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बद्रीनाथ धाम: शंख वर्जित......पर डीजे चालू है!

बद्रीनाथ में शंख मौन है… पर डीजे बोल सकता है! उत्तराखण्ड में इस वर्ष बद्रीनाथ धाम ने एक और कीर्तिमान बना दिया। 22 सितम्बर तक 17 लाख 79 हजार 805 श्रद्धालु भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर चुके थे। सरकार इसे बेहतर यात्रा-प्रबन्धन और सुविधाओं से जोड़कर देख रही है।  अच्छी बात है। वैसे उत्तराखण्ड में आजकल कीर्तिमान टूटने का समय चल रहा है। श्रद्धालुओं का कीर्तिमान टूट रहा है। बरसात में सड़कें टूटती हैं। पहाड़ खिसकते हैं। इस वर्ष भी भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने कई क्षेत्रों में भारी क्षति की है।  तो मैंने सोचा— बेचारी परम्पराएँ ही क्यों बची रहें? बद्रीनाथ भगवान विष्णु का धाम है। वही भगवान विष्णु जिनके हाथ में शंख है। लेकिन बद्रीनाथ में शंख नहीं बजाया जाता। इसके पीछे अनेक धार्मिक कथाएँ हैं। एक प्रचलित मान्यता यह है कि माता लक्ष्मी के ध्यान में विघ्न न पड़े, इसलिए भगवान विष्णु ने विजय के बाद भी शंखनाद नहीं किया और वही परम्परा आगे चली।  कथा ऐतिहासिक तथ्य है या धार्मिक मान्यता या विज्ञान, यह अलग विषय है। लेकिन उसका भाव बड़ा सुन्दर है— भगवान की विजय से भी अधिक महत्त्व किसी के ध्यान और श...

हनुमान अंश : ₹10 लाख से ₹300 करोड़ तक…

हनुमान अंश : ₹10 लाख से ₹300 करोड़ तक…  जब मैंने पहली बार पूछा था— “क्या हनुमान अंश उत्तर भारत की कान्तारा बनेगी?” तब यह सवाल थोड़ा बड़ा लग रहा था। करीब ₹2 करोड़ की फिल्म। कोई बड़ा सितारा नहीं। कोई ऐसा प्रचार नहीं कि सुबह उठो तो हर जगह उसी का चेहरा दिखे। पहले दिन लगभग ₹10 लाख की कमाई। मतलब शुरुआत देखकर कोई भी कह देता— चलो, एक और छोटी धार्मिक फिल्म आई और चली गई। लेकिन गई नहीं। धीरे-धीरे लोग देखने लगे। फिर देखने वाले दूसरों से कहने लगे— “एक बार देख आओ।” और वही काम हो गया जो आजकल कई बार ₹50-100 करोड़ का प्रचार भी नहीं कर पाता। फिल्म ₹300 करोड़ के पार पहुँच गई। अब मुझे इसमें सबसे मजेदार बात यही लगती है— फिल्म नहीं बदली। दर्शक बढ़ता गया। हनुमान अंश   नीब करौरी बाबा के जीवन और हनुमान भक्ति से प्रेरित फिल्म है। इसलिए नाम देखकर अगर कोई यह सोचकर जाए कि अभी हनुमान जी आएँगे, पहाड़ उठाएँगे, VFX फटेगा और पर्दा हिलेगा— तो भाई, गलत फिल्म में आ गए। यह उस तरह की फिल्म नहीं है। यह सीधी है। बहुत सीधी। कई जगह इतनी सीधी कि लगता है थोड़ा और सिनेमाई हो सकती थी। कुछ दृश्य सच में फिल्म से ज्यादा अच्छे...

भारतीय अब भी सुरक्षित है, असली डर तो Indians को है!

भारतीय अब भी सुरक्षित है, असली डर तो Indians को है! आस्था पर व्यवस्था भारी ******** मन की बात कहूँ तो अब कोई फर्क नही पड़ता कि कोरोना वायरस सच है  या  षड्यंत्र। कल आनंद के साथ परिवार सहित हरिद्वार स्थित मनसा देवी और चंडी देवी के लगभग खाली पड़े मंदिरो में दर्शन कर इंडियंस को भारतीयता की समझ देकर विवेकपूर्ण निर्णय लेने की शक्ति देने की प्रार्थना की। इस महामारी को इतना बड़ा स्तर देकर हम पर ज़बरदस्ती थोपा गया है परन्तु यदि भारत इंडिया न बन गया होता तो शायद देश में इस प्रकार की स्थिति न होती और हम अपनी देशी पद्धति से किसी भी स्तिथि से निपट लेते। परन्तु दुःख है की न तो अब कुछ लोगो को छोड़ दें तो अब न तो यह भारत रहा न ही इसके निवासी भारतीय क्योंकि सब इंडियन बन गए है। जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए यह किया जा रहा है वह तो पूरे होकर रहेंगे। अब प्रश्न यह है कि यदि घर मे रहकर ही इससे निपटना है तो हम वह करेंगे जो हर स्थिति में सही है, वह नही जो WHO के अनुसार सही है। राजेन्द्र दास जी महाराज के अनुसार हमने गोबर औऱ गोमूत्र के रस का अर्क निकाल कर उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है।...