सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

वामपंथी और क्रन्तिकारी होने में अंतर है!




वामपंथी और क्रन्तिकारी होने में अंतर है!
**********************************

वामपंथियों को अपनी विचारधारा की चिंता है देश से कोई लेना देना नहीं
परन्तु हमें केवल अपने देश की और आने वाली पीढ़ी से लेना देना है

कहाँ गए बड़े बड़े youtube चैनेलो के कर्ताधर्ता
बड़े देशभक्त बने फिरते है, जान देना तो छोड़ो youtube चैनल डिलीट न हो जाये इस डर से इस वायरस के षड्यंत्र पर चुप्पी साध ली

Thanks Bharat वाला भी भारत को थैंक्स कहकर इंडिया में चला गया क्या?

यही हाल और बहुत से तथाकथित सोशलमीडिया क्रांतिकारियों का है

पुष्पेंद्र जी को तो हिन्दू मुस्लिम से फुर्सत नहीं! उनका दोष नहीं है!

इस विषय पर 100 एपिसोड बनाने का दावा सुदर्शन चैनल वाले की भी २ एपिसोड दिखा कर हवा निकल गई

संघ ने तो जैसे अपने मुँह पर हाथ रखकर ऊपर से मास्क कसकर बाँध लिए है

बड़े बड़े तथाकथित संत तो खुद वायरस से डर के बैठे है और नहीं भी डर रहे तो कौन सरकार से उलझे?

हमारा मास्क जलाने की बात सुनकर तो कई लोगो को दस्त लग गए

मास्क जलाना तो दूर प्रोफाइल पर मास्क विरोधी फोटो का बैनर लगाने की हिम्मत नहीं कर पाए कई तो!

सरकार की गलत नीति का ही विरोध हम करते है लेकिन सरकार की हर नीति का ज़बरदस्ती का विरोध वामपंथी ही करते है और उनकी लाइन में खड़े कर न कर दिए जाये
यह डर सताने लगता है! फेसबुक या चैनल डिलीट हो गया तो! मोदी विरोधी का ठप्पा लगा दिया गया तो!
क्योंकि सरकार का विरोध मोदी विरोध आपस में पर्यायवाची शब्द बन गया है

मोदी विरोध साबित होते ही आप कांग्रेसी, राहुल समर्थक, वामपंथी, देशद्रोही आदि आदि साबित कर दिए गए तो?
मोदी के विकल्प का आभाव है इसका रोना रोयेंगे, मोदी जी भी कोई 100% परफेक्ट व्यक्ति नहीं है, उनसे भी गलत निर्णय हो सकते है! तो क्या यह समझ कर की वो PM है उनकी हर बात आँख बंद कर मान ली जायें?

अर्थात अनकही equation या समीकरण यह बनता है की सरकारी नीति का विरोधी = मोदी का विरोधी = देशद्रोही

कल को मोदी अपनी आयु के कारण या किसी भी कारण से PM नहीं रह पाए तो क्या देश नहीं चलेगा?
विकल्प सबका होता है!


लेकिन सरकार की नीति का विरोध या समीक्षा करना हमारा अधिकार है उसमे हम गलत भी हो सकते है सही भी!
गलत साबित हुए तो हम अधिक प्रसन्न होंगे परन्तु सही हुए तो देश कभी का हाल बहुत बुरा होगा

उन सब कायरो और डरपोकों को बता दू कि काले अंग्रेज़ो की सरकार और उसकी गलत नीतियों का विरोध राष्ट्रहित में क्रन्तिकारी ही कर सकते है और चाहे वो गोरे अंग्रेज़ो की सरकार हो या काले अंग्रेज़ो की

लेकिन यदि कोई सरकरी नीति आने वाली पीढ़ियों दीर्घकालिक प्रभाव डालेगी तो बर्दाश्त नहीं करेंगे
कोई साथ आए या न आएं कुछ दिन और देख रहे है!

******************

ऐसे सर्वे देखकर षड्यंत्रकारी विचार इस पर नहीं कर रहे कि टीके में कुछ गलत हो सकता है
बल्कि विचार इसपर हो रहा है कि टीके के लिए सबको राज़ी कैसे करें?

और राज़ी करने के लिए साम, दाम, दंड, भेद सब लागु होगा

समझे कुछ!

यही सर्वे इंडियन लोगो में करवा लो
पता लगेगा की 99 प्रतिशत कहेंगे कि कल की जगह आज ही टीका लगवा दो!

