मोदीजी की थोपी गई सकारात्मक छवि ही देश का काल न बन जाएं!





मोदीजी की थोपी गई सकारात्मक छवि ही देश का न बन जाएं!


......बहुत खतरनाक महामारी है, मोदी बचा रहा है अन्यथा यहाँ भी सड़कों पर लाशों के ढेर लगे होते, कोई उठाने वाला नहीं होता, 

पूरी दुनिया में देखा नहीं क्या? दूसरे देशों में लोग जरूरत न हो तो खिड़की भी नहीं खोलते 

और यहाँ कितने ‘अनएजुकेटेड’ और जाहिल लोग है, किसी भी बिना ‘स्टैण्डर्ड’ की दूकान से सामान खरीद लेंगे, गाँव के लोग तो बिलकुल उजड्ड हैं, इनके क्या है फालतू बार बार बाहर निकलेंगे (बेचारा जिस आदमी का काम ही बार बार बाहर जाने का है, वह भी इनके लिए फालतू है), हम तो निकलते ही नहीं हैं किसी के घर भी नहीं जाते, उसके यहाँ पानी भी नहीं पीते, कुछ हो गया तो? भारत  के लोग बहुत लापरवाह हैं, सब्जियां लाते ही साबुन से धोकर दो दिन रख दो फिर काम में लो.....बाहर तो निकलो ही मत आदि आदि और न जाने क्या क्या?

पिछले पांच महीने से हमारे पडोसी भाईसाहब और उनके जैसे बहुत लोग यही सब ज्ञान बाँट रहे हैं, मैंने पाया कि इनमें ज्यादातर लोग वे हैं जिनके घर में अच्छा वेतन या पेंशन आती है या अन्य बहुत अच्छे आय के स्त्रोत है और ऐसे लोगों को अपना भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित प्रतीत होता है 

मैं भी उन्हीं लोगों में से एक हूँ जो 2014 में हर हाल में मोदी को प्रधानमंत्री के पद पर देखना चाहते थे, हमें लगता था कि मोदी जी देश की विकृत राजनीतिक संस्कृति को बदल डालेंगे.

जिस प्रकार रामदेव ने भगवे वस्त्र पहन कर विदेशी तरीको से बनाये सामान पर देसी ठप्पा लगाकर बेचा क्योंकि उनकी छवि योगगुरु की थी और योगगुरु स्वदेशी के नाम पर नूडल्स बेचे या जीन्स बेचे परन्तु लोग भगवे की छवि के कारण वो सही है या नहीं खरीद ही लेंगे। (इस पर विस्तृत लेख यहाँ पढ़े) ठीक वैसे ही 

 आज मुझे लगता है कि यदि आज मोदी की जगह यदि कोई और होता तो अच्छा था (विकल्प नहीं है या विकल्प 

समाप्त कर दिए गए यह अलग चर्चा का विषय है), इसलिए नहीं कि अन्य पार्टियां अच्छी हैं बल्कि इसलिए कि यदिमोदी की जगह कोई ख़राब छवि का व्यक्ति होता तो आज की परिस्थिति में जनता का अविश्वास और आक्रोश उमड़कर बाहर तो आता, आँख बंद करके लोग भक्ति में लीन तो न रहते, मीडिया लहर बनाकर मोदी की ज़बरदस्ती बनाई गई सकारात्मक छवि ही आज देश के लिए काल बनती दिख रही है।  

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मोदी का स्वप्रेम!

यह वीडियो है तो पुराना लेकिन इसमें मोदीजी जो सब लालचों से परे है और जिन्हे देश के अलावा किसी से प्रेम नहीं उन्होंने इस कमांडो को जिसने शायद मोदी को ही वोट दिया होगा उसको सिर्फ इसीलिए डांटा क्योंकि वो उनके और कैमरा के बीच आ था। ठीक है उसकी गलती हुई भी होगी लेकिन क्या यह व्यवहार एक ऐसे व्यक्ति को शोभा देता है जो स्वयं चाय बेचकर यहाँ पंहुचा। मोदी का यह कैमरा प्रेम अन्य कई बार जग जाहिर हुआ है।  यह सुरक्षाकर्मी जो उनकी सुरक्षा में आवश्यकता पड़ने पर स्वयं को न्योछावर भी कर देगा उसका अपमान कर देना यह दर्शाता है कि उनका स्वप्रेम किस स्तर का है।  

