अपने चार पहिया वाहन होते हैं वहीं पहुंच पाते हैं! और सच मानिए समारोह के मेजबान की दिली इच्छा भी यही होती है कि सिर्फ कार व...

नहीं चाहिए ऐसा समाज जहाँ फैक्ट्री में पैदा होंगे बच्चे!

       फैक्ट्री में पैदा होंगे बच्चे यह दावा कोई खोखला नही है ऐसा दावा करने वाली दुनिया में बहुत सारी कंपनियां होंगी जो नकली बच्चे पैदा करेंगे और उससे धन कमाएंगी क्योंकि ऐसा काम सेवा के लिए तो नहीं होने वाला। परंतु बड़ी बात यह है कि भारत में गर्भ संस्कार की परंपरा उसका क्या होगा क्योंकि गोद भराई गर्भ संस्कार आदि जो परंपराएं हैं उन परंपराओं को यह पूरी तरह खत्म कर देंगे क्योंकि भारत जैसा देश ऐसी तकनीक का बहुत बड़ा बाजार बनेगा। आईवीएफ की तरह लोगों को अपने गोद में केवल जीवित दिखने वाला बच्चा चाहिए जो की फैक्ट्री में पैदा हुआ हो। मोबाइल फोन के मॉडल की तरह उनमें जेनेटिक बदलाव बालो का रंग, आंखो का रंग, कद आदि चुन सकेंगे सुनने में तो यह अद्भुत लग रहा है लेकिन जेनेटिक बदलाव से खेलने की यह हरकत आने वाली वह भयानक सच्चाई है जिसे सरकारी संरक्षण मिलेगा। समाज में ऐसे बच्चो को पहचानने के लिए नियम बनाने पड़ेंगे जिससे फैक्ट्री और प्राकृतिक रूप से पैदा हुए बच्चो की पहचान हो सके। क्योंकि ऐसे बच्चो का गोत्र आदि तो कुछ निर्धारित होगा नही। जेनेटिक बदलाव के कारण और कृत्रिम गर्भ में पलने के...

भारत में अंग्रेजी राज का संक्षिप्त बही-खाता || THE BALANCE SHEET OF BRITISH RULE IN INDIA

  THE BALANCE SHEET OF BRITISH RULE IN INDIA Some main items:   1)       Englishmen drain from India and take to England every year 50 crores of rupees ($167 million);   consequently   the Hindus have become so poor that the daily average income per capita is only 5 paisa (2.5 cents)   2)       The land tax is more than 65 percent of the net produce. 3)       The expenditure for 240 million (24 crore population) person on Education:           7¾ crores of rupees ($25,000,000) Sanitation:          2 crore of rupees ($6,000,000) But on army:      29 ½ crore of rupees ($97,000,000)   4)       Under British rule, the famines are ever on the increase, and in the last ten years 20 million (2 crore) men, women and children have died of starv...

सोनपापड़ी के साथ हुआ षड्यंत्र!

 जिसे हरा न सको उसे यशहीन कर दो,उसका उपहास करो,उसकी छवि मलिन कर दो। बस ऐसा ही कुछ हुआ है इस सुंदर मिठाई के संग में भी। आपने इधर सोनपापड़ी जोक्स और मीम्स भारी संख्या में देखे होंगे। निर्दोष भाव से उ न पर हँस भी दिए होंगे। पर अगली बार उस बाज़ार को समझिए जो मिठाई से लेकर दवाई तक और कपड़ों से लेकर संस्कृति तक में अपने नाखून गड़ाये बैठा है।         एक ऐसी मिठाई जिसे एक स्थानीय कारीगर न्यूनतम संसाधनों में बना बेच लेता हो। जिसमें सिंथेटिक मावे की मिलावट न हो। जो अपनी शानदार पैकेजिंग और लंबी शेल्फ लाइफ के चलते आवश्यकता से अधिक मात्रा में उपलब्ध होने पर बिना दूषित हुए किसी और को दी जा सके, खोये की मिठाई की तरह सड़कर कूड़ेदान में न जा गिरे। आश्चर्य, बिल्कुल एक सुंदर, भरोसेमंद मनुष्य की तरह जिस सहजता के लिए इसका सम्मान होना चाहिए, इसे हेय किया जा रहा है।        एक काम कीजिये डायबिटिक न हों तो घर में रखे सोनपापड़ी के डिब्बों में से एक को खोलिए। नायाब कारीगरी का नमूना गुदगुदी परतों वाला सोनपापड़ी का एक सुनहरा, सुगंधित टुकड़ा मुँह में रखिये...

