शंखनाद और उसकी रिकॉर्डिंग में अंतर् होता है




शंखनाद और उसकी रिकॉर्डिंग में अंतर् होता है

यह कौन महाज्ञानी है जो मुझे शंख की रिकॉडिंग भेज रहे है क्योंकि उन्हे लगता है की कोरोना वायरस को समाप्त करने हेतु आज शाम को शंख की आवाज़ की रिकॉर्डिंग बजाने से शंखनाद से होने वाला लाभ मिलेगा

बजाना है तो असली बजाओ अन्यथा घंटी बजाना, एक स्वर में गायत्री मंत्र गाना अच्छे विकल्प है इसी प्रकार स्टील की थाली न बजाएं बजानी हैं तो कांसे की थाली या कांसे की घंटी बजायए इसका वैज्ञानिक महत्व इस प्रकार है की शंख, गायत्री मंत्र या काँसे की थाली बजाने से ही जो ध्वनि उत्पन्न होती है वह सभी प्रकार के वाइरस बेक्टीरिया को दूर भगाने में सक्षम है ।

लेकिन अब काँसे के बर्तन तो सब कबाड़ी को बेच दिए घर में स्टील और melamine की प्लेट बजी है अब उस से शोर निकलेगा जो सरदर्द करेगा। अब मूर्खो को कुछ तो बजाना है तो बजाओ, थाली की आवाज़ की रिकॉर्डिंग भी भेज दो एक दूसरे को !

नाद और ध्वनि में अंतर् होता है
शंख बजता है तो नाद उत्पन्न होता है परन्तु रिकॉर्डिंग से केवल ध्वनि

नाद का विज्ञान जानना है तो रविंद्र शर्मा जी को सुने आपको समझ आ जायेगा की क्यों जानवरो के गले में बांधने वाले घंटे घंटियों के डिज़ाइन भी अलग अलग होते थे जिस से नाद उत्पन्न होता था जो कर्णप्रिय होता है

रिकॉर्डिंग तो कुछ देर बाद कान पका देती है

यह वही लोग है जिनको स्वयं आरती या हनुमान चालीसा गानी नहीं आती तो उसकी रिकॉर्डिंग से काम चला लेते है
विवाह में गीत न गा कर DJ बजा लेते है

वो दिन दूर नहीं जब शादियों के भी पंडित की जगह उसकी रिकॉर्डिंग से काम चलाने लगेंगे

वाह रे भारत में रहने वाली इंडिया की जनता वाह!

भ्रमितो के भ्रम का भृमण
VirenderSingh.in

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