धोनी जैसो की रिटायरमेंट पर दुःख तो है इनको लेकिन देश के बच्चो का भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहे है उससे कोई मतलब नहीं

#VaccineVirodhi
-वीरेंद्र


टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

त्रिफला कल्प | Trifala Kalp : जानिए 12 वर्ष तक लगातार असली त्रिफला खाने के लाभ! |

हिन्दी English आयुर्वेद • त्रिफला • 12 वर्ष का कल्प त्रिफला कल्प जानिए 12 वर्ष तक लगातार असली त्रिफला लेने की पारंपरिक विधि त्रिफला केवल कभी-कभार पेट साफ करने वाला चूर्ण नहीं माना गया। आयुर्वेद में इसे रसायन के रूप में भी स्थान मिला है। यहाँ त्रिफला का सही अनुपात, आयु के अनुसार मात्रा, ऋतु के अनुसार अनुपान, 12 वर्ष के कल्प और इसके अन्य पारंपरिक प्रयोगों को सरल और व्यवस्थित रूप में रखा गया है। हरड़ बहेड़ा आँवला घी शक्कर संग खाए हाथी दाबे कांख में और चार कोस ले जाए 1 कोस लगभग 3–4 किलोमीटर त्रिफला आखिर है क्या? आयुर्वेद के अनुसार हरड़, बहेड़ा और आँवला—इन तीन फलों के मिश्रण को त्रिफला कहा जाता है। परंपरागत आयुर्वेदिक दृष्टि में इसे वात, पित्त और कफ के संतुलन से जोड़कर देखा गया है। पुराने वर्णनों में त्रिफला को दीर्घकालीन पोषण और कायाकल्प से भी जोड़ा गया है। त्रिफला किस अनुपात में बनता है? अभ...

प्यास लगी थी गजब की…मगर पानी मे जहर था…

 प्यास लगी थी गजब की…मगर पानी मे जहर था… पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते. बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!! ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!! वक़्त ने कहा…..काश थोड़ा और सब्र होता!!! सब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता!!! सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब…।। आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।। “हुनर” सड़कों पर तमाशा करता है और “किस्मत” महलों में राज करती है!! दौलत की भूख ऐसी लगी कि कमाने निकल गए दौलत मिली तो हाथ से रिश्ते निकल गए बच्चो में रहने की फुरसत न मिली कभी फुरसत मिली तो बच्चे खुद कमाने निकल गए “शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी, पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने, वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता”.. अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!! जवानी का लालच दे के बचपन ले गया…. अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. …… लौट आता हूँ वापस घर की तरफ… हर रोज़ थका-हारा, आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ। “थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!” भरी जेब ने ‘ दुनिया ‘ की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ‘ अपनो ‘...

2003 से संसद में सभी कोल्ड ड्रिंक्स ब्रांड की बिक्री पर रोक है भारत में क्यों नहीं?

2003 से संसद में सभी कोल्ड ड्रिंक्स ब्रांड की बिक्री पर रोक है पूरे  भारत में क्यों नहीं? सरकारों का दोगलापन हमेशा से रहा है, सेवक बनकर दलाली ही की है अब अविवेकी और व्यवस्था के गुलाम लोग ऐसी दलील देंगे कि "कोल्ड ड्रिंक नहीं बेचेंगे तो देश का खर्चा कहाँ से चलाएगी बेचारी  सरकार?" हमारे एक साथी भाई अनूप पाण्डेय जी भारत सरकार से यह जानकारी ली तो चित्र में लिखे पत्र में जवाब मिला उसका हिंदी में अनुवाद इस प्रकार है . *********************************************************************** प्रश्न 1 सरकार द्वारा एक सांसद को कितनी प्रकार की सब्सिडी दी जाती है प्रश्न २ और भारत सरकार इन सब्सिडी पर कितना खर्च करती है उत्तर मिला : यह अस्पष्ट प्रश्न है और RTI एक्ट के अंतर्गत नहीं आता **************************************************************************** प्रश्न 3 क्या यह सत्य है की संसद की कैंटीन में कोक और पेप्सी पर रोक है अगर हां तो क्यों? उत्तर मिला: संसद परिसर में 6 अगस्त 2003 से सभी ब्रांड की कोल्ड ड्रिंक और सॉफ्ट ड्रिंक की पूर्ती और बिक्री पर रोक है, यह निर्णय संसद परिसर में भोज...