इसी गुण के कारण आज देश को कोरोना के समय एक ऐसे अंधकार में धकेल दिया है जहाँ वह अपनी छवि मसीहा की बनाने के चक्कर में आने वाली पीढ़ियों की भलाई न सोचकर उस उस पीढ़ी की इतिहास की किताबों में युगपुरुष के रूप में नाम अंकित करवाने कि विनाशकारी इच्छा लेकर पूरे देश पर एक नकली संकट से निकालने के चक्कर में बड़े और दीर्घकालिक संकट में फंसा दिया है। जिसे समझने का विवेक आज भारत के लोगो में नहीं है।  

जिस देश की सरकार राजनीती चमकाने के की इच्छाशक्ति होने के कारण पर धारा 370, अयोध्या विवाद, दुनिया का सबसे बड़ा परन्तु मूर्खतापूर्ण लॉकडाउन जैसे कार्य कर सकती है, टीको को लगाने की घर घर तक व्यवस्था कर सकती है, वह इस षड्यंत्र को न समझे संभव नहीं अपितु सरकारी तंत्र प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इसमें सम्मिलित है।  मोदी जी को भी लोग सन्यासी की संज्ञा देते है जो की गलत है क्योंकि सन्यास के कुछ अत्यंत कड़े नियम है जिसपर वह खरे नहीं उतारते उल्टा योगी जी जैसे वास्तविक सन्यासी को भी यह राजनीती झूठ बोलने पर विवश कर सकती है फिर औरो से तो कोई आशा नहीं की जा सकती।  

योगी जी को एक CM नही एक त्यागी, गोभक्त और निर्भीक सन्यासी होने के कारण नमन करता हूँ।  

यह विषय है कोरोना lockdown के समय उनके पूर्वाश्रम के पिता जी के अंतिम संस्कार में न जाने के निर्णय के बारे मे। 

तो प्रश्न यह है कि क्या सन्यासी धर्म के अनुसार किसी सन्यासी को अपने त्यागे हुए परिवार के अंतिम संस्कार में जाने का नियम है?

सन्यास लेने के पश्चात अपने माता पिता या परिवार से पूर्णतया विरक्त हो जाता है सन्यास नियम के अनुसार वह सब त्याग देता है तो अपने पिता के अंतिम संस्कार में यदि lockdown नही भी होता तो भी योगी जी शायद नही जाते। परंतु वहां कोरोना lockdown के कारण नियम पालन के लिए न जाने की बात के पीछे उनकी कौन सी मजबूरी रही यह प्रश्न मन मे उठा।


https://www.youtube.com/watch?v=SGFIWwoPe4M


यह लेख पढ़कर जिनको मैं कांग्रेस का एजेंट, वामपंथी या मोदीविरोधी लग रहा हूँ वो अपनी मूर्खता का स्वयं ज़िम्मेदार है।  और हो सके तो यह पोस्ट पढ़ लेना 

सरकार की कुछ नीतियों का विरोधी

- वीरेंद्र  

Comments

  1. Railway ko so called loss & Banks ko NPA ke naam pr privatise krne ki baat aur ab process joro pr chl rhi hai.
    Aage aane wali pidhi ka future to waisey hi lg rha hai jisey east india company ke padaarpn ke baad us time shayad hua tha.
    Lekin aaj samasya ye hai ki lare kin se. Congress BJP naam ki partiyo se Islamic aatankwaad aur zihaad se andhbhakto se samaj ke din pratidin ho rhe naitik patan se ya berozgaar aur tezi se makolaywaadi banti abaadi se. Koi bhi km bhayawah aur sarl nhi hai.
    Balpurvak Vaccine ka virodh krne ki baat apne aas paas kro to npunsk ye kahenge ki nhi ek Injection �� lgwane me kya hai sb to gaddhe me kood rhe hi to hm kya special hai. Sarkar ne bhi to kuch socha hi hoga.
    Acha socha hai sarkar ne aur badhiya hai apne kaayrta ko chupane ka dhang.

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  2. https://youtu.be/DE95Z4DqRTg
    Bhaiya please aisa kuch kriye me bhi help kr skunga to krunga

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  3. https://youtu.be/DE95Z4DqRTg
    Bhaiya please is video se kuch help le skte hain hm log me bhi help Krna chahta hun,

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  4. शत-प्रतिशत सत्य बात. इससे खतरनाक समय और क्या होगा कि जब हमने डुबाने वाले को ही बचाने वाला मान लिया है.

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  5. शत-प्रतिशत सत्य बात. अंध-विश्वास किसी पर भी हो, हर हाल में घातक ही होता है. मोदी जी की आत्म-मुग्धता और लोगों की उनके प्रति अंध-श्रद्धा भारत को एक निश्चित बर्बादी की ओर ही ले जा रही है.

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  6. बहुत बहुत धन्यवाद भाई

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