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तिथि देवो भवः The Tale of Two Calendars

 तिथि देवो भवः  उद्देश्य : विदेशी कैलेंडर को अपने व्यक्तिगत जीवन से निकालकर भारतीय पंचांग के अनुसार अपने जीवन को बिताना और इस लेख को अपने जीवन में इस प्रण के साथ अपनाना की आज से अपने परिवार में कोई भी जन्मदिन आदि पर्व विदेशी कैलेंडर के अनुसार नहीं मानूँगा क्योंकि इसका वैज्ञानिक आधार है *************************************************** आजादी के बाद हमने परतंत्रता के बहुत से चिह्न हटाए, सड़कों के नामों का भारतीयकरण किया, पर संवत् और राष्ट्रीय कैलेंडर के विषय में हम सुविधावादी हो गए जहाँ एक और नेपाल जैसा देश का सरकारी कैलेंडर नेपाल संवत है वहां हमने कालगणना के लिए दुनिया के साथ चलने के नाम पर अपने राष्ट्रीय गौरव से समझौता कर लिया और सरकारी कामकाज के लिए अवैज्ञानिक ग्रेगरियन कैलेंडर को 1957 में सरकारी कैलेंडर की मान्यता दे दी यह एक शर्म की बात है राष्ट्रीय गौरव के लिए ************************************************** इस अभियान से जुड़े कुछ प्रश्न प्रश्न : तिथि देवो भवः अभियान क्यों आवश्यक लगा? बड़े दुःख के साथ यह बात मन में आई की जो व्यक्ति स्वदेशी के लिए भारतीयता के लिए अपना जी...

दान नहीं, दानी का हृदय देखिये - केन्या

 केन्या के पास मेडिकल ऑक्सीजन नही थी, रेमेडेसिविर इंजेक्शन नही थे ... अनाज था ... उसने अनाज ही भेज दिया । वजह सिर्फ ये थे कि इस मुश्किल घड़ी में वो भारत के साथ खड़ा रहना चाहता था... ऑक्सीजन नही तो अनाज ही सही । कल को जब इतिहास लिखा जायेगा तो कोई ये तो नही कह सकेगा कि जब दुनिया में आपदा आयी थी तो केन्या ने कुछ नही किया था । ये कहानी है एक छोटे से, जनजातीय आदिवासियों से भरे देश केन्या की । वहीं एक कहानी और भी है ...कुछ पढ़े लिखे विभिन्न प्रकार के  लोगों की जो हमारे ही देश के है ...इन लोगो के पास ऑक्सीजन भी थी और इंजेक्शन भी लेकिन इन्होंने सब छुपा कर रखे ताकि इनकी कालाबाजारी कर सकें । आज यही लोग केन्या और भारत दोनों का मजाक बना रहे है ... प्रेमचंद एक कहानी में कहते है ... 'वेश्याओं को चरित्रवान स्त्री सुहाई है कभी ! 'केन्या द्वारा भेजे गए 12 टन अनाज पर बहुत से लोग मज़ाक उड़ा रहे है। सोशल मीडिया पर केन्या को "भिखारी, भिखमंगा, गरीब" आदि आदि कहा जा रहा है। अब एक छोटा सा वाक़या सुनिए।  आपने अमरीका का नाम सुना होगा, मैनहैटन का भी, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का भी और ओसामा बिन लादेन का भी। ...

IMA? मतलब, पैसे के लिए कुछ भी! कीटाणु मारने वाले बल्ब, पेंट के बाद अब भविष्य में IMA किसको बढ़ावा देगा?

  IMA? मतलब, पैसे के लिए कुछ भी! जिनके घर खुद शीशे के होते है वो दूसरो पर पत्थर नहीं मारा करते? IMA से कोई पूछे कि कल को वायरस मारने वाला पेंट बना देगा तो उसको भी बढ़ावा देंगे क्या? कीटाणु मारने वाले बल्ब, पेंट के बाद अब भविष्य में आईएमए किसको बढ़ावा देगा? After Anti-Bacterial Bulb and Paint, We wonder what IMA would recommend Next? पेप्सी कंपनी की Tropicana नाम से डिब्बाबंद जूस बेचने की कंपनी के प्रोडक्ट को recommend करने के लिए IMA को 50 लाख रूपए मिले और Eureka Forbes के लिए इनको 3 करोड़ रूपए मिले! अब कुछ लोग कहेंगे की इसमें क्या बुराई है? बात बुराई और अच्छा की नहीं है बात है कि क्या इनको स्वास्थ्य की दृष्टि से डिब्बाबंद जूस जिसमे केमिकल preservative डाले जाते है उस पर अपना ठप्पा लगाने का क्या अधिकार है, ऐसे तो कल को डोमिनो और पिज़्ज़ा हट के टॉपिंग के रूप डाली गई हुई सब्ज़ी वले पिज़्ज़ा या बर्गर को भी पैसे के बदले खाने की सलाह देने का ठप्पा लगवा देगा IMA! और इनको आयुर्वेद की कमियां निकालने से फुर्सत नहीं किसी प्रकार के विज्ञापन से सम्बन्धी इनके नियम में खुद पढ़ लीजिये और सोचिये की इनको आय...

समाधान पूछने वालो पहले समस्या को तो समझ लो! जानिये क्यों आर्थिक रूप से तोड़ने पर तुली है सरकार?

  समाधान पूछने वालो पहले समस्या को तो समझ लो! जानिये क्यों आर्थिक रूप से तोड़ने पर तुली है सरकार? समाधान पूछने वालो पहले समस्या को तो समझ लो! जानिये क्यों आर्थिक रूप से तोड़ने पर तुली है सरकार? क्या हासिल होगा सरकार को? किस कानून के वजह से आप की आज कोई सुनवाई नहीं हो रही? क्यों कोई भी विरोधी पार्टी या राज्य सरकार झोरोना काल में केंद्र सरकार का चाहकर भी विरोध नहीं कर सकती ? क्यों सरकार को उस कानून के कारण इतनी असीमित शक्ति मिल गई? क्यों मीडिया चाहकर भी अपनी और से इनकी सच्चाई नहीं बता सकता? ऐसे कई और प्रश्नो के प्रमाण सहित उत्तर है इस वीडियो में! कई दिनों का शोध और मेहनत लगी है अतः पूरा वीडियो देखकर ही कोई टिपण्णी करें अन्यथा कोई ज़बरदस्ती नहीं है आप इसे डिलीट कर कुछ और देखने को स्वतंत्र है इस वीडियो को आप मेरे टेलीग्राम चैनल से डाउनलोड कर सकते है https://telegram.me/virendersingh16 ************************** Document links : AEFI Guidlines: https://bit.ly/3p6lgFp Landmark Agreement Geneva: https://bit.ly/34rqXo7 Disaster Management Act 2005: https://bit.ly/2R5z...

तंज़ानिया: बुलडोज़र कहे जाने वाले एक राष्ट्रपति का निधन, कोरोना को कहते थे षड्यंत्र

  तंज़ानिया: बुलडोज़र कहे जाने वाले एक राष्ट्रपति की मौत, कोरोना को कहते थे दैत्य पपीता और बकरी के सैंपल कोरोना पॉजिटिव आने के बाद मागुफुली ने पिछले साल जून में ही तंज़ानिया को 'कोरोना-मुक्त' घोषित कर दिया था. तंज़ानिया के राष्ट्रपति के निधन पर श्रद्धांजलि इस बहादुर व्यक्ति ने कोरोना के विषय पर मोदी से लाख गुना अच्छा काम किया और अपने देश को फार्मा की गुलामी में नहीं फंसने दिया अब षड्यंत्र यह हुआ है कि इनकी मृत्यु को कोरोना मृत्यु घोषित करने की कोशिश शुरू हो गई है सरकारी टेलीविज़न पर एक संबोधन में हसन ने कहा कि 'बुधवार को हृदय संबंधी जटिलताओं से मागुफुली का निधन हो गया.' मागुफुली अफ़्रीका के उन प्रतिष्ठित लोगों में शामिल थे, जिन्होंने कोरोना वायरस के ख़तरे को हमेशा संशयपूर्ण ढंग से देखा. उन्होंने इस वायरस का मुक़ाबला करने के लिए लोगों से धार्मिक स्थलों में प्रार्थना करने को कहा. साथ ही भाप-चिकित्सा से इस संक्रमण को ठीक करने की बात कही. तब प्रधानमंत्री ने मागुफुली के स्वास्थ्य से जुड़ी अफ़वाहों को विदेश में रह रहे लोगों का 'द्वेषपूर्ण' प्रचार बताया था. मागुफुली का ...

मनुष्य बाहरी मकान तॊ बना लेता हैं मगर उसकी चेतना का घर खण्डहर ही रहता हैं

  बीते हफ़्ता, दो मित्रों ने अपना नया मकान देखने बुलाया। एक को 11 साल लगे.. मकान बनवाने में , दूसरे को 9 साल। इस एक दशक के समय में उन मित्रों ने बस एक ही काम किया ..वह यह कि - 'मकान बनवाया' ! ...औऱ उससे पहले 20 साल तक जो काम किया वो यह कि 'मकान बनवाने" लायक पैसा जुटाया। यानि, जीवन के बेशक़ीमती 30 साल सिर्फ़ 'अपना मकान बनवा लूं' इस फितूर में निकाल दिए। मेरी, मकान, इंटीरियर , एलिवेशन , लक धक साज-सज्जा जैसी चीज़ों में बिल्कुल भी रूचि नही है ..बल्कि साफ़ कहूं ..तॊ अरुचि ही है। ..वे मित्र , उच्चता के घमंड से विकृत हुए ..एक-एक कमरे , गैलरी, गार्डन , आर्किटेक्ट की बारीकियां , उनके निर्माण में लगी सामग्री , ख़र्च हुआ पैसा ..आदि विवरण दे रहे थे । इधर मैं भी सौजन्यतावश "हूं , हां " अच्छा ", वाह , ग़ज़ब " जैसी प्रतिक्रियाएं देकर उनके अभिमान को पुष्ट किए दे रहा था ! जबकि हक़ीक़त यह थी कि मैंने शायद ही किसी चीज़ को गौर से देखा हो !! बचपन से ही मुझे मकान , गाड़ी , कपड़े जैसी बातों में न्यूनतम रूचि रही है । उनकी रनिंग कॉमेंट्री रुकने का नाम नहीं ले रही थ...

टीको से हुई मृत्यु की अखबार में छपी खबरे / Death from Vaccines in News