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जो कुत्ता मारे सो कुत्ता, जो कुत्ता पाले सो कुत्ता!

जो कुत्ता पाले सो कुत्ता जो कुत्ता मारे सो कुत्ता घर में (प्रेशर) कुकर और कुकुर (कुत्ता)  दोनों ही हानिकारक है।    इस पोस्ट का अर्थ यह कदापि नहीं है कि कुत्तो पर अत्याचार हो या उन्हें सडको से हटा दिया जाए।  अपितु जो लोग सडको पर कुत्तो को रोटी आदि प्रतिदिन देते है उनको मेरा प्रणाम है।  सड़क पर घुमते कुत्ते बहुत ज़रूरी है परन्तु घर में साथ रखने के लिए नहीं।   जिनको ऊपर लिखी बात से ठेस पहुंची है उनको और भी ठेस पहुंचगी यह जानकर कि घर में कुत्ता पालने वालो या कुत्ते को स्पर्श करने वालो के द्वारा कोई भी पुण्य कर्म का लाभ कुकुर पालक को नहीं मिलता।   चाहे वह हवन, यज्ञ, दान या किसी भी अन्य प्रकार का सुकर्म हो। यहाँ तक कि कुत्ते को स्पर्श करने के बाद 21 दिन तक यज्ञादि करने की अनुमति भी नहीं है।  जिस देश में अतिथि को देवता स्वरुप माना गया और चौखट पर "स्वागतम"  लिखवाया जाता था उस देश में द्वार पर  "कुत्ते से सावधान" का बोर्ड अब स्वागत करता है।   मुझे तो अभी तक समझ नहीं आया कि घर के किस कुत्ते से सावधान रहने की चेतावनी ह...

Real से Reel में Short(s) होते जीवन - ये पल भर का तमाशा है।

  ये पल भर का तमाशा है एक अध्ययन के अनुसार भारत में करीब 8 करोड़ लोग प्रोफेशनल कंटेंट क्रिएटर हैं, मगर वास्तव में केवल 1.5 लाख लोग ही इससे कमाई कर पा रहे हैं। क्या आप भी सोशल मीडिया के जरिये प्रसिद्ध होने का सपना देख रही हैं? दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए मशहूर होने का ख्वाब देखना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन इसके लिए खतरनाक कदम उठाना पूरी तरह गलत है। कहीं आप भी तो इसकी लत का शिकार नहीं हो रही हैं? वह पूरे दिन सिर्फ रोल बनाती रहती है और घर पर कोई ध्यान ही नहीं देती। सारा दिन अजीबोगरीब कपड़े पहनकर सुबह से ही वीडियो बनाने में लग जाती है। न किसी से मिलती और न ही किसी से बात करती। यहां तक कि मुझसे भी बात नहीं करती है और कुछ कह दो तो लड़ने लगती है। अब हमने कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी है। यह है इंदौर में रह रहे एक दंपति की कहानी। दंपति के पास बेशुमार दौलत है, दोनों पढ़े- लिखे परिवार से हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर फेम यानी ख्याति पाने की चाहत और अपनों से बढ़ती दूरी से आज उनका घर टूटने के कगार पर है। इंदौर का ही एक और केस सामने आया, जिसमें एक छात्र ने रोल बनाने के चक्कर में फांसी ...

दीपावली – सभ्यता का त्योहार

  लेख - श्री आशीष कुमार गुप्ता ( संस्थापक - जीविका आश्रम, जबलपुर) ढेरों जानकारियाँ होने के बाद भी इस बात का पूरा अहसास गाँव में रहकर ही हो पाया, कि कैसे दीपावली जैसे ढेरों त्योहार किसी धर्म, पन्थ, आदि के न होकर हमारी ‘सभ्यता’ के त्योहार रहे हैं। हमारी सभ्यता में ‘घर’ का मतलब ही ‘मिट्टी, लकड़ी, आदि से बना घर’ होता है, जो न केवल पूर्णतः प्राकृतिक सामग्री से बना होता है, बल्कि उसकी पूरी डिज़ाइन में कुछ ऐसे सिद्धान्तों का पालन होता है, जो उसमें रहने वालों को ‘आरोग्यप्रद’ रखने के साथ-साथ उनके ‘आर्थिक हितों की रक्षा’ भी करते हैं और साथ ही साथ उन्हें निरन्तर और भी अधिक ‘प्रकृति-प्रेमी’, ‘सामाजिक’ और ‘आध्यात्मिक’ होने की दिशा में अग्रसर करता है। दशहरे तक बरसात के पूरी तरह खत्म होने के बाद मिट्टी के घर एक बार पूरी तरह से साफ-सफाई और थोड़ी-बहुत मरम्मत मांगते हैं। खपरैल / कबेलू की छतों से पानी गिरने के कारण जमीन की मिट्टी से सने पानी के छीटें जहाँ – तहाँ दीवार को थोड़ा – बहुत मटमैला कर देते हैं। तेज हवा के साथ होने वाली बारिश भी मिट्टी की दीवारों की बाहरी सतह को थोड़ा-बहुत नुकसान पहुँचाती है। बरसा...

