लेख: भ्रष्टाचार की महामारी : झूठ बड़ा है तो सच होने का आभास दे रहा है लेकिन है झूठ ही!



झूठ बड़ा है तो सच होने का आभास दे रहा है  
परन्तु सत्य है नहीं 





इस वीडियो को इंटरनेट के हर मंच से हटा दिया गया है क्योंकि उनके अनुसार यह उस श्रेणी में आता है जिसमे बेशर्मी से सच को Conspiracy Theory कहकर दबा दिया जाता है या सच कहने वाले को झूठा साबित कर दिया जाता है।  इंटरनेट पर सब तरह की बकवास और गन्दगी के लिए स्थान है परन्तु इस जैसे वीडियो के लिए नहीं।   इस वीडियो और इन जैसे हज़ारो वीडियो को इंटरनेट से हटा दिया गया है।  

वैसे तो यह पूरा वीडियो सच है परन्तु एक बार को मान भी लिया जाए की इस वीडियो में 100% झूठ है यह भी बहुत बड़ा झूठ होगा।  यदि इस वीडियो में यदि  10% भी सच्चाई है तो यह भी कोई कम खतरनाक नहीं है।  हर सच को झूठ साबित करने वाली हज़ारो वेबसाइट बनाकर किसी विषय को गूगल सर्च करने पर केवल इन षडयंत्रकारियो के द्वारा निर्धारित और नियंत्रित जानकारी हम तक पहुंचे इसकी पूरी रणनीति बनाकर इन्होने हम पर हमला किया है।  

जो कमियां पिछली बार के तथाकथित महामारी फ़ैलाने के षड्यंत्र में रह गई थी वो सब इस बार पूरी करके आये है जिसमे इस से प्रभावित और मृत व्यक्तियों का स्कोरकार्ड बहुत ही मेहनत से एक जैसा पूरी दुनिया में प्रसारित कर दिया गया है जिस से यह प्रभावी लगे।  अब स्कोरकार्ड में संख्या बढ़ती देख लोगो में डर व्याप्त किया है चाहे बीमारी बढे या न बढे, स्कोरकार्ड में संख्या बढ़ती रहनी चाहिए।  स्वाइन फ्लू के समय यह लोग इस मामले में कच्चे रह गए थे।  

इस वीडियो में एक महत्वपूर्ण विषय है वो है सरकार द्वारा दिए जाने वाले स्वास्थ्य बीमा के बारे में 

जिसमे अमेरिका सरकार द्वारा मेडिकेयर नाम से लोगो के लिए चलाया जा रहा सार्वजानिक बीमा योजना के डरावने पहलु सामने आएं है।   जिसका वास्तविक सम्बन्ध भारत में भी आने वाले समय में इस प्रकार के सरकारी बीमा योजना की जड़ो में निहित षड्यंत्र के दूरगामी प्रभावों के साथ है।  

2020 मार्च महीने में कोरोना टास्क फाॅर्स की टीम ने कोरोना के इलाज और टेस्टिंग के खर्च आदि को प्राइवेट और सरकारी बीमा के अंतर्गत किया जाना घोषित किया था।  इस वीडियो में भी इसकी चर्चा है की अस्पताल द्वारा किसी को कोरोना पॉजिटिव घोषित करने पर मेडिकेयर की ओर से अस्पताल को 13 हज़ार डॉलर मिलते है जो की आज लेख लिखने के दिन के अनुसार लगभग रू 9,74,017/- के लगभग की राशि है और उसी मरीज़ को वेंटीलेटर पर डालने से इस राशि का तीन गुना अस्पताल को मिलता है।  जिसका अर्थ है की यदि आपका बीमा है तो अस्पताल में आपका जीवन अधिक खतरे में है।  


