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क्या Avatar फिल्म कहीं न कहीं ब्रिटिश भारत की याद दिलाती है?





जब मैंने पहली बार 2009 में Avatar देखी थी, तो मुझे यह सिर्फ एक साइंस फिक्शन फिल्म लगी। लेकिन दूसरी बार देखने पर लगा कि यह कहानी सिर्फ एलियंस और दूसरी दुनिया की नहीं है। इसमें औपनिवेशिक शासन (Colonialism) की झलक साफ दिखाई देती है।

अगर ब्रिटिश भारत का इतिहास पढ़ा हो, तो कई जगह ऐसा लगता है जैसे कहानी बस ग्रह बदलकर सुना दी गई हो।

सबसे पहली बात देखिए।

फिल्म में इंसान Pandora पर दोस्ती करने नहीं जाते। वे वहाँ इसलिए जाते हैं क्योंकि वहाँ Unobtanium नाम का कीमती संसाधन है।

अब भारत को याद कीजिए।

ईस्ट इंडिया कंपनी भी पहले यही कहकर आई थी कि हम तो सिर्फ व्यापार करने आए हैं। लेकिन धीरे-धीरे व्यापार, राजनीति में बदला… राजनीति, सेना में बदली… और देखते-देखते पूरा देश उनके कब्जे में चला गया।

यही वजह है कि Avatar देखते समय RDA Corporation कई लोगों को East India Company जैसी लगती है।

एक और बात पर ध्यान दीजिए।

फिल्म में Na’vi लोगों को बार-बार पिछड़ा, जंगली और असभ्य कहा जाता है।

इतिहास में भी अंग्रेज़ अक्सर भारत के बारे में यही कहते थे कि यहाँ के लोग पिछड़े हैं और उन्हें सभ्य बनाने की ज़रूरत है।

यह नहीं कहा जा रहा कि भारत में कोई समस्या नहीं थी। हर समाज में समस्याएँ होती हैं। लेकिन किसी समाज को “असभ्य” बताकर उस पर शासन करने को सही ठहराना औपनिवेशिक सोच का हिस्सा रहा है।

फिल्म में Pandora का जंगल सिर्फ पेड़ नहीं है।

वह उनकी पहचान है।

उनका धर्म है।

उनका इतिहास है।

उनका घर है।

बिल्कुल वैसे ही जैसे भारत में जंगल, नदियाँ, पर्वत और भूमि सिर्फ प्राकृतिक चीज़ें नहीं मानी गईं।

हम आज भी कहते हैं—

गंगा माता

पृथ्वी माता

गोमाता

भारत माता

यानी प्रकृति हमारे लिए सिर्फ संसाधन नहीं, सम्मान की चीज़ रही है।

Avatar में इंसानों की नज़र जंगल पर है।

Na’vi की नज़र उसी जंगल में बसे जीवन पर है।

यही फर्क औद्योगिक सोच और पारंपरिक सोच का भी है।

एक कहती है—

“इस जंगल से हमें क्या मिलेगा?”

दूसरी कहती है—

“इस जंगल के बिना हम क्या रह जाएँगे?”

एक और दिलचस्प बात है।

फिल्म में कुछ Na’vi इंसानों का साथ देते हैं।

भारत के इतिहास में भी ऐसा हुआ।

हर भारतीय अंग्रेज़ों के खिलाफ नहीं था।

कई राजा उनके साथ थे।

कई सैनिक उनकी सेना में थे।

कई लोगों ने उनका विरोध भी किया।

इतिहास हमेशा काला-सफेद नहीं होता।

लेकिन यहाँ एक बड़ा फर्क भी है।

Avatar में आखिरकार कहानी का हीरो Jake Sully बन जाता है।

यानी बाहर से आया एक आदमी।

भारत की कहानी ऐसी नहीं थी।

भारत की आज़ादी की लड़ाई भारतीयों ने ही लड़ी। अलग-अलग विचारों वाले, अलग-अलग इलाकों के लाखों लोगों ने मिलकर संघर्ष किया।

यही दोनों कहानियों के बीच सबसे बड़ा अंतर है।

तो क्या James Cameron ने Avatar भारत को ध्यान में रखकर बनाई थी?

और एक बात जो शायद बहुत कम लोग जानते हैं।

इस फिल्म का नाम “Avatar” कोई अंग्रेज़ी शब्द नहीं है। यह संस्कृत के “अवतार” शब्द से लिया गया है।

James Cameron ने खुद कहा था कि उन्होंने यह शब्द भारतीय दर्शन से लिया, जहाँ अवतार का अर्थ है—ईश्वर का किसी विशेष उद्देश्य से दूसरे रूप में प्रकट होना। फिल्म में भी इंसान अपने शरीर से निकलकर एक दूसरे शरीर में प्रवेश करता है, इसलिए “Avatar” नाम चुना गया। 

अब ज़रा Na’vi पर ध्यान दीजिए।

क्या आपने कभी सोचा कि वे नीले ही क्यों हैं?

James Cameron ने एक इंटरव्यू में बताया था कि Na’vi का नीला रंग उन्हें हिंदू देवी-देवताओं, खासकर भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण की पारंपरिक नीली छवि से जोड़ता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह सीधा धार्मिक चित्रण नहीं था, बल्कि एक रचनात्मक प्रेरणा (creative inspiration) थी। 

यानी अगर पूरी फिल्म को देखें, तो सिर्फ इसकी कहानी ही नहीं, बल्कि नाम “Avatar” और Na’vi का नीला स्वरूप भी भारतीय परंपरा से प्रेरित दिखाई देता है।

इसका मतलब यह नहीं कि Avatar हिंदू धर्म या भारत की कहानी है। लेकिन यह कहना गलत भी नहीं होगा कि James Cameron ने भारतीय दर्शन और हिंदू प्रतीकों से प्रेरणा लेकर अपनी काल्पनिक दुनिया को और गहराई दी। 

इसका कोई पक्का सबूत नहीं है।

उन्होंने कई बार कहा है कि फिल्म औपनिवेशिक सोच, संसाधनों की लूट और आदिवासी समाजों के संघर्ष से प्रेरित है।

लेकिन यह कहना भी गलत नहीं होगा कि ब्रिटिश भारत का इतिहास पढ़ने वाला व्यक्ति Avatar में कई परिचित पैटर्न पहचान सकता है।

शायद यही वजह है कि यह फिल्म दुनिया के अलग-अलग देशों के लोगों को अपनी-अपनी इतिहास की याद दिलाती है।

वीरेन्द्र की कीबोर्ड रूपी कलम से 

- VirenderSingh.in







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