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त्रिफला कल्प | Trifala Kalp : जानिए 12 वर्ष तक लगातार असली त्रिफला खाने के लाभ! |

आयुर्वेद • त्रिफला • 12 वर्ष का कल्प

त्रिफला कल्प

जानिए 12 वर्ष तक लगातार असली त्रिफला लेने की पारंपरिक विधि

त्रिफला केवल कभी-कभार पेट साफ करने वाला चूर्ण नहीं माना गया। आयुर्वेद में इसे रसायन के रूप में भी स्थान मिला है। यहाँ त्रिफला का सही अनुपात, आयु के अनुसार मात्रा, ऋतु के अनुसार अनुपान, 12 वर्ष के कल्प और इसके अन्य पारंपरिक प्रयोगों को सरल और व्यवस्थित रूप में रखा गया है।

हरड़ बहेड़ा आँवला घी शक्कर संग खाए
हाथी दाबे कांख में और चार कोस ले जाए
1 कोस लगभग 3–4 किलोमीटर

त्रिफला आखिर है क्या?

आयुर्वेद के अनुसार हरड़, बहेड़ा और आँवला—इन तीन फलों के मिश्रण को त्रिफला कहा जाता है।

परंपरागत आयुर्वेदिक दृष्टि में इसे वात, पित्त और कफ के संतुलन से जोड़कर देखा गया है। पुराने वर्णनों में त्रिफला को दीर्घकालीन पोषण और कायाकल्प से भी जोड़ा गया है।

त्रिफला किस अनुपात में बनता है?

अभयैका प्रदातव्या द्वावेव तु बीभीतकौ।
धात्रीफलानि चत्वारि प्रकीर्तिता।।

इस अनुपात को याद रखने के लिए मेरा सरल सूत्र:

याद रखने का Formula
A : B : H (Alphabetic order में)
3 : 2 : 1 (Reverse order में)
अर्थात Amla : Baheda : Harad = 3 : 2 : 1। सभी फल बीजरहित लिए जाते हैं और हरड़ बड़ी वाली रखने की बात मूल लेख में कही गई है।

त्रिफला कल्प के मूल नियम

त्रिफला सुबह शौच आदि से निवृत्त होकर, हाथ-मुँह धोने और कुल्ला करने के बाद खाली पेट ताजे पानी के साथ लिया जाता है।

इसके बाद लगभग डेढ़ घंटे यानी 90 मिनट तक पानी के अतिरिक्त कुछ न लेने का नियम है।

पूर्ण त्रिफला कल्प की अवधि 12 वर्ष बताई गई है।

नियमितता पर अत्यधिक जोर है। यदि एक दिन भी सेवन छूट जाए तो कल्प की अवधि पुनः प्रारम्भ करनी होगी ।
आज का त्रिफला अनुपान
वर्तमान ऋतु वर्षा ऋतु
भारतीय मास श्रावण • भाद्रपद
आज का अनुपान सेंधा नमक
अगला अनुपान: देशी खांड / शुद्ध मिश्री
परिवर्तन: 27 September 2026
27 September 2026 तक

अपनी आयु के अनुसार त्रिफला की मात्रा जानें

जितनी आयु, उतनी रत्ती • 1 रत्ती = 0.12 ग्राम

⚠ अधिकतम मात्रा — विशेष ध्यान दें Calculator द्वारा निकाली गई मात्रा अधिकतम सीमा है। किसी भी परिस्थिति में इससे अधिक त्रिफला नहीं लेना है।

शरीर की अवस्था और आवश्यकता के अनुसार मात्रा इससे कम की जा सकती है, लेकिन आयु अनुसार दी गई अधिकतम मात्रा से ऊपर नहीं जाना है।

मात्रा का निर्धारण

मूल नियम है: जितनी आयु, उतनी रत्ती त्रिफला।

एक रत्ती को लगभग 0.12 ग्राम मानते हुए यदि आयु 50 वर्ष है तो:

50 × 0.12 = 6 ग्राम त्रिफला

मात्रा अनुमान से नहीं, मापकर लेने पर जोर दिया गया है।

शरीर पर प्रभाव के अनुसार मात्रा कम की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर लगभग 25% तक कम करने का भी उल्लेख है।

लेकिन आयु के अनुसार निकली मात्रा अधिकतम सीमा है—उससे ऊपर नहीं जाना है।

ऋतु के अनुसार अनुपान

भारतीय मास • अनुपान • मात्रा • Gregorian तारीख

अभी
वसंत ऋतु
4 Mar–1 May 2026
चैत्र • वैशाख
अनुपान
शहद
इतना शहद कि त्रिफला और शहद का अवलेह / पेस्ट बन जाए।
अभी
ग्रीष्म ऋतु
2 May–29 Jul 2026
ज्येष्ठ • आषाढ़
अनुपान
गुड़
त्रिफला की मात्रा का 1/6 भाग
अभी
वर्षा ऋतु
30 Jul–26 Sep 2026
श्रावण • भाद्रपद
अनुपान
सेंधा नमक
त्रिफला की मात्रा का 1/6 भाग
अभी
शरद ऋतु
27 Sep–24 Nov 2026
अश्विन • कार्तिक
अनुपान
देशी खांड / शुद्ध मिश्री
त्रिफला की मात्रा का 1/6 भाग
अभी
हेमंत ऋतु
25 Nov 2026–22 Jan 2027
मार्गशीर्ष • पौष
अनुपान
सौंठ चूर्ण
त्रिफला की मात्रा का 1/6 भाग
अभी
शिशिर ऋतु
4 Jan–3 Mar 2026
माघ • फाल्गुन
अनुपान
छोटी पीपली चूर्ण
त्रिफला की मात्रा का 1/6 भाग

अनुपान किस प्रकार लेना है?

अनुपान को पानी में अलग से घोलकर पीने के स्थान पर उसे त्रिफला में मिलाकर लेना है।

पहले त्रिफला और अनुपान का मिश्रण लें और उसके बाद ऊपर से कुछ घूँट पानी पिएँ।

वसंत ऋतु में शहद की मात्रा 1/6 नहीं है। इतना शहद मिलाया जाता है कि त्रिफला और शहद का अवलेह / पेस्ट बन जाए।

प्रारम्भ में शरीर की प्रतिक्रिया

आरम्भ में कुछ लोगों को हल्के पतले दस्त हो सकते है जो कि त्रिफला द्वारा सामान्य आंतो की सफाई की सामान्य प्रक्रिया है 

ऐसी अवस्था में शरीर में जल की कमी न होने देने और नमक-खांड का ORS जैसा घोल लेना सुनिश्चित करें

त्रिफला को स्वाभाव से रुक्ष अर्थात रूखा माना गया है, इसलिए लंबे सेवन के साथ भोजन में वैदिक विधि से बने देशी गाय के घी के पर्याप्त सेवन को सुनिश्चित अवश्य करें।