विवाह की तैयारी है या दिखावे की?

विवाहोत्सव : ज़रा सोचिए  क्या नाचने गाने को विवाह कहते हैं, क्या दारू पीकर हुल्लड़ मचाने को विवाह कहते हैं, क्या रिश्तेदारों और दोस्तों को इकट्ठा करके दारु की पार्टी को विवाह कहते हैं ? डीजे बजाने को विवाह कहते हैं, नाचते हुए लोगों पर पैसा लुटाने को विवाह कहते हैं, घर में सात आठ दिन धूम मची रहे उसको विवाह कहते हैं?  दारू की 20-25 पेटी लग जाए उसको विवाह कहते हैं ? किसको विवाह कहते हैं? विवाह उसे कहते हैं जो बेदी के ऊपर मंडप के नीचे पंडित जी मंत्रोच्चारण के साथ देवताओं का आवाहन करके विवाह की वैदिक रस्मों को कराकर पूरी शास्त्रोक्त विधि को निभाये । लोग कहते हैं कि हम आठ 8 महीने से विवाह की तैयारी कर रहे हैं । और पंडित जी जब सुपारी मांगते हैं , तो कहते हैं अरे वह तो भूल गए । जो सबसे जरूरी काम था वह आप भूल गए  । विवाह की सामग्री भूल गए।  फिर आप 10 महीने से विवाह की कौन सी तैयारी कर रहे हैं। विवाह की नहीं आप वास्तव में दिखावे की तैयारी कर रहे हो। लोन या कर्जा ले लेकर दिखावा कर रहे हो ।  हमारे ऋषियों ने कहा है कि जो जरूरी काम है वह करो । ठीक है ! अब तक लोगों की पार्टिया...

पूर्वजों को याद करने के उपलक्ष्य को मज़ाक bka विषय नही बनाना

  श्राद्ध पक्ष को लेकर कई मज़ाक भरे सन्देशो का आदान प्रदान हो रहा है जिसमे ब्राह्मणो का खाने का वर्ल्ड कप से लेकर कौवो की मौज आदि का उल्लेख है व्यक्तिगत रूप से श्राद्ध पक्ष जैसे पवित्र पखवाड़े के विषय में ऐसे भद्दे फूहड़ मज़ाक मैं पसंद नहीं करता इस पखवाड़े में अपने पितरो / पूर्वजो को श्रद्धापूर्वक स्मरण करने प्रावधान है..... कोई भी ब्राह्मण न तो आपसे खीर पूरी खिलाने का आग्रह कर रहा है न कोई गाय, पशु या पक्षी अगर आप इनको भोग करवाने को मानते है तो  पालन करें और यदि नहीं तो अपने नित्य कार्य अन्य दिनों की तरह करते रहे क्योंकि जो मानते है उनके कहने से आप मानना शुरू नहीं करेंगे और आपके कहने से वो पालन करना छोड़ेंगे नहीं तो क्यों अपनी ऊर्जा नष्ट करें देश में और भी कई वास्तविक संकट है उनपर ध्यान केंद्रित करें उचित रहेगा धार्मिक आस्था और मान्यताओ के विषयो पर किसी तरह की भद्दे और भौंडे सन्देश भेजना या बहस करना मूर्खता है अतः न करें! ऐसे सन्देश भेजने वालो को विनम्र होकर परन्तु दृढ़ता पूर्वक यह सन्देश प्रेषित करें - अपनी जड़ो से जुड़े हुए वीरेंद्र की कलम से

पूर्वजो का धन्यवाद !

यह चित्र 2012 आगरा रेलवे स्टेशन का है। इस से पहले मैं ऐसे कान साफ करवाना सुरक्षित नही समझता था। परंतु राजीव भाई को सुनकर पहली बार इस प्रकार से कान साफ़ करवाए थे। वो भी केवल 20 रु में जो आनंद आया मैं उसका वर्णन नहीं कर सकता न डिग्री, न appointment, सेवा कभी भी कही भी। हमारे पूर्वजो के द्वारा इन कान साफ़ करने वाले लोगो की पूरी जमात खड़ी की गयी जिन्हें विशेष प्रक्षिशण दिया गया था कान की सभी परेशानियों के लिए यहाँ तक आपातकालीन स्थिति के लिए भी जिसमे कान में अगर कुछ फंस जाये तो यह आसानी से निकाल देते है ज्यादा बड़ा रोग हुआ तो आयुर्वेदिक वैध हुआ करते थे।  अब यही काम डिग्री के चक्कर में कुछ डॉक्टरों की बपौती बन गया है।  जिनके पास कुछ आधुनिक मशीने है जिसका खर्चा यह हमसे लेते है।   कान साफ़ होते देखना कई लोगो को बहुत भाता है इसीलिए यूट्यूब पर करोडो लोग कान को साफ़ होने के वीडियो को देखते है।  विदेशो में कोई सोच भी नहीं सकता कि सड़क किनारे बैठकर  कान साफ़ हो सकता है।  पहले के लोग अपनी पूरी दूकान अपनी बगल में लेकर चलते थे।    वो अलग बात है की आज इसमें कुछ गलत त...

हम जूठा व बासी नही खाते !!! अगली बार ये कहने से पहले सोचियेगा।

  हम जूठा व बासी नही खाते !!! अगली बार ये कहने से पहले सोचियेगा। एक इंसान की अनुभव के आधार पर सच्ची कहानी के माध्यम से समझिए। कुछ दिन पहले एक परिचित दावत के लिये एक मशहूर रेस्टोरेंट में ले गये। मैं अक़्सर बाहर खाना खाने से कतराता हूँ किन्तु वर्ष में एक दो बार शरीर को बाहर के कचरे से अवगत करवा देता हूँ जिस से अशुद्ध को भी झेलने की क्षमता का शरीर का अभ्यास हो जाता है। आजकल पनीर खाना रईसी की निशानी है इसलिए उन्होंने कुछ डिश पनीर की ऑर्डर की। प्लेट में रखे पनीर के अनियमित टुकड़े मुझे कुछ अजीब से लगे। ऐसा लगा की उन्हें कांट छांट कर पकाया है। मैंने वेटर से कुक को बुलाने के लिए कहा, कुक के आने पर मैंने उससे पूछा पनीर के टुकड़े अलग अलग आकार के व अलग रंगों के क्यों हैं तो उसने कहा ये स्पेशल डिश है।" मैंने कहा की मैँ एक और प्लेट पैक करवा कर ले जाना चाहता हूं लेकिन वो मुझे ये डिश बनाकर दिखाये। सारा रेस्टोरेंट अकबका गया... बहुत से लोग थे जो खाना रोककर मुझे देखने लगे... स्टाफ तरह तरह के बहाने करने लगा। आखिर वेटर ने पुलिस के डर से बताया की अक्सर लोग प्लेटों में खाना,सब्जी सलाद व रोटी इत्यादी छ...

हम एलिजाबेथ की मृत्यु पर शोक नहीं करते : दक्षिण अफ्रीका के राजनीतिक दल EFF का वक्तव्य हर भारतीय को पढ़ना चाहिए

 EFF - ECONOMIC FREEDOM FIGHTERS हिंदी अनुवादक - वीरेंद्र सिंह ******************* आर्थिक स्वतंत्रता सेनानी महारानी एलिजाबेथ की मृत्यु पर EFF का वक्तव्य गुरुवार, 08 सितंबर 2022 आर्थिक स्वतंत्रता सेनानियों ने यूनाइटेड किंगडम की रानी एलिजाबेथ एलेक्जेंड्रा मैरी विंडसर और यूनाइटेड किंगडम द्वारा उपनिवेशित कई देशों के औपचारिक प्रमुख की मृत्यु का संज्ञान लिया है। एलिजाबेथ 1952 में सिंहासन पर चढ़ी, 70 वर्षों तक एक संस्था के प्रमुख के रूप में शासन किया, जिसे दुनिया भर में लाखों लोगों के अमानवीयकरण की क्रूर विरासत से बनाया गया, बनाए रखा गया और जीवित रहा। हम एलिजाबेथ की मृत्यु पर शोक नहीं करते हैं, क्योंकि हमारे लिए उनकी मृत्यु इस देश और अफ्रीका के इतिहास में एक बहुत ही दुखद अवधि की याद दिलाती है। ब्रिटेन ने, शाही परिवार के नेतृत्व में, इस क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया, जो 1795 में बटावियन नियंत्रण से दक्षिण अफ्रीका बना, और 1806 में इस क्षेत्र पर स्थायी नियंत्रण कर लिया। उस क्षण के बाद से, इस भूमि के मूल निवासियों ने कभी भी शांति अनुभव नहीं की है, न ही उन्होंने कभी इस भूमि के धन का सुख भोगा है,...

