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(भाग - 2) मांसाहार: कुतर्क एवं भ्रम

(भाग - 2) मांसाहार: कुतर्क एवं भ्रम
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कुतर्क 2)

क्या आप भोजन मुहैया करा सकते थे वहाँ जहाँ एस्किमोज़ रहते हैं (आर्कटिक में) और आजकल अगर आप ऐसा करेंगे भी तो क्या यह खर्चीला नहीं होगा?

खण्ड़न-

अगर एस्किमोज़ मांसाहार बिना नहीं रह सकते तो क्या आप भी शाकाहार उपलब्ध होते हुए एस्किमोज़ का बहाना आगे कर मांसाहार चालू रखेंगे? खूब!!

एस्किमोज़ तो वस्त्र के स्थान पर चमड़ा पहते है, आप क्यों नही सदैव उनका वेश धारण किए रहते?

अल्लाह नें आर्कटिक में मनुष्य पैदा ही नहीं किये थे,जो उनके लिये वहां पेड-पौधे भी पैदा करते, लोग पलायन कर पहुँच जाय तो क्या कीजियेगा।

ईश्वर नें बंजर रेगीस्तान में भी इन्सान पैदा नहीं किए।

फ़िर भी स्वार्थी मनुष्य वहाँ भी पहुँच ही गया।

यह तो कोई बात नहीं हुई कि दुर्गम क्षेत्र में रहने वालों को शाकाहार उपलब्ध नहीं, इसलिए सभी को उन्ही की आहार शैली अपना लेनी चाहिए।

 आपका यह एस्किमोज़ की आहारवृत्ति का बहाना निर्थक है।

जिन देशों में शाकाहार उपलब्ध न था, वहां मांसाहार क्षेत्र वातावरण की अपेक्षा से मज़बूरन होगा और इसीलिए उसी वातावरण के संदेशकों-उपदेशकों नें मांसाहार पर उपेक्षा का रूख अपनाया होगा।

 लेकिन यदि उपलब्ध हो तो, सभ्य व सुधरे लोगों की पहली पसंद शाकाहार ही होता है।

जहां सात्विक पौष्ठिक शाकाहार प्रचूरता से उपलब्ध है वहां जीवों को करूणा दान या अभयदान दे देना चाहिए।

सजीव और निर्जीव एक गहन विषय है।

जीवन वनस्पतियों आदि में भी है, लेकिन प्राण बचाने को संघर्षरत पशुओं को मात्र स्वाद के लिये मार खाना तो क्रूरता की पराकाष्ठा है।

आप लोग दबी जुबां से कहते भी हो कि "मुसलमान, शाकाहारी होकर भी एक अच्छा मुसलमान हो सकता है" फ़िर मांसाहार की इतनी ज़िद्द ही क्यों?,

 और एक 'अच्छा मुसलमान' बनने से भला इतना परहेज भी क्यों ?

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जानकारी हेतु :

सलीम खान ने कभी अपने ब्लॉग पर यह '14 बिन्दु' मांसाहार के पक्ष में प्रस्तुत किये थे।

असल में यह सभी कुतर्क ज़ाकिर नाईक के है, जो यहां वहां प्रचार माध्यमों से फैलाए जाते है।

वैसे तो इन फालतू कुतर्को पर प्रतिक्रिया टाली भी जा सकती थी, किन्तु इन्टरनेट जानकारियों का स्थायी स्रोत है यहाँ ऐसे भ्रामक कुतर्क अपना भ्रमजाल फैलाएँगे तो लोगों में संशय और भ्रम स्थापित होंगे।

ये कुतर्क यदि निरूत्तर रहे तो भ्रम, सच की तरह रूढ़ हो जाएंगे, इसलिए जालस्थानों में इन कुतर्कों का यथार्थ और तथ्ययुक्त खण्ड़न उपलब्ध होना नितांत ही आवश्यक है।

टिप्पणियाँ

  1. गोधूलि परिवार से जुड़ना चाहती हूँ, परन्तु कैसे जुड़ सकते हैं, मार्गदर्शन करें।

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