12 वर्ष के त्रिफला कल्प का पारंपरिक वर्णन

प्रथम वर्ष तन सुस्ती जाय।
द्वितीय रोग सर्व मिट जाय।।

तृतीय नैन बहु ज्योति समावे।
चतुर्थे सुन्दरताई आवे।।

पंचम वर्ष बुद्धि अधिकाई।
षष्ठम महाबली हो जाई।।

श्वेत केश श्याम होय सप्तम।
वृद्ध तन तरुण होई पुनि अष्टम।।

दिन में तारे देखें सही।
नवम वर्ष फल अस्तुत कही।।

दशम शारदा कंठ विराजे।
अन्धकार हिरदै का भाजे।।

जो एकादश द्वादश खाये।
ताको वचन सिद्ध हो जाये।।
प्रथम वर्ष — 1 वर्ष

शरीर की सुस्ती दूर होने का पारंपरिक वर्णन।

द्वितीय वर्ष — 2 वर्ष

रोगों के नाश का वर्णन।

तृतीय वर्ष — 3 वर्ष

नेत्र-ज्योति बढ़ने का वर्णन।

चतुर्थ वर्ष — 4 वर्ष

सौंदर्य में निखार का वर्णन।

पंचम वर्ष — 5 वर्ष

बुद्धि बढ़ने का वर्णन।

षष्ठम वर्ष — 6 वर्ष

शारीरिक बल बढ़ने का वर्णन।

सप्तम वर्ष — 7 वर्ष

सफेद बाल काले होने का पारंपरिक वर्णन।

अष्टम वर्ष — 8 वर्ष

युवा अवस्था जैसी शक्ति का वर्णन।

नवम वर्ष — 9 वर्ष

अत्यन्त प्रखर दृष्टि की काव्यात्मक उपमा।

दशम वर्ष — 10 वर्ष

ज्ञान और वाणी की प्रखरता का वर्णन।

एकादश वर्ष — 11 वर्ष

वाणी की विशेष प्रभावशीलता का वर्णन।

द्वादश वर्ष — 12 वर्ष

“वचन सिद्धि” जैसा आध्यात्मिक फल वर्णित है।

त्रिफला कल्प के अतिरिक्त अन्य पारंपरिक प्रयोग

सुबह त्रिफला — “पोषक”

सुबह लिए गए त्रिफला को मूल लेख में पोषक कहा गया है। स्वस्थ व्यक्ति के लिए गुड़ या शहद के साथ लेने का उल्लेख है।

रात्रि का त्रिफला — “रेचक”

रात में इसे पेट की सफाई से जोड़कर गर्म दूध या गर्म पानी के साथ लेने का उल्लेख है।

नेत्र-प्रक्षालन

एक चम्मच त्रिफला रात भर पानी में भिगोकर, सुबह छानकर उस पानी से आँखें धोने का पारंपरिक प्रयोग दिया गया है।

दाँत, मसूड़े और मुख

रातभर भिगोए त्रिफला के पानी को मंजन के बाद मुख में रखने का उल्लेख है।

त्रिफला काढ़ा और शहद

गुनगुने काढ़े में शहद के प्रयोग को मूल लेख में मोटापे से जोड़ा गया है।

घाव धोना

त्रिफला काढ़े से घाव धोने का पारंपरिक उल्लेख भी है।

गाय का घी + शहद + त्रिफला

मूल लेख में इसे नेत्रों के लिए उपयोगी बताया गया है।

नेत्र रोगों से जुड़ा उल्लेख

मोतियाबिंद, कांचबिंदु और दृष्टिदोष के संदर्भ में पारंपरिक दावे दिए गए हैं।

मूत्र विकार एवं मधुमेह

इन स्थितियों में उपयोग का उल्लेख है।

कब्ज

रात को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने का उल्लेख है।

2–4 ग्राम वाला अलग प्रयोग

 2–4 ग्राम का सामान्य प्रयोग भी दिया गया है। यह 12-वर्षीय कल्प की आयु-आधारित मात्रा से अलग है।

रेडियोधर्मिता से जुड़ा उल्लेख

समान भाग वाले त्रिफला द्वारा Radiation से हुए दुष्प्रभाव के प्रयोगों का उल्लेख भी है।

सावधानी: अत्यन्त दुर्बल या कृश व्यक्ति, गर्भवती स्त्री तथा नए बुखार में त्रिफला न ले।

किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में लंबे समय तक नियमित प्रयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य से सलाह लेना उचित है।

निरोगी रहने हेतु महामन्त्र

भोजन और पानी का सेवन प्राकृतिक नियमों के अनुसार करें।
रिफाइन्ड नमक, तेल, शक्कर और मैदा से बचने की बात कही गई है।
काम, क्रोध, लोभ, मोह और ईर्ष्या जैसे विकारों को अपने ऊपर हावी न होने दें।
मल, मूत्र, प्यास, जंभाई, हँसी, आँसू, वीर्य, अपानवायु, भूख, छींक, डकार, वमन और नींद जैसे प्राकृतिक वेगों को न रोकें।
एल्युमिनियम और प्लास्टिक के बर्तनों से बचें; मिट्टी के बर्तन श्रेष्ठ बताए गए हैं।
मोटे अनाज और छिलके वाली दालों को भोजन में स्थान दें।
भगवान में श्रद्धा और विश्वास रखें।
पथ्य भोजन लें और जंक फूड से बचें।
भोजन को पचने का समय दें। भोजन के साथ बहुत अधिक पानी न लें।
सुबह उठकर 2–3 गिलास गुनगुना पानी लेने का उल्लेख है।
अत्यधिक ठंडा या बर्फ वाला पानी न लें।
पानी बैठकर और धीरे-धीरे घूँट-घूँट कर पिएँ।
बार-बार भोजन न करें; पहला भोजन पचने के बाद अगला भोजन लें।

