त्रिफला कल्प
जानिए 12 वर्ष तक लगातार असली त्रिफला लेने की पारंपरिक विधि
त्रिफला केवल कभी-कभार पेट साफ करने वाला चूर्ण नहीं माना गया। आयुर्वेद में इसे रसायन के रूप में भी स्थान मिला है। यहाँ त्रिफला का सही अनुपात, आयु के अनुसार मात्रा, ऋतु के अनुसार अनुपान, 12 वर्ष के कल्प और इसके अन्य पारंपरिक प्रयोगों को सरल और व्यवस्थित रूप में रखा गया है।
हाथी दाबे कांख में और चार कोस ले जाए
त्रिफला आखिर है क्या?
आयुर्वेद के अनुसार हरड़, बहेड़ा और आँवला—इन तीन फलों के मिश्रण को त्रिफला कहा जाता है।
परंपरागत आयुर्वेदिक दृष्टि में इसे वात, पित्त और कफ के संतुलन से जोड़कर देखा गया है। पुराने वर्णनों में त्रिफला को दीर्घकालीन पोषण और कायाकल्प से भी जोड़ा गया है।
त्रिफला किस अनुपात में बनता है?
धात्रीफलानि चत्वारि प्रकीर्तिता।।
इस अनुपात को याद रखने के लिए मेरा सरल सूत्र:
त्रिफला कल्प के मूल नियम
त्रिफला सुबह शौच आदि से निवृत्त होकर, हाथ-मुँह धोने और कुल्ला करने के बाद खाली पेट ताजे पानी के साथ लिया जाता है।
इसके बाद लगभग डेढ़ घंटे यानी 90 मिनट तक पानी के अतिरिक्त कुछ न लेने का नियम है।
पूर्ण त्रिफला कल्प की अवधि 12 वर्ष बताई गई है।
परिवर्तन: 27 September 2026
27 September 2026 तक
अपनी आयु के अनुसार त्रिफला की मात्रा जानें
जितनी आयु, उतनी रत्ती • 1 रत्ती = 0.12 ग्राम
शरीर की अवस्था और आवश्यकता के अनुसार मात्रा इससे कम की जा सकती है, लेकिन आयु अनुसार दी गई अधिकतम मात्रा से ऊपर नहीं जाना है।
मात्रा का निर्धारण
मूल नियम है: जितनी आयु, उतनी रत्ती त्रिफला।
एक रत्ती को लगभग 0.12 ग्राम मानते हुए यदि आयु 50 वर्ष है तो:
मात्रा अनुमान से नहीं, मापकर लेने पर जोर दिया गया है।
शरीर पर प्रभाव के अनुसार मात्रा कम की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर लगभग 25% तक कम करने का भी उल्लेख है।
लेकिन आयु के अनुसार निकली मात्रा अधिकतम सीमा है—उससे ऊपर नहीं जाना है।
ऋतु के अनुसार अनुपान
भारतीय मास • अनुपान • मात्रा • Gregorian तारीख
अनुपान किस प्रकार लेना है?
अनुपान को पानी में अलग से घोलकर पीने के स्थान पर उसे त्रिफला में मिलाकर लेना है।
पहले त्रिफला और अनुपान का मिश्रण लें और उसके बाद ऊपर से कुछ घूँट पानी पिएँ।
प्रारम्भ में शरीर की प्रतिक्रिया
आरम्भ में कुछ लोगों को हल्के पतले दस्त हो सकते है जो कि त्रिफला द्वारा सामान्य आंतो की सफाई की सामान्य प्रक्रिया है
ऐसी अवस्था में शरीर में जल की कमी न होने देने और नमक-खांड का ORS जैसा घोल लेना सुनिश्चित करें
12 वर्ष के त्रिफला कल्प का पारंपरिक वर्णन
द्वितीय रोग सर्व मिट जाय।।
तृतीय नैन बहु ज्योति समावे।
चतुर्थे सुन्दरताई आवे।।
पंचम वर्ष बुद्धि अधिकाई।
षष्ठम महाबली हो जाई।।
श्वेत केश श्याम होय सप्तम।
वृद्ध तन तरुण होई पुनि अष्टम।।
दिन में तारे देखें सही।
नवम वर्ष फल अस्तुत कही।।
दशम शारदा कंठ विराजे।
अन्धकार हिरदै का भाजे।।
जो एकादश द्वादश खाये।
ताको वचन सिद्ध हो जाये।।
शरीर की सुस्ती दूर होने का पारंपरिक वर्णन।
रोगों के नाश का वर्णन।
नेत्र-ज्योति बढ़ने का वर्णन।
सौंदर्य में निखार का वर्णन।
बुद्धि बढ़ने का वर्णन।
शारीरिक बल बढ़ने का वर्णन।
सफेद बाल काले होने का पारंपरिक वर्णन।
युवा अवस्था जैसी शक्ति का वर्णन।
अत्यन्त प्रखर दृष्टि की काव्यात्मक उपमा।
ज्ञान और वाणी की प्रखरता का वर्णन।
वाणी की विशेष प्रभावशीलता का वर्णन।
“वचन सिद्धि” जैसा आध्यात्मिक फल वर्णित है।
त्रिफला कल्प के अतिरिक्त अन्य पारंपरिक प्रयोग
सुबह लिए गए त्रिफला को मूल लेख में पोषक कहा गया है। स्वस्थ व्यक्ति के लिए गुड़ या शहद के साथ लेने का उल्लेख है।
रात में इसे पेट की सफाई से जोड़कर गर्म दूध या गर्म पानी के साथ लेने का उल्लेख है।
एक चम्मच त्रिफला रात भर पानी में भिगोकर, सुबह छानकर उस पानी से आँखें धोने का पारंपरिक प्रयोग दिया गया है।
रातभर भिगोए त्रिफला के पानी को मंजन के बाद मुख में रखने का उल्लेख है।
गुनगुने काढ़े में शहद के प्रयोग को मूल लेख में मोटापे से जोड़ा गया है।
