केवल कर्म करना ही हाथ में है! कई बार जीवन में कुछ ऐसा होता है जो उस समय हमें बिल्कुल गलत लगता है। बस छूट गई। कहीं चयन नहीं हुआ। जिस पर भरोसा था, वही छोड़कर चला गया। और हम तुरंत फैसला सुना देते हैं— मेरे साथ गलत हो गया। पर हमें सच में पता है कि गलत क्या हुआ? हम तो केवल उतना देख पा रहे हैं जितना इस समय हमारे सामने है। आगे उस रास्ते पर क्या था, यह हमें कहाँ मालूम? और मज़े की बात यह है कि जिस जीवन पर हम इतना नियंत्रण चाहते हैं, उसमें वास्तव में हमारा नियंत्रण है ही कितना? अपने शरीर को ही देख लीजिए। करोड़ों कोशिकाएँ हर समय अपना काम कर रही हैं। हृदय धड़क रहा है। खून बह रहा है। शरीर के भीतर न जाने कितनी प्रक्रियाएँ चल रही हैं। आप उनमें से कितनी चला रहे हैं? कुछ भी नहीं। थोड़ा बाहर आइए। पृथ्वी घूम रही है। ग्रह अपनी कक्षाओं में चल रहे हैं। सूर्य कब उगेगा, ऋतु कब बदलेगी, वर्षा कब होगी— इनमें से किसी पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं। सूक्ष्मतम कोशिका से लेकर विराट ग्रह-नक्षत्रों तक व्यवस्था हमारे आदेश से नहीं चल रही। फिर भी आदमी को भ्रम यह है कि मेरा पूरा जीवन मेरी योजना के हिसाब से ही चलना चाहिए! यहीं...
आने वाली पीढ़ियों को समर्पित