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साधारण ऋतु नहीं माता पिता के जीवन का वसंत हैं बचपन!

  बचपन की छोटी-सी ऋतु बच्चों का बचपन बड़ा विचित्र होता है। जब चल रहा होता है तो लगता है कि बहुत लंबा है। घर में खिलौने बिखरे हैं। हर थोड़ी देर में—“पापा सुनो ना…” “मम्मी देखो ना…” खाना नहीं खाना। सोना नहीं है। सौ प्रश्न पूछने हैं। और हम सोचते हैं— थोड़ा बड़ा हो जाए तो कुछ चैन मिले। मिलेगा। लेकिन शायद तब पता चलेगा कि जिस शोर से चैन माँग रहे थे, वही घर की सबसे सुंदर ध्वनि थी। बच्चे हमारे बच्चे पूरे जीवन रहते हैं, लेकिन बच्चे बनकर बहुत थोड़े वर्ष रहते हैं। एक दिन खिलौने कम होने लगेंगे। फिर गोद में बैठना बंद। फिर उंगली पकड़कर चलना बंद। फिर विद्यालय के द्वार पर कहेगा— “आप यहीं छोड़ दो, मैं चला जाऊँगा।” और कुछ वर्षों बाद— “आपको आने की आवश्यकता नहीं है।” यह सब किसी घोषणा के साथ नहीं होता। बस धीरे-धीरे होता है। और जब तक हमें पता चलता है कि बचपन जा रहा है, तब तक वह काफी दूर निकल चुका होता है। लेकिन हमें उसे बड़ा करने की इतनी जल्दी क्यों है? आज के माता-पिता को देखकर कई बार लगता है कि हम माता-पिता कम और फल के व्यापारी अधिक हो गए हैं। कच्चा फल सामने रखा है और चिंता यह है कि जल्दी पक क्यों नहीं...

आर्गेनिक बच्चे

  आर्गेनिक बच्चे यह शीर्षक पढ़कर चेहरे पर हल्की मुस्कान अवश्य आ गई होगी अतः इस मुस्कान को सदैव बनाये रखने के लिए कुछ विचार सांझा कर रहा हूँ। जहां ट्रेन में अन्य बच्चो को हाथ मे कोल्ड ड्रिंक, चिप्स, कुरकुरे, मोबाइल रूपी हानिकारक पदार्थ देख दुख होता है वही अपने बच्चों को कुछ अच्छा खाता देख राजीव भाई के निमित्त इस विचारधारा में आने का गर्व। मुझे याद है कि विवाह के पश्चात मेरी पत्नी ने मेरी कुसंगति में ही मोमोज़, पिज़्ज़ा आदि खाना आरम्भ किया था। यदि राजीव भाई नही मिलते तो बच्चो को भी यही खिलाता। स्वयं रोगी होता बच्चे औऱ पत्नी भी रोगी होते। स्वयं की बीमारियों पर ध्यान दूं या परिवार की। बस इसी में जीवन बीत जाता। मैं मानता भी हूँ और जानता भी हूँ कि बच्चे अपने प्रारब्ध के अनुसार गर्भ ढूंढते है और माता पिता का जीवन स्वर्ग या नर्क बना देते है। अब पीछे कुकर्मो को तो हम बदल नही सकते, परंतु आने वाले जन्मो का तो आज से ही सुधारने का प्रयास भोजन पानी और कर्मो को सुधार कर तो कर ही सकता हूँ। अपने पूर्वजों के दिए इस शरीर का नाश केवल जीभ के स्वाद हेतु कर देना अत्यंत निंदनीय पापकर्म है। परंतु उस शरीर को आन...

नहीं चाहिए ऐसा समाज जहाँ फैक्ट्री में पैदा होंगे बच्चे!