1 : 2 : 3 अनुपात वाला त्रिफला

हरड़ : बहेड़ा : आँवला = 1 : 2 : 3 अनुपात में तैयार गौधूली त्रिफला उपलब्ध है।

पाठक के लिए स्पष्टीकरण: इस लेख में आयुर्वेदिक परंपरा, पुराने वर्णनों, मूल लेख में दिए अनुभवों और पारंपरिक प्रयोगों का उल्लेख है। गंभीर रोगों, नेत्र रोगों, मधुमेह, मोटापा, घाव, radiation तथा 12-वर्षीय परिणामों को आधुनिक चिकित्सा की सुनिश्चित गारंटी न समझें।
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Ayurveda • Trifala • 12-Year Kalp

Trifala Kalp

Traditional method of regular Trifala use over twelve years

Trifala has traditionally been used for much more than occasional bowel cleansing. Ayurveda also describes it as a Rasayana. This article brings together the traditional ratio, age-based quantity, seasonal Anupaan, twelve-year description and other traditional uses.

What is Trifala?

Trifala is a combination of Harad, Baheda and Amla.

Traditional Ayurvedic literature associates it with Vata, Pitta and Kapha and also describes it as a Rasayana.

Traditional Ratio

A simple formula I use to remember the traditional ratio:

Formula to remember
A : B : H (In alphabetic order)
3 : 2 : 1 (In reverse order)
A = Amla, B = Baheda, H = Harad.
Therefore: Amla : Baheda : Harad = 3 : 2 : 1.

Basic Rules

According to the original article, Trifala is taken in the morning on an empty stomach after washing and cleansing.

Nothing other than water is taken for approximately 90 minutes afterwards.

The traditional Kalp is described as lasting 12 years.

Today's Trifala Anupaan
Current Ritu Varsha Ritu
Indian Months Shravana • Bhadrapada
Today's Anupaan Sendha Namak
Next Anupaan: Desi Khaand / Pure Mishri
Changes on: 27 September 2026
Until 27 September 2026

Calculate Your Trifala Quantity

Age × 0.12 gram

⚠ IMPORTANT MAXIMUM QUANTITY The calculated quantity is the maximum limit. It should not be exceeded under any circumstances.

The quantity may be reduced according to individual need, but should never be increased beyond the calculated limit.

Anupaan According to Ritu

Indian months • Anupaan • Quantity • Gregorian date

NOW
Vasant Ritu
4 Mar–1 May 2026
Chaitra • Vaishakha
ANUPAAN
Honey
Add enough honey to form a paste with Trifala.
NOW
Grishma Ritu
2 May–29 Jul 2026
Jyeshtha • Ashadha
ANUPAAN
Jaggery
1/6 of Trifala quantity
NOW
Varsha Ritu
30 Jul–26 Sep 2026
Shravana • Bhadrapada
ANUPAAN
Sendha Namak
1/6 of Trifala quantity
NOW
Sharad Ritu
27 Sep–24 Nov 2026
Ashwina • Kartika
ANUPAAN
Desi Khaand / Pure Mishri
1/6 of Trifala quantity
NOW
Hemant Ritu
25 Nov 2026–22 Jan 2027
Margashirsha • Pausha
ANUPAAN
Sonth Powder
1/6 of Trifala quantity
NOW
Shishir Ritu
4 Jan–3 Mar 2026
Magha • Phalguna
ANUPAAN
Chhoti Pippali Powder
1/6 of Trifala quantity

Traditional 12-Year Description

Year 1

Traditionally associated with reduced sluggishness.

