सावधान युवाओं! अपना भविष्य मत जलाओ – नारे लगाने वाली भीड़ बनकर मत मरो, अपना दीपक स्वयं बनो
सावधान युवाओं! अपना भविष्य मत जलाओ – नारे लगाने वाली भीड़ बनकर मत मरो, अपना दीपक स्वयं बनो
साथियों
आज आप सबके सामने बहुत भारी मन से कुछ कड़वी, मगर ज़रूरी सच्चाइयाँ रखने जा रहा हूँ। पिछले कुछ वर्षों से हम देख रहे हैं कि 16–22 वर्ष के नौजवान, जो अपनी ज़िंदगी का सबसे कीमती समय पढ़ाई, कौशल और करियर बनाने में लगा सकते हैं, वे सोशल मीडिया के कुछ “लाउडस्पीकर क्रांतिकारियों” के पीछे अपना सब कुछ दाँव पर लगा रहे हैं।
ये लोग बड़े-बड़े दावे करते हैं—
“पढ़ाई बेकार है… सिस्टम गुलाम बना रहा है… अभी क्रांति करो… NWO आ रहा है… माता-पिता नहीं समझते…”
और मासूम बच्चे इनकी बातों में आकर घर छोड़ देते हैं, पढ़ाई छोड़ देते हैं और माँ-बाप से बगावत कर लेते हैं।
परिणाम?
डिप्रेशन, आत्महत्या का प्रयास, बर्बाद करियर और अंत में पछतावा।
मैं यह बात इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मैं 15 वर्षो से आंदोलनों “क्रांति” के नाम पर केवल अहंकार, स्वार्थ, आपसी साज़िशें और पैसों का खेल चल रहा है, तो बहुत से लोग चुपचाप इनसे अलग हो गए ।
1) 1 GB के दिमाग में 10 GB का नकारात्मक डेटा मत ठूँसो
दसवीं-बारहवीं का एक बच्चा अभी अपनी बुद्धि, विवेक और मानसिक शक्ति का निर्माण ही कर रहा होता है। उसकी “हार्ड डिस्क” अभी 1 GB की है।
तुम उसमें जबरदस्ती NWO, इल्लूमिनाटी, चिप लगने वाली वैक्सीन, विश्व युद्ध, खाने-पीने में ज़हर, बैंक साज़िश और 100-100 घंटे की केवल थ्योरियाँ ठूँस दोगे, तो क्या होगा?
सिस्टम क्रैश हो जाएगा।
यही कारण है कि आज हज़ारों बच्चे डिप्रेशन, एंग्जायटी और नींद की गोलियों के आदी हो गए हैं।
सही तरीका क्या है?
पहले अपनी प्रोसेसिंग पावर बढ़ाओ—
→ गीताजी पढ़ो एक अध्याय प्रतिदिन भले ही हिंदी अनुवाद पढ़ो
→ सत्संग सुनो।
→ ब्रह्मचर्य का पालन करो।
→ योग और ध्यान करो।
→ सद्गुरु धारण करो और नहीं है तो संकल्प लो की कोई अच्छा गुरु मिल जाए
क्योंकि बिना आध्यात्मिक आधार के यह सारा ज्ञान तुम्हें मार डालेगा, बचाएगा नहीं।
फिर धीरे-धीरे दुनिया की सच्चाई समझो।
2: जिसे तुम क्रांतिकारी समझ रहे हो, वह तुम्हारा धंधा कर रहा है
कई तथाकथित “राजीववादी” और “देशनायक” आपके घर आते हैं, हाथ की लकीर देखते हैं, कुंडली दिखाते हैं और “काउंसलिंग” के नाम पर 50 हज़ार से 1.5 लाख रुपये तक वसूल करते हैं।
क्या सच्चा क्रांतिकारी कभी पैसों के लिए तुम्हारे माँ-बाप को रुलाएगा?
राजीव भाई ने कभी एक रुपया नहीं लिया। जीविका अवश्य कमायें परंतु लोगो को बरगला कर नहीं दिशा देकर। तुम सच्चे हो तो समाज कमी नहीं होने देगा
यह क्रांति नहीं, धंधा है।
3: घर का भेदी लंका ढाए – आज राजीववादी ही राजीववादियों के दुश्मन बन गए हैं
वर्धा कांड देख लिया न आपने?
जिस आंदोलन को एकजुट होकर देश बदलना था, वहाँ आज आपसी साज़िशें, मारपीट, पुलिस केस और कोर्ट-कचहरी दिखाई दे रही है।
1857 में भी यही हुआ था। मंगल पांडे, तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई लड़ रहे थे, पर कुछ देशी राजाओं ने अंग्रेजों से साँठ-गाँठ कर ली। नतीजा? 90 वर्ष और गुलामी।
आज भी वही हो रहा है।
जब तक हम आपस में ही एक-दूसरे की टाँग खींचते रहेंगे, NWO को हमें हराने के लिए कुछ नहीं करना पड़ेगा—हम स्वयं ही हार जाएँगे।
अब करना क्या है? – असली क्रांति का रोडमैप
1. पढ़ाई पूरी करो। अच्छे अंक लाओ, कौशल सीखो, नौकरी या व्यवसाय करो। आर्थिक रूप से मज़बूत हुए बिना क्रांति केवल नारा है।
2. माता-पिता का सम्मान करो। उनके चरण स्पर्श करो वे तुम्हारे सबसे बड़े शुभचिंतक हैं। उनसे बगावत करने वाला कभी देश नहीं बचा सकता।
3. प्रतिदिन गीता का एक अध्याय पढ़ो, 10 मिनट ध्यान करो और ब्रह्मचर्य का पालन करो। यही तुम्हारी वास्तविक शक्ति बढ़ाएगा।
4. सोशल मीडिया पर हर बात को आँख मूँदकर मत मानो। अपना विवेक जगाओ। सवाल पूछो।
5. सच्ची क्रांति चुपचाप अपने गाँव-मोहल्ले में स्वदेशी अपनाकर और लोगों को जागृत करके होती है, लाउडस्पीकर बनकर नहीं।
6. रुचि के विषय का स्वाध्याय करो रामायण और महाभारत पढ़िए उसमे जीवन के हर प्रश्न का उत्तर है।
अंत में राजीव भाई की ही बात दोहराना चाहता हूँ—
“स्वयं दीपो भव।”
अपना दीपक स्वयं बनो।
किसी के पीछे अंधभक्त बनकर अपना भविष्य मत जलाओ।
वंदे मातरम्
वीरेन्द्र सिंह की कीबोर्ड रुपी कलम द्वारा
भ्रमित भारतीयों के भ्रम का भ्रमण
VirenderSingh.in

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