सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

निष्ठा की परीक्षा


 निष्ठा की परीक्षा 

शादी हो जाने के बाद दुनिया से सुन्दर लोग गायब नहीं हो जाते। 

आपकी पत्नी से अधिक सुन्दर स्त्रियाँ मिलेंगी।

आपके पति से अधिक सफल, अधिक पैसे वाले, अधिक आकर्षक पुरुष भी मिलेंगे।

इसीलिए विवाह केवल चेहरा, शरीर या पैसा देखकर किया ही नहीं जाना चाहिए।

क्योंकि शादी खेल का अंत नहीं है।

असल परीक्षा तो उसके बाद शुरू होती है।

पुरुष को कोई ऐसी स्त्री मिलेगी जो पत्नी से कम उम्र की है, अधिक सजी-सँवरी है, फिट है, मुस्कुराकर बात करती है… और सबसे बड़ी बात—उसके साथ अभी बिजली का बिल, बच्चों की फीस, गैस सिलेंडर और सुबह की स्कूल बस नहीं जुड़ी।

और घर पहुँचोगे तो पत्नी शायद बाल बाँधे, पुराने कपड़ों में, बच्चों पर चिल्लाती हुई मिले।

अब तुलना बड़ी आसान लगेगी।

बस एक बात याद रखना—

जिस स्त्री को तुम बाहर चमकता हुआ देख रहे हो, उसके साथ तुमने जीवन नहीं जिया।

और जिस पत्नी को आज थका हुआ देख रहे हो, उसकी उस थकान में तुम्हारा घर भी शामिल है।

ठीक यही बात स्त्रियों पर भी लागू होती है।

ऑफिस में कोई पुरुष मिलेगा—अच्छा कमाता है, फिट है, ध्यान से बात सुनता है, तारीफ करता है, तुम्हारी हर बात पर मुस्कुराता है।

और घर में पति?

सोफे पर पड़ा है।

बाल कम हो रहे हैं।

पेट निकल रहा है।

EMI चल रही है।

ऑफिस का तनाव अलग है।

और शायद आधी रात को चुपचाप यह हिसाब लगा रहा है कि अगले महीने सब खर्च कैसे पूरे होंगे।

अब तुलना यहाँ भी बड़ी आसान है।

क्योंकि बाहर वाला व्यक्ति आपको अपना सबसे अच्छा रूप दिखा रहा है।

और घर वाला?

उसके साथ आपने उसका पूरा जीवन देखा है—अच्छा भी, खराब भी, थका हुआ भी, चिड़चिड़ा भी।

यही विवाह की असली परीक्षा है।

आप किसी व्यक्ति के “best version” से विवाह नहीं करते।

आप उसके साथ बूढ़े होने का निर्णय करते हैं।

चेहरा बदलेगा।

शरीर बदलेगा।

पैसा आएगा-जाएगा।

स्वभाव में भी उतार-चढ़ाव आएँगे।

और बाहर विकल्प हमेशा दिखाई देते रहेंगे।

इसलिए यदि विवाह केवल आकर्षण पर खड़ा है, तो कोई अधिक आकर्षक व्यक्ति उसे हिला देगा।

यदि केवल पैसे पर खड़ा है, तो कोई अधिक पैसे वाला उसे हिला देगा।

लेकिन यदि विवाह उस व्यक्ति के चरित्र, उसके साथ बिताए जीवन, उसके संघर्ष और आप दोनों की प्रतिबद्धता पर खड़ा है—

तो आकर्षण आएगा भी… और चला भी जाएगा।

निष्ठा का अर्थ यह नहीं कि आपको कोई दूसरा अच्छा लगना बंद हो जाएगा।

निष्ठा का अर्थ है—

अच्छा लगने के बावजूद आपने किसे चुना।

और विवाह में यह चुनाव केवल मंडप में एक बार नहीं होता।

यह चुनाव बार-बार करना पड़ता है।


वीरेन्द्र की कीबोर्ड रूपी कलम से 

भ्रमित भारतीयो के भ्रम का भ्रमण


VirenderSingh.in

Gaudhuli.com

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

त्रिफला कल्प | Trifala Kalp : जानिए 12 वर्ष तक लगातार असली त्रिफला खाने के लाभ! |