Year 2

Traditional description of freedom from disease.

Year 3

Associated with eyesight.

Year 4

Associated with improved appearance.

Year 5

Associated with intellect.

Year 6

Associated with physical strength.

Year 7

Traditional claim regarding grey hair.

Year 8

Associated with renewed youthfulness.

Year 9

Poetic description of extraordinary vision.

Year 10

Associated with clarity of knowledge and speech.

Year 11

Associated with influence of speech.

Year 12

Traditionally described as “Vachan Siddhi”.

Other Traditional Uses Mentioned in the Original Article

Morning use

Traditionally described as nourishing.

Night use

Traditionally associated with bowel cleansing.

Eye wash

Overnight soaked and filtered Trifala water is mentioned traditionally.

Oral care

Traditional use is mentioned for teeth, gums and mouth.

Decoction and honey

Traditionally associated with weight management.

Washing wounds

Traditional use of Trifala decoction is mentioned.

Ghee, honey and Trifala

Mentioned traditionally in relation to eye health.

Eye disorders

Traditional claims relating to cataract, glaucoma and vision appear in the original article.

Urinary disorders and diabetes

These uses are mentioned in the original article.

Constipation

Warm-water use at night is mentioned traditionally.

Separate 2–4 g use

This is distinct from the age-based Kalp quantity.

Radiation reference

The original article mentions research involving equal-part Trifala and gamma radiation.

Caution: The original article advises against Trifala during pregnancy, acute fever, and in extremely weak or very lean individuals.

Traditional Lifestyle Principles

Follow natural principles in food and water consumption.
Avoid excessive refined foods.
Do not allow anger, greed and jealousy to dominate daily life.
Do not unnecessarily suppress natural bodily urges.
Traditional cookware is preferred in the original article.
Include coarse grains and whole pulses.
Maintain faith and mental balance.
Prefer wholesome food and avoid junk food.
Allow adequate time for digestion.
Warm water in the morning is mentioned.
Avoid excessively cold or iced water.
Drink water slowly while seated.
Avoid eating repeatedly before the previous meal is digested.

Trifala in 1 : 2 : 3 Ratio

Gaudhuli Trifala is available in Harad : Baheda : Amla = 1 : 2 : 3 ratio.

Reader note: This article preserves traditional Ayurvedic descriptions, historical claims and material from the original Hindi article. These should not be interpreted as guaranteed modern medical outcomes.

टिप्पणियाँ

  1. बहुत ज्ञानवर्धक जानकारी। आभार।।

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत अच्छी जानकारी दी है

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत अच्छा जानकारी दिया आपने

    जवाब देंहटाएं
  4. नमस्ते मेरा नाम राहुल है मै हैदराबाद से हूं 5 साल पहले इस प्रकार त्रिफला का उपयोग किया था। लगातार 1 साल तक लिया था। इसका मुझे बहुत फायदा भी हुआ मेरी याददाश्त बहुत अच्छी होने लगी थी तकलीफ सिर्फ एक थी उसके कारण मुझे दस्त दिन में 4,5बार होनेलगा सुभा के नाश्ते के तुरंत बाद जाना पड़ता था दस्त ठीक नहीं हुए जोकि त्रिफला लने के शुरुवात में होते है लेकिन मुझे पूरे साल तक दस्त होते थे उसके कारण मै बोहोत दुबला पतला होगया था इसलिए मैंने त्रिफला लेना बंद कर दिया ।
    मेन बात ये है कि मै य फिर से लेना चाहता हूं और इसका पूरा फायदा लेना चाहता हूं में आशा करता हूं कि आप मेरी मदत करेंगे
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  5. नमस्ते मेरा नाम राहुल है मै हैदराबाद से हूं 5 साल पहले इस प्रकार त्रिफला का उपयोग किया था। लगातार 1 साल तक लिया था। इसका मुझे बहुत फायदा भी हुआ मेरी याददाश्त बहुत अच्छी होने लगी थी तकलीफ सिर्फ एक थी उसके कारण मुझे दस्त दिन में 4,5बार होनेलगा सुभा के नाश्ते के तुरंत बाद जाना पड़ता था दस्त ठीक नहीं हुए जोकि त्रिफला लने के शुरुवात में होते है लेकिन मुझे पूरे साल तक दस्त होते थे उसके कारण मै बोहोत दुबला पतला होगया था इसलिए मैंने त्रिफला लेना बंद कर दिया । मैंने त्रिफला के चूर्ण को 1 2 3 के
    अनुपात में लिया था और उसके सात मौसम के हिसाब से चोटी पीपल, शहेद,गुड,सेंधा नमक, खांड,सोंट मिलकर लिया था। बात ये है कि मै य फिर से लेना चाहता हूं और इसका पूरा फायदा लेना चाहता हूं में आशा करता हूं कि आप मेरी मदत करेंगे
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. त्रिफला के सारे फायदे उसी व्यक्ति को मिल सकते है जो सात्विक आचार विचार का पालन करता हो अन्यथा आप इसके केवल कुछ ही लाभ उठा पाएंगे,वास्तविक लाभ से वंचित रह जाएंगे

