सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

food लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पहले जेब रोकती थी, अब पेट रोकता है!

जीवन बड़ा विचित्र हिसाब रखता है। एक समय था जब आपकी जेब इतनी अनुमति नहीं देती थी कि मनपसंद और अच्छा भोजन खरीद सकूँ। जो सस्ता था, वही खा लिया। समोसा सस्ता है, फल महँगा है—समोसा सही। पराठे से पेट भर रहा है—सूखे मेवे कौन खरीदे? कोल्ड ड्रिंक \ चाय  \ बिस्कुट में काम चल रहा है—पोषण का हिसाब बाद में देखेंगे। और शरीर भी जवान था। जो डालो, सह लेता था। मीठा खा लिया। तला हुआ खा लिया। रात को देर से खा लिया। कभी बहुत खाया, कभी भूखे रहे। फिर भी अगले दिन शरीर ऐसे उठ खड़ा होता था जैसे कल कुछ हुआ ही नहीं। युवा अवस्था की सबसे बड़ी भूल शायद यही है— शरीर बहुत कुछ सह लेता है, इसलिए हम समझ लेते हैं कि उसे कुछ हो ही नहीं रहा। जबकि शरीर भूलता नहीं है। बीस-पच्चीस की उम्र में जो अत्याचार हम उस पर करते हैं, चालीसके बाद वही शरीर धीरे-धीरे उनका हिसाब माँगना शुरू कर देता है। तब पता चलता है— जिस पेट को हम कूड़ेदान समझकर कुछ भी डालते रहे, उसकी भी स्मरणशक्ति थी। जिस नींद को काटकर काम किया, वह भी कहीं लिखी जा रही थी। जिस व्यायाम को कल पर टलते रहे, उसका भी लेखा था। जिस वजन को देखकर कहते रहे—“अभी क्या फर्क पड़ता है”—व...

"जागे हुए को मैं क्या जगाऊँ?"

"जागे हुए को मैं क्या जगाऊँ?" बचपन में सुबह हम जब बिस्तर से नहीं उठते थे ऊंघते रहते थे तो माँ एक वाक्य कहती थी कि "जागे हुए को मैं क्या जगाऊँ?" आज इस समाज पर यह बात सटीक बैठती है जो अधिकतर अपनी जीभ के स्वाद का गुलाम बन, जान-बूझकर अनजान बन वही खा रहा है जिसने आपके घर के सदस्य को अस्पताल का सदस्य (मरीज़) बनाया क्योंकि ऐसे अस्पताल में आने वाले लोगो को सोशल मीडिया के युग में सही गलत का पता न हो वह मैं मान ही नहीं सकता। आने वाली पीढ़ियां हमारे आज का आचरण से निर्मित होती है इस बात को ध्यान में रख यह पोस्ट पढ़ें किसी मित्र के कार्य हेतु एक तथाकथित चमक दमक होटल जैस हो(स्पी)टल में जाना हुआ मरीज़ो से भरा और परन्तु इलाज से खाली था. लाइन लगाकर लोग पैसा जमा करने की होड़ में थे और समय उनके पास भरपूर था।  यह मेरा मानना है की पैसा और समय सबके पास होता है और इसे लूटने की कला आधुनिक अस्पतालों ने बखूबी सीख लिया है। यह जो उदहारण मैं दे रहा हूँ उस से पुनः यह बात साबित हो जाती है की जिस चिकित्सा व्यवस्था वालो को इतना भी भान नहीं है की अस्पताल में स्वस्थ भोजन का क्या अर्थ य...

भोजन और पत्तल - किस बीमारी में कौन सी पत्तल?

