असल सवाल होना चाहिए— मोदी के बाद कैसा?




2029 में यदि वर्तमान सरकार या कहे मोदी हारते हैं तो बात सिर्फ सरकार बदलने की नहीं होगी।

मामला उससे बड़ा है।

भारत आज जिस दिशा में जा रहा है, उसी दिशा में यदि पाँच साल और चला तो आज की कई गड़बड़ियाँ इतनी गहरी हो सकती हैं कि बाद में उन्हें ठीक करना संभवतः असंभव हो जाये।

और हाँ…

यह भी मत सोच लेना कि कोई दूसरा प्रधानमंत्री आएगा तो अगले दिन सब ठीक हो जाएगा।

इतना बड़ा देश कोई खराब मोबाइल नहीं है कि restart किया और चल पड़ा।

जो चीजें दस-पन्द्रह साल में बिगड़ी हैं, वे दस-पन्द्रह महीने में ठीक नहीं होंगी।

अगला प्रधानमंत्री सिर्फ लोकप्रिय होना काफी नहीं।

उसे पढ़ा-लिखा होना चाहिए।

शासन समझना चाहिए।

संस्थाएँ क्यों बनाई गई हैं, यह समझना चाहिए।

हर चीज को अपने हाथ में लेने की बीमारी नहीं होनी चाहिए।

और सबसे जरूरी—

उसमें धैर्य होना चाहिए।

क्योंकि देश चलाना चुनाव जीतने से अलग काम है।

चुनाव नारों से जीते जा सकते हैं।

देश नारों से नहीं चलता।

इसलिए 2029 में सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए—

मोदी रहें या मोदी जाएँ?

सवाल यह होना चाहिए—

भारत को अगला नेतृत्व कैसा चाहिए?

मोदी नहीं तो कौन?

असल सवाल होना चाहिए—

मोदी के बाद कैसा?

चेहरा बदल देना बहुत आसान है।

दिशा बदलना मुश्किल है।

और 2029 में असली चुनाव शायद चेहरे का नहीं…

दिशा का होगा।


वीरेन्द्र की कीबोर्ड रूपी कलम से 

भ्रमित भारतीयो के भ्रम का भ्रमण


VirenderSingh.in

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

त्रिफला कल्प: जानिए 12 वर्ष तक लगातार असली त्रिफला खाने के लाभ!

प्यास लगी थी गजब की…मगर पानी मे जहर था…

2003 से संसद में सभी कोल्ड ड्रिंक्स ब्रांड की बिक्री पर रोक है भारत में क्यों नहीं?