व्यक्तिगत सुरक्षा की स्वतंत्रता - हेलमेट, बीमा, प्रदुषण नियंत्रण पर बेबाक विचार

  मोटर_व्हीकिल_एक्ट पर बहुत चर्चा हो चुकी है। परंतु इसके पक्ष-विपक्ष में जितनी चर्चाएं मैं पढ़ पाया, उसमें मुझे या तो अंधा विरोध दिखा या फिर अंधा समर्थन। इसका एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत है पहली बात यह है कि हमें यह समझना चाहिए कि #राज्य को किन विषयों में #दंड देने का अधिकार होता है। यदि कोई व्यक्ति अपने छत पर #मुंडेर नहीं बनवाता और उससे गिर कर उसकी या उसके परिवार के बच्चों की मौत होने की संभावना होती है, तो यह राज्य अथवा सरकार के चिंता का विषय नहीं है। उसे इस बारे में कानून बनाने की आवश्यकता नहीं है। इसी प्रकार कोई व्यक्ति अपने घर में दाल बनाते समय उसमें कुछ गलत चीज मिला ले और उसे खाने से वह बीमार हो जाए, तो यह #मिलावट भी राज्य और सरकार का विषय नहीं है। परंतु यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक पुल बनाता हो और उसकी मुंडेर न बनाए तो यह अपराध है। कोई व्यक्ति अपनी दुकान में मिलावट वाला सामान बेचे तो यह भी अपराध है। कुल मिलाकर कर व्यक्ति की अपनी सुरक्षा व्यक्ति का विषय है, परंतु व्यक्ति से समाज की सुरक्षा राज्य का विषय है। इस मौलिक विषय को समझने के बाद मोटर वेहिकल एक्ट का इसके आधार पर विश्लेषण कर...

किवाड़

*"किवाड़" ! *हमारी प्राचीन संस्कृति व संस्कार की पहचान* *क्या आपको पता है ?* *कि "किवाड़" की जो जोड़ी होती है !* *उसका एक पल्ला "पुरुष" और,* *दूसरा पल्ला "स्त्री" होती है।* *ये घर की चौखट से जुड़े-जड़े रहते हैं।* *हर आगत के स्वागत में खड़े रहते हैं।।* *खुद को ये घर का सदस्य मानते हैं।* *भीतर बाहर के हर रहस्य जानते हैं।।* *एक रात उनके बीच था संवाद।* *चोरों को लाख-लाख धन्यवाद।।* *वर्ना घर के लोग हमारी ,* *एक भी चलने नहीं देते।* *हम रात को आपस में मिल तो जाते हैं,* *हमें ये मिलने भी नहीं देते।।* *घर की चौखट के साथ हम जुड़े हैं,* *अगर जुड़े-जड़े नहीं होते।* *तो किसी दिन तेज आंधी-तूफान आता,* *तो तुम कहीं पड़ी होतीं,* *हम कहीं और पड़े होते।।* *चौखट से जो भी एकबार उखड़ा है।* *वो वापस कभी भी नहीं जुड़ा है।।* *इस घर में यह जो झरोखे,* *और खिड़कियाँ हैं।* *यह सब हमारे लड़के,* *और लड़कियाँ हैं।।* *तब ही तो,* *इन्हें बिल्कुल खुला छोड़ देते हैं।* *पूरे घर में जीवन रचा-बसा रहे,* *इसलिये ये आती-जाती हवा को,* *खेल ही खेल में ,* *घर की तरफ मोड़ देते हैं।।* *हम घर की सच्चाई छिपात...