भोजन और पत्तल हमने कभी वेदों का अध्ययन नही किया,हमने कभी गीता पढ़कर उसे अमल में लाने का प्रयास नही किया,हमने योग विद्या को कभी नही अपनाया,हमने आयुर्वेद में कोई अनुसंधान नही किया,हमने संस्कृत भाषा को कोई महत्व नही दिया ऐसी बहुत सी अच्छी और महत्वपूर्ण चीजें है जो हमारे पूर्वज हमारे बुजुर्ग हमे विरासत में दे गए पर हम पाश्चात्य संस्कृति अपनाने में अंधे हो गए हमने धीरे धीरे हमारी संस्कृति को ही छोड़ने का काम किया. अब एक बहुत छोटी सी बात है पर हमने उसे विस्मृत कर दिया हमारी भोजन संस्कृति इस भोजन संस्कृति में बैठकर खाना और उस भोजन को "दोने पत्तल" पर परोसने का बड़ा महत्व था कोई भी मांगलिक कार्य हो उस समय भोजन एक पंक्ति में बैठकर खाया जाता था और वो भोजन पत्तल पर परोसा जाता था जो विभिन्न प्रकार की वनस्पति के पत्तो से निर्मित होती थी. क्या हमने कभी जानने की कोशिश की कि ये भोजन पत्तल पर परोसकर ही क्यो खाया जाता था?नही क्योकि हम उस महत्व को जानते तो देश मे कभी ये "बुफे"जैसी खड़े रहकर भोजन करने की संस्कृति आ ही नही पाती.जैसा कि हम जानते है पत्तले अनेक प्रकार के पेड़ो के पत्तों से बनाई...

क्या मोमोज़ और उसकी चटनी बढ़ती जनसँख्या को रोकने का कारगर उपाय बन सकता है? - पूछता है देश / Could Momos as food be another great tool for population control?

   मोमोज आपकी जिंदगी बर्बाद कर देगा!! Could Momos as food be another great tool for population control? आजकल गली मोहल्लो नुक्कड़ मार्केट पर सिल्वर के स्ट्रीमर में उबलते हुए मोमोज तीखी लाल मिर्च की चटनी के साथ खाते हुए युवा किशोर आपको भारी संख्या में दिख जाऐंगे। अक्सर शाम के समय मासूम युवा किशोर नहीं जानते वह मोमोज खा कर अपने स्वास्थ्य चरित्र को किस हद तक बर्बाद कर रहे हैं। Momos  मैदा के बने हुए होते हैं मैदा गेहूं का एक उत्पाद है जिसमें से प्रोटीन व फाइबर निकाल लिया जाता है मृत  starch ही शेष रहता है। उसे और अधिक चमकाने के लिए बेंजोयल पराक्साइड मिला दिया जाता है जो एक रासायनिक बिलीचर है। जी हां वही ब्लीचर्स जिससे चेहरे की सफाई की जाती है।यह ब्लीचर शरीर में जाकर किडनी को नुकसान पहुंचाता है।  मैदे के प्रोटीन रहित होने से इसकी प्रकृति एसिडिक हो जाती है यह शरीर में जाकर हड्डियों के कैल्शियम को सोख लेता है तीखी लाल मिर्च की चटनी उत्तेजक होती है, जिससे यौन रोग धातु रोग नपुंसकता जैसी महा भयंकर बीमारियां देश के किशोर व युवा को खोखला कर रही है। साथ में इसमें अजीनोमोटो भ...

किसका है महत्व, स्वाद या स्वास्थ्य का?

  किसका है महत्व, स्वाद या स्वास्थ्य का? वैसे इस प्रश्न का उत्तर है कि महत्व तो दोनो का है। जो भोजन केवल स्वाद दे और स्वास्थ्य न दे वह तो हानि करेगा है परंतु जो भोजन केवल स्वास्थ्य दे और स्वाद न दे वह भी कम हानिकारक नही। पहले बाहर जाकर हम घर जैसा खाना ढूंढते थे परंतु अब घर में बाहर जैसा खाना बनाकर खाने लगे है। इन दिनों युवाओं में स्वाद प्रधानता वाला जंक फूड या फास्ट फूड की मांग बढ़ गई है। वे पिज्जा, 'वर्गर, मोमोस और हनी चिली पोटेटो जैसे खाद्य पदार्थ खूब पसंद कर रहे हैं। इनको खाने के बाद पेट खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। ज्यादा समय तक फास्ट फूड का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। इस कारण धन हानि तो होती ही है, साथ में जन हानि भी सामने आती है।  अक्सर देखने में आता है कि किसी बच्चे या बड़े का जन्म दिवस या कोई खुशी का मौका हो तो बच्चे रेस्त्रां की तरफ भागते हैं। अधिकतर युवाओं ने पेटीज, चिट्ठी चाउमीन और वर्गर जैसे आहार के साथ फेसबुक, व्हॉट्सएप पर स्टेटस लगा रखा है। हमें समझना होगा कि बड़े-बड़े रोगों का जनक फास्ट फूड ही है। चूंकि इस तरह के खाने को एक ही तेल में...

हम जूठा व बासी नही खाते !!! अगली बार ये कहने से पहले सोचियेगा।

  हम जूठा व बासी नही खाते !!! अगली बार ये कहने से पहले सोचियेगा। एक इंसान की अनुभव के आधार पर सच्ची कहानी के माध्यम से समझिए। कुछ दिन पहले एक परिचित दावत के लिये एक मशहूर रेस्टोरेंट में ले गये। मैं अक़्सर बाहर खाना खाने से कतराता हूँ किन्तु वर्ष में एक दो बार शरीर को बाहर के कचरे से अवगत करवा देता हूँ जिस से अशुद्ध को भी झेलने की क्षमता का शरीर का अभ्यास हो जाता है। आजकल पनीर खाना रईसी की निशानी है इसलिए उन्होंने कुछ डिश पनीर की ऑर्डर की। प्लेट में रखे पनीर के अनियमित टुकड़े मुझे कुछ अजीब से लगे। ऐसा लगा की उन्हें कांट छांट कर पकाया है। मैंने वेटर से कुक को बुलाने के लिए कहा, कुक के आने पर मैंने उससे पूछा पनीर के टुकड़े अलग अलग आकार के व अलग रंगों के क्यों हैं तो उसने कहा ये स्पेशल डिश है।" मैंने कहा की मैँ एक और प्लेट पैक करवा कर ले जाना चाहता हूं लेकिन वो मुझे ये डिश बनाकर दिखाये। सारा रेस्टोरेंट अकबका गया... बहुत से लोग थे जो खाना रोककर मुझे देखने लगे... स्टाफ तरह तरह के बहाने करने लगा। आखिर वेटर ने पुलिस के डर से बताया की अक्सर लोग प्लेटों में खाना,सब्जी सलाद व रोटी इत्यादी छ...

क्या आप चाइनीज़ के नाम पर खा रहे है ज़हर? अजीनोमोटो : सफ़ेद जहर / Monosodium Glutamate (MSG) White Poison

 अजीनोमोटो :सफ़ेद जहर Monosodium  Glutamate (MSG) White Poison ************************ क्या आप चाइनीज़ के नाम पर खा रहे है ज़हर? अगर आप चाइनीज़ डिश के दीवाने हैं तो यह आपको उसमें जरूर मिल जाएगा क्योंकि यह एक मसाले के रूप में उनमें इस्तमाल किया जाता है। सफेद रंग का चमकीला सा दिखने वाला मोनोसोडि़यम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो, एक सोडियम साल्ट है। शायद ही आपको पता हो कि यह खाने का स्वाद बढ़ाने वाला मसाला वास्तव में जहर यह धीमा खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी स्वाद ग्रन्थियों के कार्य को दबा देता है जिससे हमें खाने के बुरे स्वाद का पता नहीं लगता। मूलतः इस का प्रयोग खाद्य की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए किया जाता है। यह सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक होता है। जान लें कि कैसे? * सिर दर्द, पसीना आना और चक्कर आने जैसी खतरनाक बीमारी आपको अजीनोमोटो से हो सकती है। अगर आप इसके आदि हो चुके हैं और खाने में इसको बहुत प्रयोग करते हैं तो यह आपके दिमाग को भी नुकसान कर सकता है। * इसको खाने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। चेहरे की सूजन और त्वचा में खिंचावमहसूस होना इसके कुछ साइड इफेक्ट हो सक...