त्रिफला काढ़े से घाव धोने का पारंपरिक उल्लेख भी है।
मूल लेख में इसे नेत्रों के लिए उपयोगी बताया गया है।
मोतियाबिंद, कांचबिंदु और दृष्टिदोष के संदर्भ में पारंपरिक दावे दिए गए हैं।
इन स्थितियों में उपयोग का उल्लेख है।
रात को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने का उल्लेख है।
2–4 ग्राम का सामान्य प्रयोग भी दिया गया है। यह 12-वर्षीय कल्प की आयु-आधारित मात्रा से अलग है।
समान भाग वाले त्रिफला द्वारा Radiation से हुए दुष्प्रभाव के प्रयोगों का उल्लेख भी है।
किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में लंबे समय तक नियमित प्रयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य से सलाह लेना उचित है।
निरोगी रहने हेतु महामन्त्र
1 : 2 : 3 अनुपात वाला त्रिफला
हरड़ : बहेड़ा : आँवला = 1 : 2 : 3 अनुपात में तैयार गौधूली त्रिफला उपलब्ध है।
भ्रमित भारतीयो के भ्रम का भ्रमण
Trifala Kalp
Traditional method of regular Trifala use over twelve years
Trifala has traditionally been used for much more than occasional bowel cleansing. Ayurveda also describes it as a Rasayana. This article brings together the traditional ratio, age-based quantity, seasonal Anupaan, twelve-year description and other traditional uses.
What is Trifala?
Trifala is a combination of Harad, Baheda and Amla.
Traditional Ayurvedic literature associates it with Vata, Pitta and Kapha and also describes it as a Rasayana.
Traditional Ratio
A simple formula I use to remember the traditional ratio:
Therefore: Amla : Baheda : Harad = 3 : 2 : 1.
Basic Rules
According to the original article, Trifala is taken in the morning on an empty stomach after washing and cleansing.
Nothing other than water is taken for approximately 90 minutes afterwards.
The traditional Kalp is described as lasting 12 years.
Changes on: 27 September 2026
Until 27 September 2026
Calculate Your Trifala Quantity
Age × 0.12 gram
The quantity may be reduced according to individual need, but should never be increased beyond the calculated limit.
Anupaan According to Ritu
Indian months • Anupaan • Quantity • Gregorian date
Traditional 12-Year Description
Traditionally associated with reduced sluggishness.
Traditional description of freedom from disease.
Associated with eyesight.
Associated with improved appearance.
Associated with intellect.
Associated with physical strength.
Traditional claim regarding grey hair.
Associated with renewed youthfulness.
Poetic description of extraordinary vision.
Associated with clarity of knowledge and speech.
Associated with influence of speech.
Traditionally described as “Vachan Siddhi”.
Other Traditional Uses Mentioned in the Original Article
Traditionally described as nourishing.
Traditionally associated with bowel cleansing.
Overnight soaked and filtered Trifala water is mentioned traditionally.
Traditional use is mentioned for teeth, gums and mouth.
Traditionally associated with weight management.
Traditional use of Trifala decoction is mentioned.
Mentioned traditionally in relation to eye health.
Traditional claims relating to cataract, glaucoma and vision appear in the original article.
These uses are mentioned in the original article.
Warm-water use at night is mentioned traditionally.
This is distinct from the age-based Kalp quantity.
The original article mentions research involving equal-part Trifala and gamma radiation.
Traditional Lifestyle Principles
Trifala in 1 : 2 : 3 Ratio
Gaudhuli Trifala is available in Harad : Baheda : Amla = 1 : 2 : 3 ratio.

वंदे मातरम
जवाब देंहटाएंHow can i order something here?