भारत में भी यदि ऐसा होता है की सरकार एक एक नागरिक का बीमा कर दें तो हो सकता है की उसके बाद आप यदि बुखार के इलाज के लिए अस्पताल चले जाएँ तो पता नहीं बीमा के पैसे के लालच में आपको क्या घोषित कर दिया जाएँ और आप जो बुखार घर में ठीक कर सकते थे वो अस्पताल में आपकी जान ले ले।  

यह बहुत कम लोगो को पता है कि वैसे भी भारत में दवाइयों के "Compassionate use" अर्थात करुणामय या अनुकंपा प्रयोग के नए नियम के अनुसार डॉक्टरों को बिना क्लीनिकल ट्रायल और बिना मंज़ूरी की दवाइयों को प्रयोग करने की कानूनी रूप से अनुमति मिल चुकी है। अब इस नियम में कितनी करुणा या compassion है इसपर बहुत संदेह है।    

जिसके अनुसार यदि डॉक्टर यह कहे कि मरीज़ का जीवन बचा पाना कठिन है (जो की झूठ भी हो सकता है)

 परन्तु एक ऐसी दवाई है जिसे न तो भारत में बिकने की मंज़ूरी मिली है न ही उसके सुरक्षा परिक्षण पूरे हुए है यदि वह मिल जाये तो कुछ आशा है मरीज़ के बचने की।  अब डॉक्टर की ऐसी बात सुनकर कौन परिजन मना करेगा? वो तो डॉक्टर रूप में भगवान् मानकर कहेगा कि कुछ भी करिए मरीज़ को बचा लीजिये।  

अब उस दवाई को "Compassionate use" के नियम के अंतर्गत मरीज़ को दिया जायेगा जिसमे अधिक सम्भावना है कि मरीज़ नहीं बचेगा लेकिन लूट का एक नया उस्तरा डॉक्टरों के हाथ में सरकार ने थमा दिया है। क्योंकि दवाई बनाने वाली कंपनी इस दवाई के ट्रायल करने के लिए पैसे खर्च करती, उसको तो उल्टा दवाई के पैसे मिले ऊपर से परिक्षण के लिए मुफ्त में मरीज़ भी मिल गया।  अस्पताल मरीज़ को दवाई देने के बाद हुए प्रभावों की जानकारी को कंपनी को देकर कमायेगा और मरीज़ से माल मिला वो अलग।


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इनके झूठ की पोल भविष्य में अवश्य ही खुलेगी इस वीडियो में उसका एक उदाहरण है 

WHO की स्वास्थ्य आपातकाल कार्यक्रम की हेड डॉ मारिया इस वीडियो में  कहती है कि  

"जिन लोगो को कोरोना के लक्षण नहीं है उनके द्वारा किसी को बीमारी फैलाने की सम्भावना बहुत दुर्लभ है"

आप शायद विश्वास न करें परन्तु इस एक वाक्य से भारत में दुनिया के सबसे बड़े लॉकडाउन निरर्थक घोषित हो जाता है।  

अब इसका विश्लेषण करते है:

भारत में सभी को घरो में बंद रहने और सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करवाने का केवल और केवल एक मात्र कारण था 

बिना लक्षण वाले लोग जिनके अंदर कोरोना हो सकता है उस से सभी रक्षा करना क्योंकि लक्षण वाले को तो वैसे भी quarantine कर दिया जाता

 अर्थात मान लीजिये आपके अंदर कोरोना वायरस है लेकिन किसी भी प्रकार के लक्षण आप में दिख नहीं रहे 
सरकार के अनुसार आप एक चलते फिरते कोरोना बम है जो न जाने कितनो को संक्रमित कर देगा।  
तो WHO की आज्ञा मानकर आपको घर में लॉकडाउन कर बिठा देना और लोगो से दूरी बनाकर रखना ही उपाय खोजा गया।  

यही डर 130 करोड़ लोगो को मीडिया के द्वारा धड़ल्ले से दिन रात बेच दिया गया और लोगो ने रोज़गार गवाएं, काम धंधे चौपट करवाएं, डंडे खाएं, सिर्फ इस डर के कारण।  

अब WHO कहता है की ऐसा व्यक्ति संक्रमण फैलाए इसकी बहुत कम सम्भावना है!

