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बद्रीनाथ धाम: शंख वर्जित......पर डीजे चालू है!

बद्रीनाथ में शंख मौन है… पर डीजे बोल सकता है! उत्तराखण्ड में इस वर्ष बद्रीनाथ धाम ने एक और कीर्तिमान बना दिया। 22 सितम्बर तक 17 लाख 79 हजार 805 श्रद्धालु भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर चुके थे। सरकार इसे बेहतर यात्रा-प्रबन्धन और सुविधाओं से जोड़कर देख रही है।  अच्छी बात है। वैसे उत्तराखण्ड में आजकल कीर्तिमान टूटने का समय चल रहा है। श्रद्धालुओं का कीर्तिमान टूट रहा है। बरसात में सड़कें टूटती हैं। पहाड़ खिसकते हैं। इस वर्ष भी भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने कई क्षेत्रों में भारी क्षति की है।  तो मैंने सोचा— बेचारी परम्पराएँ ही क्यों बची रहें? बद्रीनाथ भगवान विष्णु का धाम है। वही भगवान विष्णु जिनके हाथ में शंख है। लेकिन बद्रीनाथ में शंख नहीं बजाया जाता। इसके पीछे अनेक धार्मिक कथाएँ हैं। एक प्रचलित मान्यता यह है कि माता लक्ष्मी के ध्यान में विघ्न न पड़े, इसलिए भगवान विष्णु ने विजय के बाद भी शंखनाद नहीं किया और वही परम्परा आगे चली।  कथा ऐतिहासिक तथ्य है या धार्मिक मान्यता या विज्ञान, यह अलग विषय है। लेकिन उसका भाव बड़ा सुन्दर है— भगवान की विजय से भी अधिक महत्त्व किसी के ध्यान और श...

400 वर्ष बर्फ में दबा रहा केदारनाथ मंदिर एक अनसुलझी पहेली है !

केदारनाथ मंदिर का निर्माण किसने करवाया था इसके बारे में बहुत कुछ कहा जाता है। पांडवों से लेकर आदि शंकराचार्य तक। आज का विज्ञान बताता है कि केदारनाथ मंदिर शायद 8वीं शताब्दी में बना था। यदि आप ना भी कहते हैं, तो भी यह मंदिर कम से कम 1200 वर्षों से अस्तित्व में है। केदारनाथ की भूमि 21वीं सदी में भी बहुत प्रतिकूल है। एक तरफ 22,000 फीट ऊंची केदारनाथ पहाड़ी, दूसरी तरफ 21,600 फीट ऊंची कराचकुंड और तीसरी तरफ 22,700 फीट ऊंचा भरतकुंड है। इन तीन पर्वतों से होकर बहने वाली पांच नदियां हैं मंदाकिनी, मधुगंगा, चिरगंगा, सरस्वती और स्वरंदरी। इनमें से कुछ इस पुराण में लिखे गए हैं। यह क्षेत्र "मंदाकिनी नदी" का एकमात्र जलसंग्रहण क्षेत्र है। यह मंदिर एक कलाकृति है I कितना बड़ा असम्भव कार्य रहा होगा ऐसी जगह पर कलाकृति जैसा मन्दिर बनाना जहां ठंड के दिन भारी मात्रा में बर्फ हो और बरसात के मौसम में बहुत तेज गति से पानी बहता हो। आज भी आप गाड़ी से उस स्थान तक नही जा सकते I फिर इस मन्दिर को ऐसी जगह क्यों बनाया गया? ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में 1200 साल से भी पहले ऐसा अप्रतिम मंदिर कैसे बन सकता है ? 1200 ...