गर्व का अनुभव

वर्ष 2015 का एक अनुभव: कल रात किसी विवाह समारोह से रात 3.30 बजे घर पंहुचा तो सुबह 4 तक ही आँख लगी  सुबह 9 बजे घर से 15-20 किलोमीटर दूर दिल्ली के सावन पार्क के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में बच्चो को व्याख्यान देने जाना था  अधूरी नींद में सुबह 7  बजे उठा और सोचा की नींद तो बाद में पूरी कर लूँगा लेकिन आज अगर एक बच्चा भी कोल्ड ड्रिंक और जंक फ़ूड आदि से दूर हो गया तो मन को सुकून मिले  वह पहुचकर राजीव भाई द्वारा बताये गए जंक फ़ूड के नुक्सान और आयुर्वेद के नियमो के बारे में जानकारी दी एक घंटा बच्चो को हँसते हसाते बीत गया  अंत में एक ऐसा अनुभव हुआ जो आज तक पहले नहीं हुआ  इस फोटो में दिए बच्चे राहुल साहू ने मेरी बताई हर बात को अपनी कॉपी में लिखा  यह देख मुझे लगा की अपनी नींद अधूरी छोड़कर जिस उद्देश्य से मैं इस प्रकार स्कूल के बच्चो को कुछ अच्छी बात बताने निकल पड़ता हूँ उस उद्देश्य को इस बच्चे ने सार्थक कर दिखाया है  मुझे उम्मीद है की यह और इस जैसे बच्चे आगे इस देश के लिए कुछ कर दिखाये तो राजीव भाई की प्रेरणा से आने वाली पीढ़ी का कुछ भला हो जाये  वीरेंद्र Vi...

खिचड़ी के है चार यार! दही पापड़ घी अचार

खिचड़ी की अनोखी कहानी!      खिचड़ी पूरे देश में किसी न किसी रूप में मिलती है। इसका नाम अलग हो सकता है मगर इसका स्वाद सबको भाता है। ऐसे में मन में एक सवाल उठता है कि आखिर खिचड़ी बनी कैसे?  ग्लोबल फूड एक्सपो द्वारा आयोजित वर्ल्ड फूड इंडिया 2017 में खिचड़ी को भारत की ओर से सुपर फूड का तमगा दिया गया था। खिचड़ी देश के कोने कोने में मौजूद है। मकर सक्रांति को कई जगह खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है। इस दिन भगवान को खिचड़ी चढ़ाई जाती है और प्रसाद बांटा जाता है और तिल, गुड़, खिचड़ी, पतंग उड़ाने और दान करने जैसी कई प्रथाएं निभाई जाती हैं। खिच्चा से बनी खिचड़ी!  खिचड़ी शब्द संस्कृत खिच्चा से बना है। लोक मान्यता के अनुसार मकर सक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा भगवान शिव ने शुरू की थी। इतिहास के पन्नों में खिचड़ी करीब 2500 साल पुरानी है। 1350 में भारत आए मोरक्को के सैलानी इब्न बतूता ने भी चावल मूंग दाल से बनी भारत की खिचड़ी का उल्लेख किया था। सोलवीं सदी में मुगल बादशाह जहांगीर ने गुजरात में कुछ ग्रामीणों को खिचड़ी खाते देखा। जब बादशाह ने खिचड़ी खाई तो है, उसके मुरीद हो गए।...

यह तो वास्तव में एक बहुत ही शक्तिशाली टीका है!  #AwakenIndiaMovement