तो अब सरकार WHO के आदेश की गुलाम है तो कह क्यों नहीं देती की गलती हो गई हमसे 

लेकिन अब थूका हुआ कौन चाटे? 

अब तो फिल्म पूरी दिखा कर ही मानेंगे 
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बाकी आप लोगो में से जो समझदार और विवेकी है समझ जाना 

मूर्खो और गुलाम मानसिकता वालो के लिए चेतावनी:  नकारात्मक टिपण्णी कर अपनी मूर्खता और दासत्व को प्रमाणित न करें 





कीबोर्ड रुपी कलम से सच उजागर करने का प्रयास करता 
- वीरेंद्र 
VirenderSingh.in

Comments

  1. यही तो इनकी हमेशा चाल होती है पहले हमि से थुक्वाने का काम करते है बाद में हमि से चात्वना चाहते है और वो कोई चाटता नहीं और गंदगी बढ़ती जाती है इसका मतलड़ षड्यंत्र द्वारा हामी से गलत काम करवाया जाता है फिर हमे उसे ठीक करने में शर्मिंदगी महसूस होती है जिसका फायदा ये उठाते है

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  2. Ye video hindi subtitle ke sath chahiye

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  3. बहुत सही कहा अपने

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  4. सच आज कह तो सब रहे हैं ,बहुत से व्यक्ति सच को कह रहे हैं, उजागर भी कर रहे हैं, प्रयास भी कर रहे हैं परन्तु लोग बात सुनते हैं, परंतु कोई जनता में जागरूकता आ नहीं पा रही है। पढ़ते हैं सुनते हैं देखते हैं और भूल जाते हैं कोई विरोध करने की भावना नहींआ पा रही।सभी की मानसिकता वास्तव में बदल पाना एक टेढ़ी खीर हैं।लेकिन जो भी लोग प्रयास कर रहे हैं सभी के प्रयास सरहानीय हैं।कभी तो जागरूक होंगे हमारे देश वासी।ओर निरोग बनेगा हमारा भारत बिना दवाइयों के प्रयोग करे।

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  5. पहले ही पता था ।
    satyawan rohera के नाम से मेरा फेसबुक एकाऊट है वंहा मैने 25 मार्च को एक विडियो बना कर शेयर की थी ।
    लेकिन हम डरपोक लोग है । माने नही । विरेंद्र जी मै चाहुंगा आप वो विडियो देखे ।

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  6. Dhanyawaad Virender Ji, apke dwara ye jankari hmein jo di gayi! Ab Sarkar kyunki shuru se hi WHO ke adesh ka palan kar uske talwe chat rahi thi, ab yeh khud uske liye apna failaya hua galat jankari wapis lena kathin ho gaya hai! Aur mujhe toh yhi lagta hai ki sarkar apne nirnay se piche nahi mukarne wali! Ab khel ek baar shuru ho chuka hai, toh pura hokar hi manega! Iska parinam ke taur par hamare masum bhartiya bhai behen apni jaan vyarth mein gawa denge, aur crore rupay ka ghotala hoga aur bhari bharkam rishwat pharma companies loot lenge, dawai aur vaccine ke naam par! Ap jaise kuch sacche desh bhakt, Dr Biswaroop Ji, Acharya Manish Ji, Dr Tarun Kothari aur tamam bhai log jo Rajiv Bhai ke vicharon par desh ko aage le jana chahte hain, un sbko mera naman! Ap log kripya aise hi apna muhim chalate rahe, jagrook karte rahe, hum apke saath hain aur prarthana hai ki ISHWAR apka sahyog kare!!

    Jai Hind
    Vande Mataram!!

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