हिन्दी English आयुर्वेद • त्रिफला • 12 वर्ष का कल्प त्रिफला कल्प जानिए 12 वर्ष तक लगातार असली त्रिफला लेने की पारंपरिक विधि त्रिफला केवल कभी-कभार पेट साफ करने वाला चूर्ण नहीं माना गया। आयुर्वेद में इसे रसायन के रूप में भी स्थान मिला है। यहाँ त्रिफला का सही अनुपात, आयु के अनुसार मात्रा, ऋतु के अनुसार अनुपान, 12 वर्ष के कल्प और इसके अन्य पारंपरिक प्रयोगों को सरल और व्यवस्थित रूप में रखा गया है। हरड़ बहेड़ा आँवला घी शक्कर संग खाए हाथी दाबे कांख में और चार कोस ले जाए 1 कोस लगभग 3–4 किलोमीटर त्रिफला आखिर है क्या? आयुर्वेद के अनुसार हरड़, बहेड़ा और आँवला—इन तीन फलों के मिश्रण को त्रिफला कहा जाता है। परंपरागत आयुर्वेदिक दृष्टि में इसे वात, पित्त और कफ के संतुलन से जोड़कर देखा गया है। पुराने वर्णनों में त्रिफला को दीर्घकालीन पोषण और कायाकल्प से भी जोड़ा गया है। त्रिफला किस अनुपात में बनता है? अभ...

प्यास लगी थी गजब की…मगर पानी मे जहर था…

 प्यास लगी थी गजब की…मगर पानी मे जहर था… पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते. बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!! ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!! वक़्त ने कहा…..काश थोड़ा और सब्र होता!!! सब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता!!! सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब…।। आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।। “हुनर” सड़कों पर तमाशा करता है और “किस्मत” महलों में राज करती है!! दौलत की भूख ऐसी लगी कि कमाने निकल गए दौलत मिली तो हाथ से रिश्ते निकल गए बच्चो में रहने की फुरसत न मिली कभी फुरसत मिली तो बच्चे खुद कमाने निकल गए “शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी, पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने, वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता”.. अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!! जवानी का लालच दे के बचपन ले गया…. अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. …… लौट आता हूँ वापस घर की तरफ… हर रोज़ थका-हारा, आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ। “थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!” भरी जेब ने ‘ दुनिया ‘ की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ‘ अपनो ‘...

2003 से संसद में सभी कोल्ड ड्रिंक्स ब्रांड की बिक्री पर रोक है भारत में क्यों नहीं?

2003 से संसद में सभी कोल्ड ड्रिंक्स ब्रांड की बिक्री पर रोक है पूरे  भारत में क्यों नहीं? सरकारों का दोगलापन हमेशा से रहा है, सेवक बनकर दलाली ही की है अब अविवेकी और व्यवस्था के गुलाम लोग ऐसी दलील देंगे कि "कोल्ड ड्रिंक नहीं बेचेंगे तो देश का खर्चा कहाँ से चलाएगी बेचारी  सरकार?" हमारे एक साथी भाई अनूप पाण्डेय जी भारत सरकार से यह जानकारी ली तो चित्र में लिखे पत्र में जवाब मिला उसका हिंदी में अनुवाद इस प्रकार है . *********************************************************************** प्रश्न 1 सरकार द्वारा एक सांसद को कितनी प्रकार की सब्सिडी दी जाती है प्रश्न २ और भारत सरकार इन सब्सिडी पर कितना खर्च करती है उत्तर मिला : यह अस्पष्ट प्रश्न है और RTI एक्ट के अंतर्गत नहीं आता **************************************************************************** प्रश्न 3 क्या यह सत्य है की संसद की कैंटीन में कोक और पेप्सी पर रोक है अगर हां तो क्यों? उत्तर मिला: संसद परिसर में 6 अगस्त 2003 से सभी ब्रांड की कोल्ड ड्रिंक और सॉफ्ट ड्रिंक की पूर्ती और बिक्री पर रोक है, यह निर्णय संसद परिसर में भोज...