कुंडली मिलान का भी विज्ञान है विवाह से पूर्व वर कन्या और उनके परिजन एक दूसरे की प्रकृति गुण दोष शादी के बारे में प्रायः अनभिज्ञ रहते हैं। अक्सर देखा गया है कि दोनों पक्ष अपने दोषों को छुपाते हैं और गुणों को बढ़ा चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं। इससे विवाह में कुछ समय बाद ही पति-पत्नी के संबंधों में तनाव आरंभ हो जाता है। ऐसे में वर-वधू का जीवन सुखी बना रहे, इसके लिए विवाह से पूर्व जन्मपत्री का मिलान जरूरी है। कुंडली मिलान के अंतर्गत भावी वर-वधू की कुंडली का अध्ययन करके पूर्वानुमान लगाया जाता है कि विवाह के बाद उनके जीवन में परस्पर सामंजस्य होगा या नहीं। *कुंडली मिलाई फिर बेटी दुखी क्यों?* अक्सर देखने में आता है कि जन्म कुंडलियों का मिलान करते समय केवल दो ही बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है - पहला, लड़का लड़की मांगलिक तो नहीं औऱ दूसरा, गुण कितने मिल रहे हैं । लेकिन सुखमय जीवन के लिए संपूर्ण मिलान तीन स्तरों पर किया जाता है। - नक्षत्रो के आधार पर - ग्रहों के आधार पर - कुंडली में बनने वाले शुभाशुभ योगों के आधार पर नक्षत्र। 1) नक्षत्रों के आधार पर मिलान करते समय अष्टक...
आने वाली पीढ़ियों को समर्पित