गर्भनाल देर से क्यों काटनी चाहिए? Why Umbilical Cord Clamping should be delayed after birth?

गर्भनाल देर से क्यों काटनी चाहिए? यह विषय शायद अधिकतर लोगो के लिए नया है परन्तु वास्तव में बहुत प्राचीन और महत्वपूर्ण है यह आपके होने वाले बच्चे पर जीवन पर्यन्त प्रभाव डालता है अतः इसे अवश्य पढ़े और प्रेषित करें। अन्य विषयो की भाँति आधुनिक विज्ञान इस विषय पर आज बात करने लगा है और लोगो को लगता है कि यह इस विकृत विज्ञान की खोज है परन्तु सत्य यह है कि इस विषय का ज्ञान भारत में प्राचीन काल से रहा है और उसका पालन किया जाता रहा है। लेकिन हमारी गुलाम मानसिकता ऐसी है कि जब तक किसी विषय पर विदेशी ठप्पा न लग जाये उसे स्वीकार करने में शर्म लगती है। क्या है विषय? जब बच्चा गर्भ में होता है तो वह अपना पोषण और जीवन संचालन की शक्ति गर्भनाल के द्वारा माँ से प्राप्त करता है जिसे अंग्रेजी में अम्बिलिकल कॉर्ड (Umbilical Cord) कहते है। जब बच्चा जन्म लेता है तो वह इसी नाल से अपनी नाभि द्वारा जुड़ा हुआ ही आता है परन्तु जन्म के कुछ मिनट तक भी इस नाल में रक्त प्रवाह जारी रहता है जो कुछ मिनट बाद पूरा बच्चे में चला जाता है और तब इस नाल को काटकर माँ को बच्चे से अलग कर दिया जाता है। अंग्रेजी में इसे cord cl...

क्या है न्यू वर्ल्ड आर्डर जिसके मोदी जी प्रचारक है? What is New World Order (NWO) which now a days Modi ji is advocating a lot?

  क्या है न्यू वर्ल्ड आर्डर जिसके मोदी जी आजकल बड़े फैन है? कोरोना महामारी के दौरान एक शब्द बहुत चर्चा में आया है वो है ‘द न्यू वर्ल्ड ऑर्डर’ (NWO) या जिसे नई विश्व व्यवस्था कह सकते हैं, वैसे तो इसके लिए कई षड्यंत्र सिद्धांत (Conspiracy Theories) चर्चाओं में हैं। ये ज़रूरी नहीं कि सभी कांस्पीरेसी थ्योरीज़ झूठ या मनघडंत हों, दुनिया में ऐसी कई कांस्पीरेसी थ्योरीज़ सच भी साबित हुईं हैं जिनपर लोगों को विश्वास नहीं था। 1950 में एक कांस्पीरेसी थ्योरी ये उठी थी कि CIA अपने कुछ ख़ुफ़िया प्रोपगैंडों को पूरा करने और जनता की राय बनाने के लिए जर्नलिस्ट्स को भर्ती कर रही है। और अंत में ये बात Operation Mockingbird में सच साबित हुई। 2011 में अमरीका में इस कांस्पीरेसी थ्योरी पर चर्चा और संशय शुरू हुआ कि सरकार लोगों के फोन को सर्विलेंस कर रही है, और ये बात 2013 में जाकर सच साबित हुई। 2011 में ही वायरस पर बनी फिल्म ‘Contagion’ रिलीज़ हुई ये भी कह सकते हैं कि भविष्य की कांस्पीरेसी थ्योरी ही थी जो कि विश्व में कोरोना महामारी के आगमन के साथ सटीक साबित हुई। ठीक वैसे ही झोरोना से पहले अक्टूबर 2019 में एक Even...