Synthetic Preservative - धीमे ज़हर (लाइसेंस देकर जहर बेचने का व्यापार)

 


Synthetic Preservative - धीमे ज़हर- 

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हमारे पूर्वज वैज्ञानिकता के साथ अपना जीवन जीते थे लेकिन ऐसा कभी नही कहा कि हम वैज्ञानिकता से जीते है परंतु आज हम कहने तो विज्ञान के युग मे जी रहे है लेकिन हमारा जीवन जीने का ढंग पूरी तरह अवैज्ञानिक है 

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कभी आपने सोचा कि क्या आप किसी फल का रस घर मे निकालकर और अपने बच्चो को 3 महीने बाद उसे पीने के देती है क्या? आप कहेगी की नही दूंगी क्योंकि वो तो खराब होकर ज़हर बन गया लेकिन जब वही रस डब्बे में पैक करके कई महीनों की expiry date लिखकर कोई कंपनी आपको अच्छी से पैकिंग में बेचती है तो आप क्यो पिलाते हो तो आपका उत्तर होगा कि उसमें तो Preservative होते है। 


आज जानिए की सच क्या है? 


कुछ दिन पहले दिल्ली के प्रगति मैदान में लगे आहार मेले में गया। वहां पैक किये हुए केमिकल युक्त भोजन की भरमार थी। शाम को भूख लगी तो आहार मेले में खाने लायक आहार नही मिला। क्योंकि नीचे गूगल ड्राइव के लिंक की इस pdf में वहाँ लगी कुछ कंपनियों के स्टॉल द्वारा बेचे जा रहे synthetic preservative अर्थात जल्दी ख़राब होने वाले खाद्य पदार्थो को महीनों तक अप्राकृतिक रूप से खराब न होने देने वाले अप्राकृतिक मानवनिर्मित धीमे ज़हर के प्रचार हेतु पर्चो का संकलन है। 


https://drive.google.com/file/d/0B8p0iKVVr91abXdBbTkxeVFxbEU/view?usp=drivesdk


जहां हमारे घरों में प्राकृतिक preservative जैसे गन्ने के रस से बना सिरका (Gaudhuli.com पर उपलब्ध) अचार में राई, सरसों के तेल आदि से 20 साल तक भी वो ख़राब नही होते थे जो पूर्णतया वैज्ञानिक था 


परंतु यह बेकाबू और अमानवीय बाज़ारवाद ही है जो इस pdf में दिए धीमे विष को कानूनी रूप से बेचने का अधिकार दिलवा कर हमारी छाती पर बैठकर बेचा जा रहा है। इसे ध्यान से पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि हमारे भोजन, दवाई और सौंदर्य प्रसाधन (cosmetics) में इन धीमे ज़हरों की भरमार है।


मुनाफे के लिए चीनी से 200 औऱ 600 गुना अधिक मीठे केमिकल बनाकर बेचे जा रहे है जिसका मतलब है कि यदि किसी कारखाने में 600kg चीनी का प्रयोग होता है तो इस केमिकल से केवल 1kg में ही वो काम हो जाएगा लेकिन उसका आने वाली और वर्तमान पीढ़ियो पर क्या असर होगा वह कोई नही सोच रहा। 


सफेद रंग जो  क्रीम, पाउडर, टूथपेस्ट और कई खाने को सफेद और उजला रंग देने में काम आता है वो वास्तव में टाइटेनियम डाइऑक्साइड है।


खाद्य और पेय पदार्थों में और (अब तो वैक्सीन में भी होने लगा है) सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला preservative है सोडियम बेंज़ोएट (Sodium Benzoate)   जो पैकिंग पर E211 और E266 कोड से दर्शाया जाता है यह लगभग हर जगह प्रयोग होता है। वैसे तो इसमें कई अवगुण है लेकिन एक उदाहरण देता हूँ कि बाजार में मिलने वाली सारी पैकिंग वाली कोल्ड्रिंक्स और रसो में यह डलता है और धूप के संपर्क में आते ही यह कैंसरकारक  तत्व में बदल जाता है। तो आगे से यदि आप किसी भी बोतल को धूप में रखा देखे तो समझ जाइये की जब इसे फ्रिज में ठंडा करके बेचा जाएगा तो पीने वाले तो कैंसर होना तय है।


बाकी आप स्वयं अध्ययन करे और इसे अधिक से अधिक लोगो तक प्रेषित करें

अतः आगे से बाजार में मिलने वाली सभी वस्तुओं में यह सभी होगा इसे ध्यान में रखकर ही कुछ  खाने का सोचे।


ऐसे कृत्रिम रसायनमुक्त उत्पादों के लिए

Gaudhuli.com से अपने परिवार के लिए जैविक उत्पाद मंगवाए


जनहित में प्रेषित

वीरेंद्र सिँह

VirenderSingh.in

Fb.com/virendersingh16

Youtube.com/virendersingh16



Comments

  1. बहुत ही जरूरी जानकारी प्रदान की है आपने।

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  2. Absolutely True. Your Gut Health will be ruined if you eat or drink such products excessively. Vaidyaraj Anil has innovated Gba Drops from the Banyan Tree . Two Drops in a glass of water taken before Sleep takes care of your gut that is adversely affected due to the toxicity drunk or eaten during the day. Study POOPpeepers.com

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  3. Bahut sharm ki baat hai ajmal acchi chej ka koi prachar nhi hota aur jahar ka jaldi prachar hota hai

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