      हटाएं
  6. आयुर्वेद का विज्ञान अदभुत है भाई अगर आप किसी भी ओषधि उपगोग करना चाहते हो तो आस पास के किसी आयुर्वेदाचार्य की सलाह से करे ताकि उस ओषधि की अधिक लाभ उठा सको जय हिंद वन्देमातरम साथियों

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बीरेंद्र सिंह गोधूलि वालो से बेटर नही मिलेगा बाबू मंद बुद्धिमान प्रसाद जी
      फिर भी समझ न आये तो फोन पर बात करके अगर सम्भव हो तो जाकर मिल लो ताकि ज्ञान के सागर बीरेंद्र जी की मुख मंडल आभा से ओतप्रोत होकर ही आओगे
      ओर फिर हमेसा पॉजिटिव ही बोला करोगे

      हटाएं
  7. हर बहेडा आँवला धी मिश्री संग खाये - हाथी दाँवे कांख मे बारह कोस तक जाये।
    यह कहावत लगभग ६०साल पहले आम चलन में थी। सत्य का पता नहीं।

    जवाब देंहटाएं
  8. महोदय बहुत ही उत्तम जानकारी राम राम

    जवाब देंहटाएं
  9. Virendar Bhai kya Desi khand ki jagah misri ke
    Sath triphala let sakte h

    जवाब देंहटाएं
  10. 👌👌सुंदर! धन्यवाद!🙏🌹

    जवाब देंहटाएं
  11. धन्यवाद , बोहत अच्छी जानकारी, क्या पतंजलि का त्रिफला चूर्ण इसके लिए सही होंगा?

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. uski quality ki jaankari nahi hai, hum to keval apna banaya hua hi lete hai. Jo hamari website Gaudhuli.com par bhi uplabdh hai

      हटाएं
  12. क्या इस प्रयोग हेतु मै पतंजलि का त्रिफला चूर्ण इस्तेमाल कर सकता हु?

    जवाब देंहटाएं
  13. मैंने भी नवंबर 3021 से 2 साल तक त्रिफला का प्रतिदिन सेवन किया था सुबह त्रिफला लेने के बाद यदि कुछ भी खा लिया जाए तो दस्त आएंगे ही।
    इसका समाधान मुझे यही मिला की त्रिफला खाने के 3 घंटे तक कोई भी चीज ना खाई जाए तब यह दस्त आने वाली समस्या समाप्त हो जाती है यह मेरा खुद का अनुभव है

    जवाब देंहटाएं
  14. त्रिफला अपने आप बाजार से हरड़ बहेड़ा आमला को खरीद कर स्वयं बनाएं वही सर्वोत्तम है।
    क्योंकि बाजार में अमला का रस आता है आमलकी रसायन भी आता है तो आमला का रस निकालने के बाद जो शेष बचता है वह भी त्रिफला के चूर्ण में मिलाया जा सकता है या जाता होगा

    जवाब देंहटाएं

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