आज की नारी — पढ़ी-लिखी गांधारी भाग 2 — Junk का अर्थ भी पता है... फिर भी बच्चे को खिला रही है आज की माँ अनपढ़ नहीं है। साक्षर है लेकिन शिक्षित नहीं उसे पता है कि Junk Food कोई स्वास्थ्यवर्धक भोजन नहीं है। वह अंग्रेज़ी भी समझती है, Google भी चला लेती है, Instagram पर हेल्थ अच्छे रखें वाली reels भी देखती है और बच्चे को कौन-सा स्कूल दिलाना है इस पर तीन महीने शोध भी कर सकती है। और Junk का अर्थ भी जानती है कूड़ा। कचरा। ऐसी वस्तु जिसका वास्तविक मूल्य बहुत कम हो। अब विडंबना देखिए। जिस भोजन के नाम में ही दुनिया ने चेतावनी लिख रखी है, वही हम अपने बच्चों को प्यार से खिला रहे हैं। कभी-कभी तो लगता है— पढ़ी-लिखी होकर भी नहीं, शायद पढ़ी-लिखी होने के कारण ही खिला रहे हैं। क्योंकि अब घर की बनी चीज़ साधारण लगने लगी है और चमकीला पैकेट आधुनिक। बच्चा रोया—पैकेट खोल दो। विद्यालय जाना है—बिस्किट रख दो, और थोड़ा आधुनिक दिखना हो तो उसे कुकीज़ कह दो। बाज़ार निकले—चिप्स पकड़ा दो। लंबी यात्रा है—कुछ ताड़ के तेल से लदे पैकेटबंद नाश्ते रख लो। जन्मदिन है—केक, कोला, पैकेट वाला रस और इतनी रंग-बिरंगी ची...
आने वाली पीढ़ियों को समर्पित