नवरात्री स्पेशल पिज़्ज़ा!

नवरात्री स्पेशल पिज़्ज़ा!


जो आस्थाविहीन होता है उसे काबू करना आसान है

मेरे घर के पास खुली इस दूकान के बाहर लगे इस चित्र ने सहसा मेरा ध्यान खींचा तो मैंने इसका फोटो खींचा

ऐसी कई दुकाने देखता हूँ जहाँ ऐसे नाम मुझे दिखते है जैसे :जैन पिज़्ज़ा सेंटर,
बिना लहसुन प्याज़ का बटर चिकन, बजरंगी वैष्णो ढाबा (अंडे और आमलेट वाला)

हाईवे पर कभी मज़बूरी में खाना पड़े तो कई वैष्णो ढ़ाबो पर जाकर पहले ज़रूर पूछता हूँ की "अंडा मिलेगा क्या?" और यदि वो हाँ कहता है तो आगे खिसक लेता हूँ

सोचने लगा की माँग और आपूर्ति का नियम यहाँ लागु हुआ है का

जिसमे पहले मांग खड़ी हुई तो आपूर्ति हुई या पहले आपूर्ति हुई और फिर माँग खड़ी की गयी!

इस दुकानदार का यह बैनर 365 दिनों में से केवल 18 दिन के लिए काम आयेगा
लेकिन साल भर इसे यह नहीं हटाएगा

क्योंकि बिना लहुसन प्याज़ के पिज़्ज़ा खाने वाले बहुत से ग्राहक मिल जायेंगे और इसकी बिक्री बढ़ जाएगी!

धन्य है वो ग्राहक जो उपवास के अर्थ का अनर्थ करेंगे और सात्विकता को आंच न आये तो व्रत के दिन बिना लहसुन और प्याज़ का पिज़्ज़ा खायेंगे जिसमे Cheese, मैदा, मशरूम और न जाने क्या क्या?

 ऐसे ही पूरे बाज़ारवाद में बिना मांग हुए भी आपूर्ति की जा रही है और मांग खडी करवाई जाती है

व्यापक रूप में समझे तो भारत के लोग जिनकी चेतना को गलत भोजन और पानी के ज़रिये मारा जा रहा है और अधिकतर की आस्था भारतीयता में नहीं है वो ऐसे विकृत बाजारवाद के शिकार होंगे

क्योंकि जो आस्थाविहीन होता है उसे काबू करना आसान है और हमारी लगभग पूरी युवा पीढ़ी आस्थाविहीन हो गयी है

मेरी आस्था भारतीयता में है तो मुझे कोई भी आसानी से बहला नहीं पायेगा लेकिन शायद राजीव भाई को सुनने से पहले मैं और मेरे जैसे कई लोग ऐसी विचारधारा में बह रहे थे जो एक भंवर में फंसाने वाली थी

जनहित में विश्लेषण
वीरेंद्र सिंह

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