शायद दुनिया के सबसे बड़े झूठों में से एक यह है
शायद दुनिया के सबसे बड़े झूठों में से एक यह है
कि उम्र के साथ समझदारी अपने-आप आ जाती है।
नहीं आती!
समय आपको समझदार नहीं बनाता।
समय बस यह दिखा देता है कि आपने इतने वर्षों में सीखा कितना है।
बहुत से लोग उम्र में बड़े हो जाते हैं, सोच में नहीं।
वही गलतियाँ करते रहते हैं।
वही आदतें पकड़े रहते हैं।
वही फैसले बार-बार दोहराते हैं।
और फिर उस दोहराव को नाम दे देते हैं— “अनुभव।”
जबकि किसी काम को तीस साल तक करते रहना और उस काम से तीस साल तक सीखते रहना—दो बिल्कुल अलग बातें हैं।
आप किसी गलती को सौ बार दोहरा लें तो वह अनुभव नहीं बन जाती।
गलती से सीखना अनुभव है।
गलती को दोहराते रहना सिर्फ उम्र बढ़ना है।
इसलिए किसी व्यक्ति के सफेद बाल देखकर उसकी समझदारी का अनुमान मत लगाइए।
कभी-कभी सफेद बाल केवल इतना बताते हैं कि आदमी बहुत वर्षों से इस दुनिया में है।
यह नहीं कि उसने इन वर्षों से कुछ सीखा भी है।
उम्र समय बताती है।
समझदारी यह बताती है कि उस समय का किया क्या।
वीरेन्द्र सिंह की कीबोर्ड रुपी कलम द्वारा
भ्रमित भारतीयों के भ्रम का भ्रमण
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें