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तीन स्तरीय है कुंडली मिलान का विज्ञान!

  कुंडली मिलान का भी विज्ञान है विवाह से पूर्व वर कन्या और उनके परिजन एक दूसरे की प्रकृति गुण दोष शादी के बारे में प्रायः अनभिज्ञ रहते हैं। अक्सर देखा गया है कि दोनों पक्ष अपने दोषों को छुपाते हैं और गुणों को बढ़ा चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं।  इससे विवाह में कुछ समय बाद ही पति-पत्नी के संबंधों में तनाव आरंभ हो जाता है। ऐसे में वर-वधू का जीवन सुखी बना रहे, इसके लिए विवाह से पूर्व जन्मपत्री का मिलान जरूरी है। कुंडली मिलान के अंतर्गत भावी वर-वधू की कुंडली का अध्ययन करके पूर्वानुमान लगाया जाता है कि विवाह के बाद उनके जीवन में परस्पर सामंजस्य होगा या नहीं। *कुंडली मिलाई फिर बेटी दुखी क्यों?* अक्सर देखने में आता है कि जन्म कुंडलियों का मिलान करते समय केवल दो ही बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है - पहला, लड़का लड़की मांगलिक तो नहीं औऱ दूसरा, गुण कितने मिल रहे हैं । लेकिन सुखमय जीवन के लिए संपूर्ण मिलान तीन स्तरों पर किया जाता है।  - नक्षत्रो के आधार पर - ग्रहों के आधार पर  - कुंडली में बनने वाले शुभाशुभ योगों के आधार पर नक्षत्र।  1) नक्षत्रों के आधार पर मिलान करते समय अष्टक...

कहा था कि A2 शब्द के प्रयोग से बचो!

  और बेचो a2 दूध ! अब भैंस का भी a2 प्रोटीन युक्त दूध आ गया 2015 में जो मैंने A2 दूध के नाम के षड्यंत्र की बात कही थी वह सत्य हो ही गयी! ****** गोमाता के दूध को A2 कहना भी एक षड्यंत्र है कल बहुत चिंतन के बाद और राजीव भाई के मार्गदर्शन के बाद यह तथ्य सामने आया है की भारतीय गाय के दूध को A2 दूध कहकर संबोधित करने का षड्यंत्र एक बहुत सोची समझी रणनीति के अंतर्गत हो रहा है कैसे ? A1 और A2 एक Gene है जिसमे A1 जीन विदेशी गाय और A2 जीन भारतीय गाय में पाया जाता है अब कल को इस जीन को Genetic Engineering के द्वारा विदेशी गाय में डाल कर उसके दूध को भी A2 घोषित कर किसी विदेशी लैब द्वारा प्रमाणित कर दिया जाये तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तो चांदी हो जाएगी और फिर लोग कोका कोला और पेप्सी की कोल्ड ड्रिंक नहीं A2 दूध पीने के लिए लाइन लगाकर खड़े हो जायेंगे और यह पढ़े लिखे अशिक्षित लोग उसी का गुणगान करेंगे क्योंकि इन कंपनियों को यह नज़र आ गया है की ज़हरीले पेय पदार्थ अधिक वर्षो तक नहीं कल पाएंगे क्योंकि लोग जागरूक हो ही जायेंगे इनके विरुद्ध अतः सभी से निवेदन है की भारतीय गोमाता के दूध को "गोदुग्ध" कहक...

क्यों भारत में सेवा करने वाले ब्रिटिश अधिकारियों को इंग्लैंड लौटने पर सार्वजनिक पद/जिम्मेदारी नहीं दी जाती थी?

 गुलामी का आलम आज भी वही है कुछ नही बदला!  गुलामी का आलम आज भी वही है कुछ नही बदला! भारत में सेवा करने वाले ब्रिटिश अधिकारियों को इंग्लैंड लौटने पर सार्वजनिक पद/जिम्मेदारी नहीं दी जाती थी। तर्क यह था कि उन्होंने एक गुलाम राष्ट्र पर शासन किया है जिसकी वजह से उनके दृष्टिकोण और व्यवहार में फर्क आ गया होगा। अगर उनको यहां ऐसी जिम्मेदारी दी जाए, तो वह आजाद ब्रिटिश नागरिकों के साथ भी उसी तरह से ही व्यवहार करेंगे। इस बात को समझने के लिए नीचे दिया गया वाकया जरूर पढ़े - एक ब्रिटिश महिला जिसका पति ब्रिटिश शासन के दौरान पाकिस्तान और भारत में एक सिविल सेवा अधिकारी था। महिला ने अपने जीवन के कई साल भारत के विभिन्न हिस्सों में बिताए, अपनी वापसी पर उन्होंने अपने संस्मरणों पर आधारित एक सुंदर पुस्तक लिखी। महिला ने लिखा कि जब मेरे पति एक जिले के डिप्टी कमिश्नर थे तो मेरा बेटा करीब चार साल का था और मेरी बेटी एक साल की थी। डिप्टी कलेक्टर को मिलने वाली कई एकड़ में बनी एक हवेली में रहते थे। सैकड़ों लोग डीसी के घर और परिवार की सेवा में लगे रहते थे। हर दिन पार्टियां होती थीं, जिले के बड़े जमींदार हमें ...

लीगल नोटिस मिलते ही यूट्यूब ने गलती मान माफ़ी के साथ चैनल वापस किया।

  लीगल नोटिस मिलते ही यूट्यूब ने गलती मान कर माफी मांगते हुए  चैनल वापस किया। वैक्सीन माफिया को करारा झटका। इंडियन बार एसोसिएशन और अव्हेकन इंडिया मूवमेंट की एक और जीत। यूट्यूब पर दायर होगा  1000  करोड रुपए के जुर्माने का केस। दुनिया भर के शोधकर्ताओं को राहत।  नई दिल्ली:  वैक्सीन माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया द्वारा वैक्सीन के खिलाफ का कोई भी वीडियो या जानकारी मिटाने का और यूट्यूब चैनल डिलीट करने का काम कोरोना महामारी के शुरू से ही चल रहा था । इस वजह से कोरोना वैक्सीन का फ्रॉड और दुष्परिणाम उजागर करने वाले शोधकर्ता ,  सामाजिक कार्यकर्ता ,   डॉक्टर ,   वैज्ञानिकों आदि   के  वीडियो को यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया द्वारा आम आदमी तक पहुंचाने नहीं दिया जा रहा था उसी अन्याय का शिकार बने  राजीव दीक्षित  अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता ,  वीरेंद्र सिंह ने इस फ्रॉड के खिलाफ लड़ने का निर्णय लिया और उन्होंने  इंडियन बार एसोसिएशन  के राष्ट्रीय अध्यक्ष  अँड.  निलेश ओझा के वकील अँ...

एक पिता का करवाचौथ पर बेटी को पत्र

  एक पिता का करवाचौथ पर बेटी को पत्र - प्रिय पुत्री आर्शीवाद   तू ससुराल में ख़ुश होगी । सारा समाज करवाचौथ का त्यौहार मनाने जा रहा है और सभी सुहागन स्त्रीयाँ आपने पति की लम्बी आयु के लिए व्रत रखेंगी।  तेरी शादी के बाद यह पहला करवाचौथ है और शायद तू भी अन्य स्त्रियों की तरह व्रत रखे।  मेरे मन में इस विष्य पर कुछ विचार आये सो तुम्हें पत्र लिख रहा हूँ ।                        बेटी अगर तू भी ऐसा समझती है कि केवल व्रत रखने से पति की उम्र लम्बी होगी तो उस व्रत में यदि नीचे लिखे मेरी बातों के पालन का व्रत भी सम्मिलित करेगी तो सच मे पति के साथ पूरे परिवार की आयु बढ़े या न बढ़े परंतु सबके जीवन मे सुख अवश्य बढ़ेगा। अगर तुम सच में अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती हो तो ईश्वर से इसकी प्रार्थना  करना तथा अपने लिए ईश्वर से माँगना  कि ईशवर तुम्हारी बुद्धि को हमेशा नेक, सत्य, धर्म व पवित्रता के मार्ग पर चलाए, तेरा मन कभी चंचलता में भटक न जाए । अपने पति से हृदय से प्रीति करना । अगर उसकी लम्बी उम्र चाहती हो तो ...

तिथि देवो भवः The Tale of Two Calendars

 तिथि देवो भवः  उद्देश्य : विदेशी कैलेंडर को अपने व्यक्तिगत जीवन से निकालकर भारतीय पंचांग के अनुसार अपने जीवन को बिताना और इस लेख को अपने जीवन में इस प्रण के साथ अपनाना की आज से अपने परिवार में कोई भी जन्मदिन आदि पर्व विदेशी कैलेंडर के अनुसार नहीं मानूँगा क्योंकि इसका वैज्ञानिक आधार है *************************************************** आजादी के बाद हमने परतंत्रता के बहुत से चिह्न हटाए, सड़कों के नामों का भारतीयकरण किया, पर संवत् और राष्ट्रीय कैलेंडर के विषय में हम सुविधावादी हो गए जहाँ एक और नेपाल जैसा देश का सरकारी कैलेंडर नेपाल संवत है वहां हमने कालगणना के लिए दुनिया के साथ चलने के नाम पर अपने राष्ट्रीय गौरव से समझौता कर लिया और सरकारी कामकाज के लिए अवैज्ञानिक ग्रेगरियन कैलेंडर को 1957 में सरकारी कैलेंडर की मान्यता दे दी यह एक शर्म की बात है राष्ट्रीय गौरव के लिए ************************************************** इस अभियान से जुड़े कुछ प्रश्न प्रश्न : तिथि देवो भवः अभियान क्यों आवश्यक लगा? बड़े दुःख के साथ यह बात मन में आई की जो व्यक्ति स्वदेशी के लिए भारतीयता के लिए अपना जी...

दान नहीं, दानी का हृदय देखिये - केन्या

 केन्या के पास मेडिकल ऑक्सीजन नही थी, रेमेडेसिविर इंजेक्शन नही थे ... अनाज था ... उसने अनाज ही भेज दिया । वजह सिर्फ ये थे कि इस मुश्किल घड़ी में वो भारत के साथ खड़ा रहना चाहता था... ऑक्सीजन नही तो अनाज ही सही । कल को जब इतिहास लिखा जायेगा तो कोई ये तो नही कह सकेगा कि जब दुनिया में आपदा आयी थी तो केन्या ने कुछ नही किया था । ये कहानी है एक छोटे से, जनजातीय आदिवासियों से भरे देश केन्या की । वहीं एक कहानी और भी है ...कुछ पढ़े लिखे विभिन्न प्रकार के  लोगों की जो हमारे ही देश के है ...इन लोगो के पास ऑक्सीजन भी थी और इंजेक्शन भी लेकिन इन्होंने सब छुपा कर रखे ताकि इनकी कालाबाजारी कर सकें । आज यही लोग केन्या और भारत दोनों का मजाक बना रहे है ... प्रेमचंद एक कहानी में कहते है ... 'वेश्याओं को चरित्रवान स्त्री सुहाई है कभी ! 'केन्या द्वारा भेजे गए 12 टन अनाज पर बहुत से लोग मज़ाक उड़ा रहे है। सोशल मीडिया पर केन्या को "भिखारी, भिखमंगा, गरीब" आदि आदि कहा जा रहा है। अब एक छोटा सा वाक़या सुनिए।  आपने अमरीका का नाम सुना होगा, मैनहैटन का भी, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का भी और ओसामा बिन लादेन का भी। ...