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तेल का विज्ञान एक वाक्य में

तेल का विज्ञान एक वाक्य में

गाँव की एक निरक्षर परन्तु शिक्षित वृद्ध महिला द्वारा
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गाँव की महिलाओ से मैंने क्या सीखा?
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भ्रामक विज्ञापनों के दम पर आज हर जगह रिफाइंड तेल की धूम है
Imported Olive Oil क्रांति की बात हो रही है

अतः नीचे लिखी बात का महत्व और बढ़ जाता है

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बात 2013, भिवानी, हरियाणा के एक गाँव की है

व्याख्यान के बाद एक वृद्ध माताजी के घर में भोजन करने का अवसर मिला

भोजन करते समय तेल के बारे में जानकारी ली तो उस महिला के मुख से खाने वाले तेल के बारे में एक ऐसी बात निकली की मैं नतमस्तक हो गया

जिस वाक्य के बल पर तेल के नुक्सान समझाने के लिए हमे कई घंटो तक विज्ञानं समझाना नहीं पड़ता

जब मैंने पुछा की आप TV  विज्ञापन में दिखाए जाने वाले रिफाइंड तेल का प्रयोग क्यों नहीं करती

तो उनके मुखारविंद से वह महा वाक्य निकला -

"बेटा रिफाइंड तेल अगर अच्छा होता तो अपने पोते की मालिश मैं इसी से करती और अपने सर में रोज़ लगाती"

मैं थोड़ी देर तक खाना छोड़कर सोचता रहा की राजीव भाई सही थे।

यह निरक्षर लेकिन शिक्षित महिला किसी वैज्ञानिक से कम है क्या?
इनकी यह बात कितने घरो से रिफाइंड और olive oil  को बाहर भेज देगी इनको इस बात का आंकलन भी नहीं है

इसका एक विश्लेषण यह भी है कि जैसा कि सामान्यतः घरों में महिलाएं करती है कि शुद्ध घानी के तेल को भी उसकी महक समाप्त करने के लिए पका कर अर्थात गर्म कर रख लेती है। उस तेल पर भी उस माँ की यही बात लागू होती है। क्या वह तेल अब शरीर पर लगाने लायक बचा है? उत्तर है बिल्कुल नही इसीलिए खाने लायक भी नहीं बचा। अतः इस प्रक्रिया को घरों में तुरंत बंद किया जाए।

जिस कोलेस्ट्रॉल से डराकर न जाने देसी विदेशी कंपनियों ने हमे क्या क्या बेच दिया उस कोलेस्ट्रोल की एक बड़ी सच्चाई यह है कि दुनिया कर किसी खाद्य पदार्थ में प्राकृतिक रूप से कोलेस्ट्रॉल होता ही नही है! अर्थात कोई भी वस्तु स्वतः ही "कोलेस्ट्रॉल फ्री" होती है।। अच्छा या खराब कोलेस्ट्रोल आपके लिवर में बनता है जो निर्भर करेगा इसपर कि आप शुद्ध तेल खा रहे है या नही।

प्रण करें कि उस माँ के इस एक प्रभावशाली वाक्य को आप जितना होगा उतना आगे फैलायेंगे

इस से संबंधित यह वीडियो अवश्य देखें


वीरेंद्र की लेखनी से
संस्थापक
वीरेन्द्र गौधूली


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