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टेस्ला रोडस्टर : फुदकने वाली कार भारत के दृष्टिकोण से

 




टेस्ला रोडस्टर : उड़ती कार का चमत्कार या सड़कों के लिए नई मुसीबत?

कार को उड़ते देखना रोमांचक है, लेकिन क्या उड़ने वाली कार वास्तव में हमारे किसी काम की भी है?

एलन मस्क ने अपनी नई टेस्ला रोडस्टर से एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया। कार हवा में उछली, पलटी खाई और वापस अपने पहियों पर उतर आई।

देखकर मुँह से वाह निकलना स्वाभाविक है। तकनीक अद्भुत है। इसे बनाने वाले अभियंताओं की प्रतिभा भी प्रशंसनीय है।

लेकिन मेरी समस्या इस कार की तकनीक से नहीं, उसकी व्यावहारिकता से है।

क्योंकि किसी चीज़ का चमत्कारिक होना और उसका उपयोगी होना, दो बिल्कुल अलग बातें हैं।

पहले उड़ने और हवा में उछलने का अंतर समझिए

टेस्ला ने अपनी कार में अत्यधिक दबाव वाली हवा छोड़ने की तकनीक लगाई है, जिससे वह कुछ क्षणों के लिए हवा में उठ सकती है और करतब दिखा सकती है।

लेकिन इसे विमान की तरह उड़ना समझ लेना भूल होगी।

सवाल यह है कि क्या यह कार दिल्ली के जाम में फँसकर उड़ते हुए अगले चौराहे पर उतर सकती है? क्या यह चलते यातायात में किसी बाधा को सुरक्षित पार कर सकती है? और सबसे बड़ी बात, यदि इसके नीचे कोई मोटरसाइकिल वाला या पैदल यात्री आ गया तो?

कार का हवा में उठ जाना तकनीकी उपलब्धि है, लेकिन उसका सुरक्षित उतरना सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

भारतीय सड़कों पर इसका क्या होगा?

और भारत में तो एक अलग ही समस्या है।

जहाँ कुछ लोग थार और फॉर्च्यूनर जैसी भारी-भरकम गाड़ियों को ही रोडस्टर समझकर सड़कों पर करतब दिखाते फिरते हैं, वहाँ यदि सचमुच ऐसी कार उनके हाथ लग गई, जो पलक झपकते सौ की गति पकड़ ले और हवा में भी उछल सके, तो वे क्या विनाश करेंगे, इसकी कल्पना करना भी कठिन है।

यहाँ समस्या गाड़ी की शक्ति से अधिक उस शक्ति को सँभालने वाले के विवेक की है।

जिस समाज में कुछ लोग गाड़ी को यातायात का साधन कम और अपनी दबंगई दिखाने का हथियार अधिक समझते हों, वहाँ ऐसी तकनीक सुविधा से पहले सार्वजनिक सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है।

भारत में सड़क पर चलने के लिए केवल अच्छी गाड़ी नहीं, सामने वाले की अगली हरकत का अनुमान लगाने की क्षमता भी चाहिए।

कहीं अचानक गति अवरोधक आ जाएगा, कहीं गड्ढा, कहीं बिना संकेत दिए कोई मोटरसाइकिल मुड़ जाएगी, तो कहीं सड़क पर गाय बैठी मिलेगी।

अब कल्पना कीजिए, ऐसी सड़क पर ऐसी कार जो पलक झपकते ही लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पकड़ सकती है।

जिस सड़क पर अगला दस मीटर भी पूरी तरह अनुमानित नहीं, वहाँ इतनी शक्ति सुविधा कम और जोखिम अधिक बन सकती है।

और यह समस्या केवल भारत की नहीं है।

अमेरिका, जर्मनी या जापान की शानदार सड़कें भी सार्वजनिक यातायात के नियमों से चलती हैं। वहाँ भी कार को मनमर्जी से हवा में उछालना सामान्य वाहन चलाने का हिस्सा नहीं बन सकता।


सड़क कितनी भी अच्छी बना दीजिए, उस पर चलने वाले दूसरे लोगों को हटाया नहीं जा सकता।

गड्ढों से बचने के लिए उड़ेंगे या उड़ने के लिए सड़क खाली करवाएँगे?

टेस्ला की इस कार में नीचे की ओर खिंचाव पैदा करने वाली विशेष व्यवस्था भी है। नियंत्रित प्रदर्शन में यह कमाल कर सकती है।

लेकिन धूल, कीचड़, पानी, कंकड़, ऊबड़-खाबड़ सतह और रोजमर्रा के यातायात में इसकी विश्वसनीयता अभी सिद्ध होनी बाकी है।

फिर इसका रखरखाव, मरम्मत, विशेष उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था?