       फैक्ट्री में पैदा होंगे बच्चे यह दावा कोई खोखला नही है ऐसा दावा करने वाली दुनिया में बहुत सारी कंपनियां होंगी जो नकली बच्चे पैदा करेंगे और उससे धन कमाएंगी क्योंकि ऐसा काम सेवा के लिए तो नहीं होने वाला। परंतु बड़ी बात यह है कि भारत में गर्भ संस्कार की परंपरा उसका क्या होगा क्योंकि गोद भराई गर्भ संस्कार आदि जो परंपराएं हैं उन परंपराओं को यह पूरी तरह खत्म कर देंगे क्योंकि भारत जैसा देश ऐसी तकनीक का बहुत बड़ा बाजार बनेगा। आईवीएफ की तरह लोगों को अपने गोद में केवल जीवित दिखने वाला बच्चा चाहिए जो की फैक्ट्री में पैदा हुआ हो। मोबाइल फोन के मॉडल की तरह उनमें जेनेटिक बदलाव बालो का रंग, आंखो का रंग, कद आदि चुन सकेंगे सुनने में तो यह अद्भुत लग रहा है लेकिन जेनेटिक बदलाव से खेलने की यह हरकत आने वाली वह भयानक सच्चाई है जिसे सरकारी संरक्षण मिलेगा। समाज में ऐसे बच्चो को पहचानने के लिए नियम बनाने पड़ेंगे जिससे फैक्ट्री और प्राकृतिक रूप से पैदा हुए बच्चो की पहचान हो सके। क्योंकि ऐसे बच्चो का गोत्र आदि तो कुछ निर्धारित होगा नही। जेनेटिक बदलाव के कारण और कृत्रिम गर्भ में पलने के...

क्या आप चाइनीज़ के नाम पर खा रहे है ज़हर? अजीनोमोटो : सफ़ेद जहर / Monosodium Glutamate (MSG) White Poison

 अजीनोमोटो :सफ़ेद जहर Monosodium  Glutamate (MSG) White Poison ************************ क्या आप चाइनीज़ के नाम पर खा रहे है ज़हर? अगर आप चाइनीज़ डिश के दीवाने हैं तो यह आपको उसमें जरूर मिल जाएगा क्योंकि यह एक मसाले के रूप में उनमें इस्तमाल किया जाता है। सफेद रंग का चमकीला सा दिखने वाला मोनोसोडि़यम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो, एक सोडियम साल्ट है। शायद ही आपको पता हो कि यह खाने का स्वाद बढ़ाने वाला मसाला वास्तव में जहर यह धीमा खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी स्वाद ग्रन्थियों के कार्य को दबा देता है जिससे हमें खाने के बुरे स्वाद का पता नहीं लगता। मूलतः इस का प्रयोग खाद्य की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए किया जाता है। यह सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक होता है। जान लें कि कैसे? * सिर दर्द, पसीना आना और चक्कर आने जैसी खतरनाक बीमारी आपको अजीनोमोटो से हो सकती है। अगर आप इसके आदि हो चुके हैं और खाने में इसको बहुत प्रयोग करते हैं तो यह आपके दिमाग को भी नुकसान कर सकता है। * इसको खाने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। चेहरे की सूजन और त्वचा में खिंचावमहसूस होना इसके कुछ साइड इफेक्ट हो सक...

Another propaganda: Spa birthday parties for kids

Another propaganda: Spa birthday parties for kids ************* आने वाली पीढ़ियों पर करें उपकार भारतीयता स्वीकार अंग्रेज़ियत का बहिष्कार आज टाइम्स ऑफ इंडिया में एक समाचार पढ़ा, जिसमें बच्चों के जन्म दिवस पर सामान्य तौर पर होने वाली पार्टी की जगह स्पा पार्टी के आयोजन की बात कही गई। यह खबर किसी राष्ट्रीय विषय को उठाने के अंतर्गत नहीं छापी अपितु वह किसी एक मूर्ख महिला द्वारा अपने बच्चे के लिए की गई इस पार्टी को देशभर में अनुसरण कर करवाने के लिए छापी। राजीव भाई टाइम्स ऑफ इंडिया पढ़ते थे क्योंकि उन्हें पता है कि जितने भी षड्यंत्र हैं उनकी जानकारी इस अखबार को पढ़ने से अवश्य मिल जाएगी। यहां षड्यंत्र यह है कि किसी कंपनी द्वारा एक महिला को ऐसी पार्टी करने की प्रेरणा देकर और फिर राष्ट्रीय अखबार में उसे प्रमुखता से स्थान देने के लिए व्यवस्था की गई और इसका प्रभाव यह होगा कि पैसे से समृद्ध परंतु बुद्धि से पैदल लोग इसका अंधानुकरण करेंगे। जो बचपन से ही बच्चों को ब्यूटी पार्लर जैसे स्थान का ग्राहक बनाने की तैयारी कर देगा जिसके फलस्वरूप इन ब्यूटी पार्लर में प्रयोग ह...