जो कुत्ता मारे सो कुत्ता, जो कुत्ता पाले सो कुत्ता



 

जो कुत्ता पाले सो कुत्ता
जो कुत्ता मारे सो कुत्ता

घर में (प्रेशर) कुकर और कुकुर दोनों ही हानिकारक है।   

इस पोस्ट का अर्थ यह कदापि नहीं है कि कुत्तो पर अत्याचार हो या उन्हें सडको से हटा दिया जाए।  अपितु जो लोग सडको पर कुत्तो को रोटी आदि प्रतिदिन देते है उनको मेरा प्रणाम है।  सड़क पर घुमते कुत्ते बहुत ज़रूरी है परन्तु घर में साथ रखने के लिए नहीं।  

जिनको ऊपर लिखी बात से ठेस पहुंची है उनको और भी ठेस पहुंचगी यह जानकर कि घर में कुत्ता पालने वालो या कुत्ते को स्पर्श करने वालो के द्वारा कोई भी पुण्य कर्म का लाभ कुकुर पालक को नहीं मिलता।   चाहे वह हवन, यज्ञ, दान या किसी भी अन्य प्रकार का सुकर्म हो। यहाँ तक भी सुनने को मिला कि कुत्ते को स्पर्श करने के बाद 27 दिन तक यज्ञादि करने की अनुमति भी नहीं है। 

जिस देश में अतिथि को देवता स्वरुप माना गया और चौखट पर "स्वागतम" लिखवाया जाता था

उस देश में द्वार पर "कुत्ते से सावधान" का बोर्ड अब स्वागत करता है। 

 मुझे तो अभी तक समझ नहीं आया की किस कुत्ते से सावधान रहने की चेतावनी है।  

कितनी वैज्ञानिकता थी हमारे पूर्वजो में जो हमारे यहाँ पहले रोटी गाय को और अंतिम टुकड़ा गली के कुत्ते को देने का नियम था , क्योंकि कुत्ता यदि 15 दिन भूखा रह जाये तो पागल हो जाता है और फिर वह सबके लिए हानिकारक है।

इस अंतिम टुकड़े के कारण वह कुत्ता आपके घर की परिधि की ईमानदारी से स्वतः ही सुरक्षा करता है परन्तु उसे घर के सदस्य की भाँती घर में जगह देना मूर्खता है।

    मुझे याद है 1985 में "तेरी मेहरबानियां" नाम की एक फिल्म थी जिसमे एक कुत्ते ने अपने मालिक की मृत्यु का बदला लिया।  भारत का मानस बिगाड़ने के अन्य विषयो की तरह जैसी फिल्मो के कारण कुत्तो के प्रति  लगाव और उसका बाजार बढ़ा। अभी हाल में ही एक  फिल्म देख मेरे बालमन में कुत्ता पालने की इच्छा भी जागृत हुई परन्तु सौभाग्य से वह इच्छा माता जी द्वारा कुचल दी गयी।  

कई वर्ष पहले Hutch कंपनी के विज्ञापन में जो कुत्ता आया वह नस्ल भी रातो रात  

प्रसिद्द होकर घर घर में पहुंच गयी  क्योंकि विज्ञापन में वह CUTE लग रहा था और वह कुत्ता कद काठी में ऐसा है जिससे सुरक्षा की आशा कदापि नहीं की जा सकती।  

आज समझ आया की कुत्ता मल मूत्र के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकता।  मैंने तो नियम बना लिया है कि जिस घर में कुत्ता होगा उस घर का पानी भी ग्रहण नहीं करूँगा।  यूरोप एवं अमेरिका में बहुत बड़ी संख्या में परिवार एवं उसके द्वारा मिले प्रेम एवं अपनेपन एवं वफादारी का आभाव है।  अतः वह कुत्ते में वह सब पाते है तो उसकी से अत्यंत लगाव कर लेते है।  भारत या कहे की इंडिया की सामाजिक व्यवस्था  भी उसी राह पर है। कुछ तथाकथित शिक्षित महिलाएं जो विवाह के बाद बच्चो के पालन को झंझट समझती है वो कुत्ते के पालन में निपुणता प्राप्त देखी है हमने।

कई घरों में तो कुत्ते के मरने के बाद उसकी फोटो माला के साथ लगी देखी है। 

अति तब होती है जब कोई मांसाहारी व्यक्ति पशु प्रेम का हवाला देकर कुत्ता पालने को सही ठहराने के प्रयास करता है। ऐसे लोगो पर तो अब गुस्सा नही दया आती है।

इस चित्र में यह जो बेटी है वह मेरे देखते देखते पूरी सब्ज़ी का नाश्ता उन्ही झूठे हाथो से कर रही है जो यह कुत्ता साथ साथ चाट रहा था। लगभग 3 बार भोजन करते करते इसने इस कुत्ते के माथे पर चूमा भी । इसका पूरा परिवार इसके साथ था । ईश्वर सद्बुद्धि दे।


     घर में कुत्ता बिल्ली आदि न पाले, गाय पाले !

यह विडम्बना है की शहरों में जगह होने पर भी घर में गाय रखने की अनुमति नहीं है और कुत्तो को के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है।  

अब आप कहेंगे की जगह कहाँ है गाय रखने की? तो यही कहूंगा कि जगह पहले अपने मन में, ह्रदय में बनाएं फिर आप गाय चाहे तो अपने घर में रख सकते है  या किसी और के घर में पल रही देसी गाय से बने उत्पादों को प्रयोग कर प्रत्यक्ष नहीं तो परोक्ष रूप से गाय घर में पाले।

हालांकि व्यक्तिगत रूप से गाय को फैक्ट्री बनाने के विरुद्ध हूँ परन्तु आज के सामाजिक व्यवस्था में जिसके घर में गाय है  उसका घर की जीविका यदि गाय से चलेगी तो ही  घर में गाय बंधेगी।  अतः जिनके घर गाय है उनका सहयोग करें।  

राजेन्द्र दास जी महाराज के इस वीडियो इस बारे में विचार विस्तार से सुने।

कुकुर क्यों नहीं पाले!



एक ही थाली में कुत्ते के साथ खाने वाली इस महिला को ईश्वर सद्बुद्धि दें 



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कुकुर और कुकर से दूर
कीबोर्ड रूपी कलम से लिखता
वीरेंद्र सिंह

Gaudhuli.com 

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