“गोमूत्र एक्सपर्ट” कहना अपमान नहीं, प्रशंसा भी हो सकती है!
“गोमूत्र एक्सपर्ट” कहना अपमान नहीं, प्रशंसा भी हो सकती है!
प्रियंका गांधी ने शायद व्यंग्य और नकारात्मक भाव से IIT Madras के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि को “गोमूत्र एक्सपर्ट” कहा।
लेकिन मुझे इसमें अपमान समझ नहीं आता।
यदि कोई वैज्ञानिक हमारी परंपराओं में वर्णित किसी पदार्थ के गुणों को अंधविश्वास मानकर ठुकराने के बजाय वैज्ञानिक कसौटी पर परखने की बात करता है, तो इसमें लज्जा कैसी?
गोमूत्र उपयोगी है या नहीं, उसके कौन-से दावे वैज्ञानिक रूप से सही हैं और कौन-से नहीं—इसका निर्णय भी शोध से ही होना चाहिए, उपहास से नहीं।
इसलिए “गोमूत्र एक्सपर्ट” शब्द यदि सचमुच वैज्ञानिक अध्ययन और ज्ञान के अर्थ में बोला जाए, तो यह गाली नहीं, योग्यता का परिचय है।
मैं तो कहूँगा—जिस दिन पर्याप्त प्रमाणित शोध उनके नाम से हो जाए, वे इसे अपने विजिटिंग कार्ड पर भी गर्व से लिख सकते हैं:
Prof. V. Kamakoti
Director, IIT Madras
…and yes, Gaumutra Expert. 🙂
विज्ञान का काम किसी विषय का मज़ाक उड़ाना नहीं, उसकी जाँच करना है।
वीरेन्द्र सिंह की कीबोर्ड रुपी कलम द्वारा
भ्रमित भारतीयों के भ्रम का भ्रमण
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