सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

मांसाहार: जानवर की लाश में मिलता स्वाद - विरेंद्र सिंह

मांसाहार: जानवर की लाश में मिलता स्वाद - विरेंद्र सिंह  

घर में बांस नहीं गोघृत जलाये

घर में बांस नहीं गोघृत जलाये ******************** शास्त्रो में बांस की लकड़ी को जलाना वर्जित है, किसी भी हवन अथवा पूजन विधि में बांस को नही जलाते हैं। यहां तक कि चिता में भी बांस की लकड़ी का प्रयोग वर्जित है। अर्थी के लिए बांस की लकड़ी का उपयोग होता है लेकिन उसे भी नही जलाते शास्त्रों के अनुसार बांस जलाने से पित्र दोष लगता है क्या इसका कोई वैज्ञानिक कारण है? बांस में लेड व हेवी मेटल प्रचुर मात्रा में होते है लेड जलने पर लेड आक्साइड बनाता है जो कि एक खतरनाक नीरो टॉक्सिक है  हेवी मेटल भी जलने पर ऑक्साइड्स बनाते है लेकिन जिस बांस की लकड़ी को जलाना शास्त्रों में वर्जित है यहां तक कि चिता मे भी नही जला सकते, उस बांस की लकड़ी को हमलोग रोज़ अगरबत्ती में जलाते हैं। अगरबत्ती के जलने से उतपन्न हुई सुगन्ध के प्रसार के लिए फेथलेट नाम के विशिष्ट केमिकल का प्रयोग किया जाता है यह एक फेथलिक एसिड का ईस्टर होता हैयह भी स्वांस के साथ शरीर मे प्रवेश करता है इस प्रकार अगरबत्ती की तथाकथित सुगन्ध न्यूरोटॉक्सिक एवम हेप्टोटोक्सिक को भी श्वास के साथ शरीर मे पहुचाती है इसकी लेश मात्र उप...

गोधूली वाहक एवं आचार्य हेतु आवेदन

गोधूली वाहक / आचार्य हेतु आवेदन ************************************** आवेदन हेतु इस लिंक पर भी जा सकते है  goo.gl/vTBPCP Loading...

प्रकाशौषधि - बच्चो के कफ रोगों में रामबाण घरेलु नुस्खा - मेरी माँ का ज्ञान - विरेंद्र सिंह

बच्चो के कफ रोगों में रामबाण औषधि प्रकाशौषधि बदलते मौसम में सभी कफ रोगों से परेशान होते है विशेषकर बच्चे। अतः उन सबके लिए प्रस्तुत है मेरी माँ की सिखाई हुई एक प्रभावी औषधि।

भोजन हाथ से क्यो?

भोजन हाथ से क्यो? भारतीय भोजन को विदेशी तरीके से खाने के बजाय विदेशी भोजन को भी भारतीय तरीके से खाना चाहिए क्यों? अधिकतर भारतीय अपने हाथों से खाना खाते हैं। लेकिन आजकल हमने पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण करते हुए चम्मच और कांटे से खाना शुरू कर दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपने हाथों से खाना खाने के स्वास्थ्य से संबंधित कई फायदे हैं। यह आपके प्राणाधार की एनर्जी को संतुलित रखता है: आयुर्वेद में कहा गया है की हम सब पांच तत्वों से बने हैं जिन्हें जीवन ऊर्जा भी कहते हैं, और ये पाँचों तत्व हमारे हाथ में मौजूद हैं ( आपका अंगूठा अग्नि का प्रतीक है, तर्जनी अंगुली हवा की प्रतीक है, मध्यमा अंगुली आकाश की प्रतीक है, अनामिका अंगुली पृथ्वी की प्रतीक है और सबसे छोटी अंगुली जल की प्रतीक है)। इनमे से किसी भी एक तत्व का असंतुलन बीमारी का कारण बन सकता है। जब हम हाथ से खाना खाते हैं तो हम अँगुलियों और अंगूठे को मिलाकर खाना खाते हैं और यह जो मुद्रा है यह मुद्रा विज्ञान है, यह मुद्रा का ज्ञान है और इसमें शरीर को निरोग रखने की क्षमता निहित है। इसलिए जब हम खाना खाते हैं तो इन सारे तत्व...

सिन्दूर से दूर क्यों?

सिन्दूर से दूर क्यों? ***************** कितने बुद्धिमान थे हमारे पूर्वज प्राचीन काल में :- महिलाओ के लिए एक नियम बनाया गया की विवाह के बाद नए ससुराल में विभिन्न प्रकार के मानसिक दबाव और उनके कारण होने वाली बीमारियों से दूर रहने के लिए एक औषधि (सिंदूर) अपनी बालो की माँग में लगाना है महिलाये पारिवारिक जिम्मेदारियों और लापरवाही के कारण इस नियम का सही से पालन नहीं करती थी फिर उनको कहा की अगर यह सिन्दूर आप नहीं लगाओगे तो आपका सुहाग संकट में पड़ जायेगा अब महिलाये रोज़ बिना भूले उसे लगाने लगी *********************************** तथाकथित आधुनिक काल में :- आज के युग की महिलाये स्वयं को शिक्षित समझ लेकिन असल में केवल साक्षर होकर टीवी सिनेमा की गुलामी के कारण इस सिन्दूर को गुलामी का प्रतीक समझ कर केवल ओपचारिकता के लिए लगाती है जिसमे लाल रंग के लिए कुछ भी प्रयोग कर एक छोटा सा निशान लगा लेती है और अगर घर में बड़े बूढ़े न हो तो वो भी ज़रूरी नहीं अगर इसी को नारी मुक्ति के नाम पर बढ़ाना है तो मुझे अपने घर में ऐसी नारी मुक्ति तो नहीं चाहिए ********************************* स...

युद्धविराम! प्रदीप दीक्षित अब तो ट्रेडमार्क ले ही लो!

सबकी नजर है अब तुम पर गलत करोगे तो बहिष्कार सहोगे प्रदीप दीक्षित अपना बयान याद रखना गलत करोगे तो पूर्ण बहिष्कार सहोगे राजीव भाई के समर्थकों के बिना इनका business, संस्था कुछ नही। यह अपने बयान से से थोड़े भी हिले और किसी को भी कानून के मार्ग से अन्याय किया डराया तो आपसी बैर भूलकर इनके विरुद्ध ऐसा असहयोग आंदोलन चलाना है कि इनको जीवन भर याद रहे। क्योंकि इनको दान, ग्राहक, कार्यकर्ता सब हमसे ही मिलेगा लेकिन तब जब ये केवल जन्म से नही कर्म और आचरण से सुपात्र हो। क्योंकि अभी यह राजीव भाई की विरासत को संभालने के लिए न तो जन्म से  तो और न ही कर्म से सुपात्र है। इनको राजीव भाई की फ़ोटो लगाकर हमारी आने वाली पीढ़ी की नसो में preservative वाला विष जूस में मिलाकर नही बेचने देंगे। जिन्होंने इनका साथ अज्ञानता, मूर्खता या लालच वश दिया वो सब भी ध्यान रखना की तुमको सबसे ज़्यादा जूते तुम्हे मैं मारूंगा, इस देशद्रोह के लिए। तुम्हे तो इनका सामान बेचने या पार्टी में कोई पद मिल जाएगा लेकिन राजीव भाई के असली हत्यारे तुम ही कहलाओगे। और तुम में हिम्मत है तो इनके ज़हर मिले जूस बंद करवा कर द...