जब लूटने वाले पूर्ण सक्रिय है तो बचाने वाले शांत क्यों बैठे?

जब लूटने वाले पूर्ण सक्रिय है तो बचाने वाले शांत क्यों बैठे?
अभी तो बहुत काम बाकी है





(एक छोटी सी घटना जो मेरे साथ हुई)

मेरे पिता सेना से सेवानिवृत्त है और उन्हें सेना की कैंटीन से सस्ता सामान जो ज़्यादातर विदेशी होता है वो बाज़ार से काफी कम दाम पर मिल जाता है लेकिन उसका फायदा राजीव भाई को सुनने के बाद कम ही ले पाते है
मेरे पिता अपने स्वभाव के कारण सभी की मदद को तैयार रहते है

मेरे घर के पास आर्थिक रूप से परेशान एक नल आदि ठीक करने वाला plumber सूरज रहता है जो हमें भी अपनी सेवा देता रहता है

उसने पिता जी से निवेदन किया की मुझे कैंटीन से कुछ सामान मंगवाना है
पिताजी ने कहा की जब वहां का चक्कर लगेगा तो ले आऊंगा,

मेरे पिता का खुद का सामान कम होता है और दूसरो का अधिक

वो सामान ले आये और घर पर कोने में रख दिया

मुझे इस बात का पता नहीं था तो मैंने पुछा की यह सामान किसका है तो उन्होंने कहा की प्लम्बर का है
क्योंकि उस सामान में Horlicks, Johnson Baby Soap, Maggi, ketchup जैसी वस्तुए थी जो हमारे घर में प्रयोग नहीं होते थे

लगभग रूपए 1500-2000 का सामान था

15-20 दिन हो गए वो प्लम्बर सामान लेने नहीं आया

आखिरकार एक दिन सूरज सामान लेने आया तो मैं घर पर था मैंने उस से पुछा की भाई इतने दिन कहाँ रहे?
वो बोला की पैसे का इंतज़ाम कर रहा था और दिनों से थोडा ज्यादा काम करके मुश्किल से पैसे जुटा पाया हूँ

मैंने पुछा की ये सामान क्यों मंगवाया है तो उसने कहा की मेरा बेटा कमज़ोर है और बीमार रहता है तो TV में देखा की इस से बच्चे में ताकत आती है और बाकि सभी चीजों के बारे में ऐसा ही कुछ बताया

मुझे आश्चर्य हुआ की यह व्यक्ति इतनी मेहनत करके जो पैसा कम कर लाया उसे इस बेकार के सामान पर खर्च कर रहा है

मैंने आधे घंटे उसे समझाया की यह पैसा उसका व्यर्थ जा रहा है और शायद उसे बात समझ आ गयी और उसने पुछा की फिर मैं क्या करू?

तो मैंने उसे बहुत से घर के सस्ते विकल्प बताये वो चला गया और उसका बच्चा पहले से ठीक है

लेकिन मेरे दिमाग में यह बात घुमती रहती है और लगता है की ऐसे कितने ही सूरज है जो अपनी दिन रात की
कमाई से अपने बच्चो को यह सब खिला कर और बीमार करने की तय्यारी कर रहे है

फिर लगता है की अभी तो बहुत काम बाकी है
जब लूटने वाले पूर्ण सक्रिय है तो बचाने वाले शांत क्यों बैठे?

वन्दे मातरम

वीरेंद्र

गोधूली परिवार
 VirenderSingh.in
 GauDhuli.com
 *********

Comments

  1. बहुत अच्छी baat aap ki

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  2. Sir, dusre vikalp kke upar bhi hamko bataye.

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  3. Pranam guruji, aap dusare rajiv bhai hai mene jitna rajiv bhai ko suna hai usse kai jyada aapko suna hai or usase mere jivanme kafi badlav aaya hai or ab me police ki job ke saath ghar pe desi gaumata bhi hai
    Or mai aapko vachan deta hu ki harroj ksi na kisi vyaktiko jagrut karne ka prayas karta rahunga 🙏 aabhaar

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  4. Bahut accha bhaiualya ji

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  5. Sahi baat hai maine bhi aisa hi dekha hai log apni mehnat.ka pisa kharab kar rahe hai

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  6. हरि ॐ 🙏🏼💐
    अति उत्तम वीरेन्द्र भाई 🙏🏼💐

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  7. सही बात है विज्ञापन देख कर जाने अनजाने लोग गलत चीजें खा और खिला रहे हैं जिसके दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं
    लेकिन बेवकूफी की भी हद होती है
    सचिन तेंदुलकर जिसकी खुद की लम्बाई नहीं है वो लम्बाई बढाने की विज्ञापन देता है और बेवकूफ़ लोग खरीद भी लेते हैं थोडा भी अपनी बुद्धि का प्रयोग नहीं करते

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  8. मैं एक कट्टर हिंदू हूं और सभी विदेशी कंपनियों का पूर्ण रूप से बहिष्कार करता हूं क्योंकि विदेशी कंपनियों का मकसद केवल भारत को आर्थिक रुप से कमजोर करना तथा भारत की संस्कृति को खत्म करना है इसलिए भारत की संस्कृति को अपनाएं और खुद को मजबूत बनाएं तथा देश को समृद्ध बनाएं। जय हिंद जय भारत 🙏

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  9. 🙏🏻🙏🏻👏🏻

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  10. बहुत खुब बिल्कुल सही

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