जिस कार को चलाने से अधिक सावधानी उसके करतब दिखाने में बरतनी पड़े, वह सामान्य आदमी के लिए वाहन नहीं, महँगा खिलौना है।

एक सेकंड में 60 की रफ्तार किस काम की?

आजकल गाड़ियों की विशेषता बताने का नया तरीका है कि वे कितने कम समय में शून्य से साठ की गति पकड़ लेती हैं।

लेकिन कभी सोचा है कि सामान्य सड़क पर इसकी आवश्यकता किसे है?

क्या कार्यालय पाँच मिनट पहले पहुँचने वाले हैं? क्या यातायात के संकेत हट जाएँगे? क्या आगे चल रही गाड़ियाँ अचानक गायब हो जाएँगी?

जिस सड़क पर औसत गति ही सीमित हो, वहाँ पलक झपकते सौ की गति पकड़ लेना उपलब्धि तो है, आवश्यकता नहीं।

गाड़ी की असली उपयोगिता इस बात में नहीं कि वह कितनी जल्दी सौ तक पहुँचती है, बल्कि इस बात में है कि वह आपको कितनी सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से गंतव्य तक पहुँचाती है।

और एक बात जो प्रचार की चमक में छिप जाती है

टेस्ला रोडस्टर की नई पीढ़ी का प्रदर्शन पहली बार 2017 में हुआ था। नौ वर्ष बीत चुके हैं और अब उत्पादन की बात 2028 तक पहुँच गई है।

जिस विशेष रॉकेट संस्करण के करतब देखकर दुनिया तालियाँ बजा रही है, वह सार्वजनिक सड़कों के लिए स्वीकृत भी नहीं है।

अर्थात् जिस विशेषता को देखकर लोग इसे भविष्य की कार मान रहे हैं, उसी विशेषता का सामान्य सड़क पर उपयोग फिलहाल संभव नहीं।

यह कोई छोटी बात नहीं है।

तो क्या यह तकनीक बेकार है?

बिल्कुल नहीं।

ऐसे प्रयोग भविष्य में वाहन नियंत्रण, गति, सुरक्षा और अन्य तकनीकों के विकास में उपयोगी हो सकते हैं। नियंत्रित स्थानों पर रोमांच और प्रदर्शन के लिए भी इनका अपना महत्व है।

लेकिन प्रयोगशाला की सफलता को आम आदमी की आवश्यकता बताना दूसरी बात है।

टेस्ला रोडस्टर एक अद्भुत प्रदर्शन मशीन बन सकती है। अत्यंत संपन्न लोगों का शौक भी बन सकती है। लेकिन इसे भविष्य के सामान्य यातायात का समाधान मान लेना जल्दबाजी होगी।

हमें ऐसी कार चाहिए जो खराब सड़क पर भी सुरक्षित चल सके, न कि ऐसी जिसके करतब दिखाने के लिए अच्छी सड़क भी खाली करवानी पड़े।

अंत में...

एलन मस्क ने यह दिखा दिया कि कार को हवा में उठाया जा सकता है।

लेकिन उन्होंने अभी यह सिद्ध नहीं किया कि कार का हवा में उठना हमारी रोजमर्रा की किसी वास्तविक समस्या का समाधान है।

मैं इस कार की चमक, गति, तकनीक और हवा में किए गए करतबों का आनंद अवश्य ले सकता हूँ। लेकिन इसे खरीदकर सामान्य सड़कों पर उपयोग करने की कल्पना मुझे रोमांचक कम और अव्यावहारिक अधिक लगती है।

कभी-कभी विज्ञान ऐसी चीज़ बना देता है जिसे देखकर दुनिया पूछती है—यह कैसे संभव हुआ?

लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण प्रश्न है—इसकी आवश्यकता ही क्या थी?

और शायद हम उस दौर में पहुँच चुके हैं जहाँ किसी वस्तु का उपयोग करने से अधिक महत्वपूर्ण उसका प्रदर्शन करना हो गया है।

तो सोचिए, हम तकनीक से अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं या केवल ऐसे चमत्कार, जिन्हें देखकर तालियाँ बजा सकें लेकिन अपने जीवन में उपयोग न कर सकें?

वीरेन्द्र की कीबोर्ड रूपी कलम से
भ्रमित भारतीयो के भ्रम का भ्रमण

virendersingh16@rediffmail.com

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