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Showing posts from October, 2019

पोलियो के खुराक से बच्चो में हो रहा लकवा

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पोलियो के खुराक से बच्चो में हो रहा लकवा

-दुनिया में प्राकृतिक रूप से होने वाले पोलियो मुकाबले पोलियो के टीके के कारण ज़्यादा बच्चे पोलियो के शिकार हो रहे है जो बहुत ही गंभीर स्थिति है।

-40 देशों की सरकारों ने कई वर्ष पहले पोलियो से जुड़े खतरों के कारण अपने देशो में ओपीवी पर रोक लगा दी थी।

सुविधा के लिए, भारत जैसे कई देशों द्वारा नैतिक मुद्दों की अनदेखी की गई है; मौजूदा कार्यक्रम की समीक्षा करने की आवश्यकता है।
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नई दिल्ली: पिछले पांच वर्षों में भारत में कम से कम 400 बच्चों में ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) प्राप्त करने के बाद पोलियो विकसित हुआ है , एक शीर्ष भारतीय बाल रोग विशेषज्ञ ने एक हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक पेपर में खुलासा किया है जिसमे कि ओपीवी के निरंतर उपयोग की नैतिकता पर सवाल उठता है ।

टी जैकब जॉन, जो क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर में एक प्रोफेसर है और जिन्होंने पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार को पोलियो उन्मूलन नीतियों पर सलाह दी है, ने ओपीवी के निरंतर उपयोग को एक "नैतिक विसंगति" के रूप में वर्…

जानिये किस धन की है धनतेरस?

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जानिये किस धन की है धनतेरस ?

और यह धन से सम्बंधित नहीं है

स्वदेशी एवं स्वास्थ्य के सन्दर्भ में धनतेरस का महत्व

कुंठित उपभोक्तावाद से प्रेरित बाजारीकरण के कारण धनतेरस को लेकर कुछ भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास एक प्रश्नावली के द्वारा :

प्रश्न:

धनतेरस में "धन" शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर:

यह बहुत कम लोग जानते है की वास्तव में धनतेरस में "धन" शब्द स्वास्थ्य के देवता धनवंतरी से लिया गया है
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न:

अगर धन नहीं तो फिर धनतेरस का क्या महत्त्व है?

उत्तर:

देवी लक्ष्मी हालांकि की धन देवी हैं परन्तु उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए आपको स्वस्थ्य और लम्बी आयु भी चाहिए यही कारण है दीपावली दो दिन पहले से ही यानी धनतेरस से ही दीपामालाएं सजने लगती हें।

प्रश्न:

आज के दिन कुछ नया खरीदने की परंपरा क्यों है?

उत्तर:

समुद्र मंथन के समय धन्वन्तरि जी कलश में अमृत लेकर प्रकट हुए थे इसी कारण इस दिन बर्तन खरीदने की प्रथा है

आज के दिन वास्तविक परम्परा केवल नया बर्तन खरीदने की …

बिकती बोतल देख के दी गंगाजी रोय।

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बिकती बोतल देख के दी गंगाजी रोय। पुण्य कमाने आयो थो पर नोट कमा गयो कोय।। *************

गंगा जी के किनारे की दुकान और होटल पर बिकती मिनरल वाटर की बोतल को देखता हूँ तो पता नही क्यों वो बोतल व्यंगात्मक शैली में हम पर हँसती हुई दिखाई देती है!

और फिर न जाने उसको खरीदने वाले Indians को देखकर मुझ जैसे भारतीय के चेहरे पर भी वही हँसी आ जाती है।

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अब यहां से उन लोगो के लिए लिख रहा हूँ जिनको यह पोस्ट समझ नही आएगी और वो वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदूषित घोषित हो चुकी गंगा जी की रिपोर्ट का हवाला देते टिप्पणी करेंगे कि गंगा जी का पानी पीने योग्य नही बचा है। उनको बताना चाहता हूँ कि गंगा जी के किनारे लगे हैंडपम्प या नल से पानी पिया हो तो समझ जाओगे की मैं क्या कहना चाहता हूँ।

भरी धूप या प्यास में इस जल की शीतलता को अनुभव कर यह लगता है कि अमृत का स्वाद भी कुछ ऐसा ही होता होगा। जिनको यह अनुभव हुआ है वो समझ जायेंगे
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भ्रमित भारतीयों के भ्रम का भ्रमण
वीरेंद्र की की बोर्ड रूपी कलम से

मॉडर्न आयुर्वेद ने वास्तविक आयुर्वेद का किया नाश!

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मॉडर्न आयुर्वेद ने वास्तविक आयुर्वेद का किया नाश!



यह शीर्षक समझने के लिए इस चित्र को देखिए। इस चित्र में लगी मूर्ति हमारे सुश्रुत ऋषि जी की है जो "Royal Australian Society of surgeons" के प्रांगण में लगी है।

विडंबना देखिए जिस आयुर्वेद के ऋषि कें ज्ञान कर कारण पूरी दुनिया ने सर्जरी अर्थात शल्य चिकित्सा सीखी आज आधुनिक आयुर्वेद शिक्षा संस्थानों से किसी भी डिग्री धारक (BAMS) को सर्जरी करने का अधिकार नही है।

यह तो वही बात हुई कि बच्चों के माता-पिता को अपने ही बच्चो से वंचित कर दिया जाएं।

आज कुछ विलक्षण बुद्धि वाले आयुर्वेदिक डॉक्टरों को यदि छोड़ दिया जाए तो आज अधिकतर आयुर्वेद के डिग्री धारक इलाज एलोपैथी का प्रयोग कर तुरंत परिणाम के लालच में कर रहे है।

इसका बड़ा कारण है कि इसमें अधिकतर वह लोग है जो MBBS नही कर पाए लेकिन नाम के आगे डॉक्टर, गले मे स्टेथोस्कोप और शरीर पर सफेद कोट लगाने की धुन में BAMS करना पड़ता है। लेकिन मन से MBBS ही है।

इस मानस को फिल्मों ने बहुत हवा दी। पुरानी फिल्मों में एक गरीब की झोपड़ी में भी डॉक्टर अपनी अटैची लेकर आता था लेकिन कभी किसी वैद्य से इलाज करते हुए नही…