NSSM 200: दुनिया की जनसंख्या कम करने की योजना का 1974 का प्रमाण
2019 के लगभग एक परिचित के टेबल पर काँच के नीचे एक डॉक्यूमेंट देखा तो मैंने पूछा कि यह महत्वूर्ण जानकारी ऐसे क्यो छिपा कर रखी है
तो उन्हीने कहा कि इतने वर्षों में आप पहले व्यक्ति हो जिसने इसको समझा है
क्या था वह डॉक्यूमेंट आइए जानते है
यह वो प्रमाण है जो आप किसी को भी देकर कुतर्को का मुंह बंद कर सकते है
हमें बताया गया कि दुनिया की जनसंख्या कम करने की कोई अंतरराष्ट्रीय योजना वगैरह नहीं है।
ऐसी बातें करने वाले बस conspiracy theorists हैं।
अच्छा जी!
फिर 1974 का यह गुप्त दस्तावेज़ NSSM 200 क्या था?
पूरा नाम था—
National Security Study Memorandum 200
और इसे तैयार करवाने वालों में प्रमुख नाम था Henry Kissinger का।
अब आप सोचेंगे अमेरिका की National Security का भारत, Nigeria, Mexico, Brazil जैसे देशों की जनसंख्या से क्या लेना-देना?
यही तो मज़ेदार बात है।
दस्तावेज़ युद्ध के बारे में नहीं था।
मिसाइल के बारे में नहीं था।
इसमें चिंता थी कि विकासशील देशों की जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।
और यदि इन देशों के लोग अधिक सम्पन्न होने लगे…
तो क्या होगा?
वे अधिक भोजन खाएँगे।
अधिक ऊर्जा उपयोग करेंगे।
अपने खनिज स्वयं इस्तेमाल करेंगे।
अपना जीवन स्तर बेहतर करने की माँग करेंगे।
और सबसे बड़ी समस्या—
अपने संसाधन पश्चिम को सस्ते में देना बंद भी कर सकते हैं।
बस!
यहीं population अचानक “humanitarian issue” से निकलकर National Security issue बन जाती है।
क्योंकि अमेरिका को अफ्रीका, एशिया और Latin America से अपने भविष्य की योजनाओं के लिए minerals और raw material चाहिए थे अर्थात् इनके प्राकृतिक संसाधन चाहिए थ्री
और वहाँ की बढ़ती हुई आबादी भविष्य में उन्हीं संसाधनों की ग्राहक बन सकती थी।
अर्थात…
जिसे हम अपने देश के लिए विकास कहेंगे,
वही किसी दूसरे देश के लिए समस्या हो सकती है।
NSSM 200 में विशेष रूप से 13 देशों की बढ़ती जनसंख्या पर ध्यान दिया गया था। जिनको यह LDC अर्थात् Least Developed Countries की सूची में रखते है
उनमें भारत भी था।
अब समस्या यह थी कि किसी देश की population कम करवाने के लिए सेना तो भेज नहीं सकते।
बम गिराकर family planning तो होगी नहीं।
तो रास्ता क्या है?
Food Aid.
Foreign Aid.
Loans.
International Agencies.
जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम
यानि जिस चीज़ की गरीब देश को आवश्यकता है, उसी को माध्यम बनाओ।
दस्तावेज़ में इस बात तक पर विचार हुआ कि अन्न सुरक्षा और दूसरी सहायता को जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से कैसे जोड़ा जाए?
अब इसके बाद पिछले कई दशकों के जनसंख्या नियंत्रण अभियानों को थोड़ा अलग नज़र से देखिए।
हमें बताया गया—
छोटा परिवार, सुखी परिवार।
गरीबी कम होगी।
महिलाएँ सशक्त होंगी।
गर्भपात करवाना आसान
नसबंदी कार्यक्रम आपातकाल वाला भी
बच्चों का भविष्य अच्छा होगा।
हो सकता है इनमें से कई बातें सही भी हों।
सवाल वह नहीं है।
सवाल यह है कि अमेरिका को हमारे परिवार के आकार की इतनी चिंता क्यों थी?
हमारे बच्चों की चिंता थी?
या हमारे संसाधनों की?
क्योंकि इस classified document की भाषा में मानवता कम और रणनीति ज्यादा है।
उन्हें जिंक चाहिए।
कॉपर चाहिए।
तेल चाहिए।
दूसरे raw materials चाहिए।
और वे चाहते हैं कि जिन देशों से ये संसाधन आते हैं, वहाँ उनकी घरेलू माँग इतनी न बढ़ जाए कि अमेरिका के लिए भविष्य में इसकी आपूर्ति और कीमत दोनों कठिन हो जाएँ।
फिर हमें दशकों तक बताया गया कि—
“Population control को global agenda कहना conspiracy theory है।”
अरे! जब सरकार स्वयं उसे National Security Study में लिख रही हो, तब conspiracy theory कहाँ से आ गई?
सबसे रोचक बात! यह दस्तावेज़ बाद में declassify अर्थात् अमेरिकी सरकार द्वारा 1990 के दशक में सार्वजनिक भी कर दिया गया जब उनके अभियान कई देशों में लागू हो चुके थे
यानि अब कोई गुप्त WhatsApp forward नहीं है।
सरकारी दस्तावेज़ है।
इसलिए किसी भी बड़े international humanitarian campaign को देखते समय केवल उसका सुंदर विज्ञापन मत देखिए।
कभी उसके पीछे की foreign-policy file भी खोल लिया कीजिए।
सामने लिखा हो सकता है—
“हम आपकी भलाई चाहते हैं।”
पीछे हिसाब कुछ और भी चल रहा हो सकता है।
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