जवाब देंहटाएंबहुत ज्ञानवर्धक जानकारी। आभार।।
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी जानकारी दी है
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा जानकारी दिया आपने
जवाब देंहटाएंनमस्ते मेरा नाम राहुल है मै हैदराबाद से हूं 5 साल पहले इस प्रकार त्रिफला का उपयोग किया था। लगातार 1 साल तक लिया था। इसका मुझे बहुत फायदा भी हुआ मेरी याददाश्त बहुत अच्छी होने लगी थी तकलीफ सिर्फ एक थी उसके कारण मुझे दस्त दिन में 4,5बार होनेलगा सुभा के नाश्ते के तुरंत बाद जाना पड़ता था दस्त ठीक नहीं हुए जोकि त्रिफला लने के शुरुवात में होते है लेकिन मुझे पूरे साल तक दस्त होते थे उसके कारण मै बोहोत दुबला पतला होगया था इसलिए मैंने त्रिफला लेना बंद कर दिया ।
जवाब देंहटाएंमेन बात ये है कि मै य फिर से लेना चाहता हूं और इसका पूरा फायदा लेना चाहता हूं में आशा करता हूं कि आप मेरी मदत करेंगे
धन्यवाद
To na khao
हटाएंइस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
हटाएंनमस्ते मेरा नाम राहुल है मै हैदराबाद से हूं 5 साल पहले इस प्रकार त्रिफला का उपयोग किया था। लगातार 1 साल तक लिया था। इसका मुझे बहुत फायदा भी हुआ मेरी याददाश्त बहुत अच्छी होने लगी थी तकलीफ सिर्फ एक थी उसके कारण मुझे दस्त दिन में 4,5बार होनेलगा सुभा के नाश्ते के तुरंत बाद जाना पड़ता था दस्त ठीक नहीं हुए जोकि त्रिफला लने के शुरुवात में होते है लेकिन मुझे पूरे साल तक दस्त होते थे उसके कारण मै बोहोत दुबला पतला होगया था इसलिए मैंने त्रिफला लेना बंद कर दिया । मैंने त्रिफला के चूर्ण को 1 2 3 के
जवाब देंहटाएंअनुपात में लिया था और उसके सात मौसम के हिसाब से चोटी पीपल, शहेद,गुड,सेंधा नमक, खांड,सोंट मिलकर लिया था। बात ये है कि मै य फिर से लेना चाहता हूं और इसका पूरा फायदा लेना चाहता हूं में आशा करता हूं कि आप मेरी मदत करेंगे
धन्यवाद
त्रिफला के सारे फायदे उसी व्यक्ति को मिल सकते है जो सात्विक आचार विचार का पालन करता हो अन्यथा आप इसके केवल कुछ ही लाभ उठा पाएंगे,वास्तविक लाभ से वंचित रह जाएंगे
हटाएंThanks
जवाब देंहटाएंDhanyawad bahut acchi jankari
जवाब देंहटाएंआयुर्वेद का विज्ञान अदभुत है भाई अगर आप किसी भी ओषधि उपगोग करना चाहते हो तो आस पास के किसी आयुर्वेदाचार्य की सलाह से करे ताकि उस ओषधि की अधिक लाभ उठा सको जय हिंद वन्देमातरम साथियों
जवाब देंहटाएंबीरेंद्र सिंह गोधूलि वालो से बेटर नही मिलेगा बाबू मंद बुद्धिमान प्रसाद जी
हटाएंफिर भी समझ न आये तो फोन पर बात करके अगर सम्भव हो तो जाकर मिल लो ताकि ज्ञान के सागर बीरेंद्र जी की मुख मंडल आभा से ओतप्रोत होकर ही आओगे
ओर फिर हमेसा पॉजिटिव ही बोला करोगे
हर बहेडा आँवला धी मिश्री संग खाये - हाथी दाँवे कांख मे बारह कोस तक जाये।
जवाब देंहटाएंयह कहावत लगभग ६०साल पहले आम चलन में थी। सत्य का पता नहीं।
महोदय बहुत ही उत्तम जानकारी राम राम
जवाब देंहटाएंVirendar Bhai kya Desi khand ki jagah misri ke
जवाब देंहटाएंSath triphala let sakte h
👌👌सुंदर! धन्यवाद!🙏🌹
जवाब देंहटाएंधन्यवाद , बोहत अच्छी जानकारी, क्या पतंजलि का त्रिफला चूर्ण इसके लिए सही होंगा?
जवाब देंहटाएंuski quality ki jaankari nahi hai, hum to keval apna banaya hua hi lete hai. Jo hamari website Gaudhuli.com par bhi uplabdh hai
हटाएंक्या इस प्रयोग हेतु मै पतंजलि का त्रिफला चूर्ण इस्तेमाल कर सकता हु?
जवाब देंहटाएंमैंने भी नवंबर 3021 से 2 साल तक त्रिफला का प्रतिदिन सेवन किया था सुबह त्रिफला लेने के बाद यदि कुछ भी खा लिया जाए तो दस्त आएंगे ही।
जवाब देंहटाएंइसका समाधान मुझे यही मिला की त्रिफला खाने के 3 घंटे तक कोई भी चीज ना खाई जाए तब यह दस्त आने वाली समस्या समाप्त हो जाती है यह मेरा खुद का अनुभव है
त्रिफला अपने आप बाजार से हरड़ बहेड़ा आमला को खरीद कर स्वयं बनाएं वही सर्वोत्तम है।
जवाब देंहटाएंक्योंकि बाजार में अमला का रस आता है आमलकी रसायन भी आता है तो आमला का रस निकालने के बाद जो शेष बचता है वह भी त्रिफला के चूर्ण में मिलाया जा सकता है या जाता होगा